चंद्रपुर जिले की गोंडपिपरी तहसील में प्रस्तावित करंजी एमआईडीसी (MIDC) के लिए भूमि अधिग्रहण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। प्रभावित 12 गांवों के किसानों ने अपनी उपजाऊ खेती की जमीन देने से साफ इनकार कर दिया है और प्रशासन द्वारा तय की गई मापणी प्रक्रिया का कड़ा विरोध शुरू कर दिया है।
शुक्रवार, 30 अक्टूबर को गोंडपिपरी तहसील कार्यालय में जिला प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और किसानों के बीच एक संयुक्त बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में किसानों ने दोटूक शब्दों में कहा कि जब वे अपनी जमीन देने के लिए तैयार ही नहीं हैं, तो मुआवजे की दरों पर चर्चा करने का कोई औचित्य नहीं बनता है। किसानों ने चेतावनी दी है कि भूमि की मापणी (सर्वेक्षण) के लिए खेतों में आने वाले अधिकारियों को गांवों और खेतों में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।
मुआवजे की दरों और सुनवाई प्रक्रिया पर नाराजगी
प्रशासन की ओर से प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपए की दर घोषित किए जाने के बाद किसानों का यह विरोध और अधिक तीव्र हो गया है। किसानों का तर्क है कि यह दर उनकी आजीविका के साधन यानी उपजाऊ जमीन के मुकाबले बेहद कम और अव्यवहारिक है। इसके साथ ही, किसानों ने व्यक्तिगत सुनवाई की प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए सभी प्रभावित किसानों की एक सामूहिक जनसुनवाई आयोजित करने की पुरजोर मांग उठाई है।
इस उच्च स्तरीय बैठक में विधायक देवराव भोंगले, जिला कलेक्टर वसुमना पंत, पुलिस अधीक्षक आयुष नोपानी, उपविभागीय अधिकारी आकाश वर्मा, तहसीलदार शुभम बहाकर, उपविभागीय पुलिस अधिकारी सत्यजित आमले और गोंडपिपरी के थानेदार हेमंत पवार सहित विभिन्न विभागों के प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।
प्रशासन का रुख और जनप्रतिनिधि का पक्ष
जिला प्रशासन ने बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि न्यायालय के आगामी निर्णयों के अधीन रहते हुए, दिवाली के अवकाश के पश्चात भूमि अधिग्रहण की आगामी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। प्रशासन ने किसानों को इस संबंध में अपने निर्देश भी दिए हैं।
दूसरी ओर, क्षेत्र के विधायक देवराव भोंगले ने गोंडपिपरी तहसील के विकास को प्राथमिकता बताते हुए कहा कि क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए औद्योगिक इकाइयों की स्थापना बेहद आवश्यक है। हालांकि, किसानों ने अपनी जमीनों को बचाने के लिए एकजुट होकर मापणी और व्यक्तिगत सुनवाई के विरोध का अपना रुख बरकरार रखा है।
बैठक में शेतकरी एकता कृति समिति और औद्योगिक कृति संघर्ष समिति के प्रमुख पदाधिकारियों सहित 12 प्रभावित गांवों के नागरिक और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। इनमें सचिन फुलझेले, मारोती भोयर, कमलेश निमगडे, राजेश कवठे, संजय वडस्कर, सुरज माडूरवार, राजू झाडे, माधव लडके और कल्पेश खरबनकर प्रमुख रूप से शामिल थे।