उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित डीएवी (पीजी) कॉलेज के छात्रसंघ चुनावों के नतीजे आ चुके हैं, और इस बार के चुनावी रण में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने शानदार वापसी करते हुए अध्यक्ष पद पर अपना कब्जा जमा लिया है। कॉलेज परिसर में इन दिनों चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर थी और आखिरकार मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को स्थिति पूरी तरह से साफ हो गई। मुख्य चुनाव अधिकारी डॉ. अनिल पाल ने आधिकारिक रूप से चुनाव परिणामों की घोषणा की, जिसके बाद विजेता प्रत्याशियों के समर्थकों में जश्न का माहौल है।
अध्यक्ष पद पर नवदीप राणा की रोमांचक जीत
डीएवी कॉलेज के छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए मुकाबला बेहद कड़ा और रोमांचक रहा। अभाविप के टिकट पर मैदान में उतरे नवदीप राणा ने अपने प्रतिद्वंद्वियों को कड़ी टक्कर देते हुए यह प्रतिष्ठित पद अपने नाम किया। नवदीप राणा को कुल 1,759 वोट मिले, जो उन्हें इस चुनावी महासमर का विजेता बनाने के लिए पर्याप्त साबित हुए।
उनके ठीक पीछे एनएसयूआई के प्रत्याशी सौरभ सेमवाल रहे, जिन्हें 1,665 मत प्राप्त हुए। इस प्रकार नवदीप राणा ने बेहद कड़े मुकाबले में सौरभ सेमवाल को 94 मतों के अंतर से शिकस्त दी। वहीं, इस दौड़ में आर्यन छात्र संगठन के अमित सिंह भी शामिल थे, जिन्हें 998 वोट मिले, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार तान्या को मात्र 36 वोटों से संतोष करना पड़ा। अध्यक्ष पद पर अभाविप की इस जीत को संगठन के लिए एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
अन्य प्रमुख पदों पर भी बंटे चुनावी नतीजे
भले ही अध्यक्ष पद पर अभाविप ने बाजी मार ली हो, लेकिन अन्य महत्वपूर्ण पदों पर मुकाबला काफी मिला-जुला रहा और विभिन्न छात्र संगठनों तथा निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज करके अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। परिणामों की विस्तृत तस्वीर कुछ इस प्रकार रही:
- उपाध्यक्ष पद: इस पद पर एसएफआई (SFI) के शैलेंद्र सिंह ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने कुल 2,388 मत हासिल करके उपाध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा जमाया।
- सचिव पद: सचिव पद के चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार नीलांश ने बाजी मारी। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ते हुए 2,355 मत प्राप्त किए। उनके मुकाबले सत्यम शिवम ग्रुप के दीपक राणा मैदान में थे, जिन्हें 1,953 वोट मिले।
- कोषाध्यक्ष पद: कोषाध्यक्ष पद पर अंजलि भट्ट विजयी रहीं। उन्होंने कुल 1,507 मत प्राप्त कर इस अहम जिम्मेदारी को अपने नाम किया।
- संयुक्त सचिव पद: अनुष्का ठाकुर ने संयुक्त सचिव पद पर जीत हासिल की, जिन्हें कुल 892 मत मिले।
- विश्वविद्यालय प्रतिनिधि (यूआर): इस पद के लिए हुए मतदान में अनुज डोभाल ने बाजी मारी और 1,247 मत प्राप्त कर निर्वाचित घोषित किए गए।
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कॉलेज परिसर में दिखा जश्न का माहौल
जैसे ही मुख्य चुनाव अधिकारी डॉ. अनिल पाल ने परिणामों की आधिकारिक घोषणा की, डीएवी कॉलेज का मुख्य प्रांगण ढोल-नगाड़ों की थाप और छात्र नारों से गूंज उठा। विजयी प्रत्याशियों के समर्थकों ने उन्हें फूलों की मालाओं से लाद दिया और हवा में गुलाल उड़ाकर अपनी खुशी का इजहार किया। सुरक्षा के लिहाज से कॉलेज परिसर और आसपास के इलाकों में पुलिस बल भी तैनात किया गया था ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके, हालांकि चुनाव और परिणाम शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुए।
विशेष उपलब्धियों के आधार पर तीन सदस्यों का मनोनयन
छात्रसंघ की कार्यकारिणी को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा विभिन्न गतिविधियों में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कॉलेज प्रशासन ने तीन विशेष सदस्यों का मनोनयन भी किया है। इन नामांकनों में उन विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी गई है जिन्होंने शैक्षणिक वर्ष के दौरान अपनी-अपनी विधाओं में कॉलेज का नाम रोशन किया है:
- खेलकूद (Sports): खेलकूद के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए त्वैसा सिंह को कार्यकारिणी में मनोनीत किया गया है।
- एनसीसी (NCC): एनसीसी गतिविधियों में अपनी सक्रियता और बेहतरीन प्रदर्शन के लिए राधिका नेगी को चुना गया है।
- रेंजर-रोवर (Ranger-Rover): रेंजर-रोवर गतिविधियों में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए निकिता शर्मा को इस सूची में शामिल किया गया है।
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छात्र राजनीति के समीकरणों पर एक नजर
विश्लेषकों का मानना है कि डीएवी पीजी कॉलेज के ये चुनाव आगामी छात्र राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। अभाविप का अध्यक्ष पद पर जीत हासिल करना यह साबित करता है कि कॉलेज के छात्रों के बीच उनका जनाधार अभी भी मजबूत है। वहीं, उपाध्यक्ष पद पर एसएफआई और सचिव पद पर निर्दलीय प्रत्याशी की जीत यह दर्शाती है कि छात्र किसी एक दल के पक्ष में पूरी तरह झुकने के बजाय योग्यता और व्यक्तिगत छवि को भी तवज्जो दे रहे हैं।
बहरहाल, चुनाव संपन्न होने के बाद अब नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के सामने छात्रों की उम्मीदों पर खरा उतरने की बड़ी चुनौती होगी। कॉलेज की पठन-पाठन व्यवस्था, परिसरों की आधारभूत सुविधाओं और छात्रों की समस्याओं का समाधान करना नई कार्यकारिणी की प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए। छात्र अब इन युवा नेताओं से उम्मीद कर रहे हैं कि वे अपने वादों पर खरे उतरेंगे और कॉलेज के विकास में अपनी अहम भूमिका निभाएंगे।