उत्तराखंड के प्रसिद्ध केदारनाथ धाम से बासुकीताल के बीच के कठिन और दुर्गम ट्रेक मार्ग पर सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन की धड़कनें उस वक्त बढ़ गईं, जब पांच ट्रेकर्स के अचानक लापता होने की सूचना मिली। इस घटना के सामने आने के बाद से ही इलाके में हड़कंप मचा हुआ है और लापता लोगों को सुरक्षित ढूंढने के लिए युद्धस्तर पर खोज एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है। मौसम की तमाम चुनौतियों को दरकिनार करते हुए रेस्क्यू टीमें लगातार दुर्गम पहाड़ियों को खंगाल रही हैं।
कठिन मार्ग और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां
केदारनाथ से बासुकीताल का ट्रेक अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ अपनी अत्यधिक कठिनाई के लिए भी जाना जाता है। समुद्र तल से काफी अधिक ऊंचाई पर स्थित यह मार्ग पथरीला, संकरा और अप्रत्याशित मौसम वाला है। यहां पल-पल में मौसम का मिजाज बदल जाता है, जिससे अच्छे-अच्छे अनुभवी ट्रेकर्स भी गच्चा खा जाते हैं। शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, ये पांचों ट्रेकर्स एक तयशुदा रूट पर आगे बढ़ रहे थे, लेकिन अचानक उनका संपर्क बेस कैंप और अन्य साथियों से टूट गया।
लापता होने की खबर मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस, राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और स्थानीय ट्रेकिंग गाइडों की संयुक्त टीमों को तुरंत एक्शन मोड में लाया गया। जमीन पर पैदल सर्च ऑपरेशन चलाने के साथ-साथ अब इस अभियान को और व्यापक रूप दे दिया गया है ताकि कम से कम समय में सटीक सुराग मिल सके।
हेलीकॉप्टर की ली जा रही है मदद
पैदल मार्ग और गहरी खाइयों में इंसानी पहुंच सीमित होने के कारण प्रशासन ने हवाई मदद का सहारा लिया है। केदारनाथ-बासुकीताल ट्रेक के ऊंचे और संकरे इलाकों में लापता ट्रेकर्स की तलाश के लिए एक विशेष हेलीकॉप्टर तैनात किया गया है। यह हेलीकॉप्टर उन दुर्गम चोटियों, ढलानों और झीलों के आसपास के इलाकों की एरियल सर्वे (हवाई निगरानी) कर रहा है, जहां पैदल चलना बेहद जोखिम भरा या असंभव होता है।
- रेस्क्यू अभियान की मुख्य बातें:
- एरियल सर्विलांस: हेलीकॉप्टर के जरिए उन इलाकों को खंगाला जा रहा है जहां पैदल रेस्क्यू टीम का पहुंचना मुश्किल है।
- मल्टी- एजेंसी कोऑर्डिनेशन: एसडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय प्रशासन मिलकर जमीन पर सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं।
- मौसम पर पैनी नजर: पर्वतीय क्षेत्र के लगातार बदलते मौसम के बीच रेस्क्यू टीमों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
- कम्युनिकेशन सेटअप: लापता ट्रेकर्स के पास यदि कोई सैटेलाइट फोन या रेडियो डिवाइस है, तो उसके सिग्नल ट्रेस करने की कोशिश हो रही है।
प्रशासन और विशेषज्ञों की अपील
इस घटना के बाद एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में बिना पूरी तैयारी और पंजीकरण के ट्रेकिंग करने के जोखिमों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन लगातार पर्यटकों और ट्रेकिंग प्रेमियों से अपील कर रहा है कि वे बिना स्थानीय गाइड, मौसम की पुख्ता जानकारी और प्रशासनिक अनुमति के इस तरह के जोखिम भरे रास्तों पर न निकलें।
फिलहाल, पूरा प्रशासनिक अमला और रेस्क्यू दल लापता ट्रेकर्स की सलामती की दुआ करते हुए अपनी खोज में जुटा हुआ है। आने वाले कुछ घंटों में इस सर्च ऑपरेशन को लेकर कुछ और महत्वपूर्ण खुलासे या सफलता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हर कोई यही प्रार्थना कर रहा है कि सभी ट्रेकर्स सुरक्षित अपने घर लौट आएं।