गढ़वाल राइफल्स अभिलेख कार्यालय, लैंसडाउन पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और उनके आश्रितों के कल्याण के लिए तत्परता से कार्य कर रहा है।
भारतीय सेना से सेवानिवृत्ति के बाद भी सैनिकों का अनुशासन, स्वाभिमान और अपने साथियों के प्रति उत्तरदायित्व कभी समाप्त नहीं होता। इसी भावना के साथ गढ़वाल राइफल्स के पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के लिए लैंसडाउन स्थित अभिलेख कार्यालय एक मजबूत सहारा बनकर उभरा है। इस कार्यालय द्वारा पिछले दो वर्षों में पूर्व सैनिकों की रुकी हुई पेंशन, एरियर और अन्य वित्तीय देयकों के भुगतान में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।
दस्तावेजी विसंगतियों का त्वरित समाधान
वर्ष 1984 के बाद सेना में भर्ती हुए कई सैनिकों के सेवा दस्तावेजों, नाम, जन्मतिथि और आश्रितों के विवरण में मामूली अंतर रह गया था। सेवाकाल के दौरान इन त्रुटियों पर ध्यान नहीं गया, लेकिन बाद में यही कमियां पत्नियों की पारिवारिक पेंशन और ईसीएचएस (ECHS) कार्ड बनवाने में बड़ी बाधा बन जाती हैं। ऐसे मामलों में परिवारों को दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे वे मानसिक तनाव का सामना करते हैं।
गढ़वाल राइफल्स अभिलेख कार्यालय ऐसे मामलों में सही मार्गदर्शन और दस्तावेजों के जरिए रिकॉर्ड की विसंगतियों को दूर करने में सक्रिय सहयोग दे रहा है। उदाहरण के लिए, 8 गढ़वाल राइफल्स के हवलदार प्रेम सिंह और हवलदार अवतार सिंह की पत्नियों के आधार कार्ड और पेंशन रिकॉर्ड में नाम की भिन्नता को दूर करने में कार्यालय ने सहायता प्रदान की, जिससे उनकी पेंशन संबंधी बाधाएं दूर हुईं।
स्वास्थ्य संकट में मानवीय सहायता
हाल ही में एक 75 वर्षीय बुजुर्ग पूर्व सैनिक की अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। उन्होंने समय रहते ईसीएचएस कार्ड नहीं बनवाया था, जिसके कारण अस्पताल का खर्च लगातार बढ़ रहा था और परिवार गहरी चिंता में था। कार्ड के नवीनीकरण या सत्यापन में तकनीकी बाधाएं आ रही थीं। ऐसे कठिन समय में अभिलेख कार्यालय के अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को समझा और नियमों के दायरे में रहते हुए त्वरित सहायता सुनिश्चित की, जिससे बुजुर्ग पूर्व सैनिक को जरूरी राहत मिली।
अधिकारियों का कुशल नेतृत्व और आभार
इस संवेदनशील कार्यप्रणाली और मानवीय दृष्टिकोण के पीछे ब्रिगेडियर विनोद नेगी (वीएसएम, कमांडेंट) का कुशल नेतृत्व रहा है। पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों द्वारा इस बात पर जोर दिया गया है कि जब अधिकारियों में कर्तव्य के साथ संवेदनशीलता हो, तो जटिल समस्याओं का समाधान भी आसान हो जाता है।
समस्याओं के समाधान और उचित मार्गदर्शन के लिए पूर्व सैनिकों ने ब्रिगेडियर विनोद नेगी, मुख्य अभिलेख अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल प्रताप सिंह, वरिष्ठ अभिलेख अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल मनीष तथा मेजर दिलवाग सिंह के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया है। यह पहल दर्शाती है कि भारतीय सेना का परिवार सेवानिवृत्ति के बाद भी अपने हर सदस्य के साथ मजबूती से खड़ा रहता है।