Breaking
► रिटायर्ड सैनिकों के लिए जरूरी खबर: DSP अकाउंट को तुरंत कराएं DPA में कन्वर्ट ► FASTag Annual Pass: ₹3,075 में एक साल का टोल पास, जानिए नियम और बचत का गणित ► गड़चिरोली में भेंडाला के किसानों का चक्काजाम, भूमि अधिग्रहण का विरोध ► छत्तीसगढ़ के तीन राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी बने आईएएस, केंद्र ने जारी की अधिसूचना ► आगरा दौरे पर सीएम योगी: शिवाजी म्यूजियम का निरीक्षण और एमएलसी प्रत्याशियों के लिए जनसभा ► ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी का फिल्मी सफर: पिता की नाराजगी से लेकर रिजेक्शन तक की कहानी ► पूर्व IAS दिव्या मित्तल ने बनाई 'जननीति भारत' पार्टी, 2027 के यूपी चुनाव पर नजर ► फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के सहारे यूपी में चल रहे 3000 करोड़ के काम, जीएस एक्सप्रेस का ठेका रद्द करने की नोटिस ► सपा महानगर अध्यक्ष शब्बीर अब्बास का भाजपा पर हमला, महंगाई और बेरोजगारी को लेकर उठाए सवाल ► पटना में डेयरी फैक्ट्री पर खाद्य विभाग का छापा, खतरनाक केमिकल और मिलावटी मिठाइयां जब्त ► रिटायर्ड सैनिकों के लिए जरूरी खबर: DSP अकाउंट को तुरंत कराएं DPA में कन्वर्ट ► FASTag Annual Pass: ₹3,075 में एक साल का टोल पास, जानिए नियम और बचत का गणित ► गड़चिरोली में भेंडाला के किसानों का चक्काजाम, भूमि अधिग्रहण का विरोध ► छत्तीसगढ़ के तीन राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी बने आईएएस, केंद्र ने जारी की अधिसूचना ► आगरा दौरे पर सीएम योगी: शिवाजी म्यूजियम का निरीक्षण और एमएलसी प्रत्याशियों के लिए जनसभा ► ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी का फिल्मी सफर: पिता की नाराजगी से लेकर रिजेक्शन तक की कहानी ► पूर्व IAS दिव्या मित्तल ने बनाई 'जननीति भारत' पार्टी, 2027 के यूपी चुनाव पर नजर ► फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के सहारे यूपी में चल रहे 3000 करोड़ के काम, जीएस एक्सप्रेस का ठेका रद्द करने की नोटिस ► सपा महानगर अध्यक्ष शब्बीर अब्बास का भाजपा पर हमला, महंगाई और बेरोजगारी को लेकर उठाए सवाल ► पटना में डेयरी फैक्ट्री पर खाद्य विभाग का छापा, खतरनाक केमिकल और मिलावटी मिठाइयां जब्त

सीमावर्ती गांवों की बदलेगी तस्वीर, वाइब्रेंट विलेज प्रोजेक्ट्स पर बड़ा निर्देश

सीमावर्ती गांवों की बदलेगी तस्वीर, वाइब्रेंट विलेज प्रोजेक्ट्स पर बड़ा निर्देश

देश की सीमाओं से लगे दूरदराज के गांवों की तस्वीर अब पूरी तरह बदलने वाली है। सामरिक दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील और भौगोलिक रूप से दुर्गम सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए प्रशासनिक स्तर पर कवायद तेज हो गई है। हाल ही में सचिवालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान राज्य के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के अंतर्गत आने वाली सभी प्रस्तावित परियोजनाओं की प्राथमिकता तय की जाए और उसके बाद ही उन्हें अंतिम रूप देकर केंद्र सरकार के पास भेजा जाए। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सरहद के पास बसे गांवों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना और वहां से होने वाले पलायन को रोकना है।

राज्य स्तरीय अनुमोदन समिति की बैठक में हुआ मंथन

सचिवालय में आयोजित राज्य स्तरीय अनुमोदन समिति (एसएलएससी) की महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने की। इस बैठक में कार्यक्रम के पहले और दूसरे चरण (फेज-1 और फेज-2) के तहत अब तक किए गए कार्यों की समीक्षा के साथ-साथ भविष्य की कई नई विकास योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों की जमीनी रिपोर्ट समिति के समक्ष रखी।

चर्चा के दौरान मुख्य सचिव ने जोर देकर कहा कि परियोजनाओं का चयन करते समय कागजी औपचारिकताओं के बजाय धरातल की वास्तविक जरूरतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों की जीवनशैली को सुगम बनाने और देश की सीमाओं की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए यह योजना मील का पत्थर साबित हो सकती है।

किन बुनियादी सुविधाओं को मिल रहा है सबसे ज्यादा महत्व?

वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत सरकार का पूरा फोकस उन मूलभूत सुविधाओं पर है जो अब तक दुर्गम इलाकों के कारण वहां के लोगों को नहीं मिल पाई हैं। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन क्षेत्रों में निम्नलिखित प्राथमिकताओं पर विशेष ध्यान दिया जाए:

  • सड़क और परिवहन: हर मौसम में चालू रहने वाली पक्की सड़कों का निर्माण ताकि आपात स्थिति में भी संपर्क न कटे।
  • विद्युत ग्रिड और ऊर्जा: दूरदराज के गांवों तक बिजली पहुंचाना और रिन्यूएबल एनर्जी सोर्सेज को बढ़ावा देना।
  • कम्युनिकेशन नेटवर्क: मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट, और टेलीविजन सेवाओं का विस्तार ताकि बाहरी दुनिया से संपर्क बना रहे।
  • पर्यटन विकास: सीमावर्ती इलाकों में होमस्टे और टूरिज्म से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देना ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा हो सके।

सुरक्षा बलों के साथ बेहतर तालमेल पर जोर

सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा में तैनात भारतीय सेना, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की भूमिका बेहद अहम होती है। इसे ध्यान में रखते हुए मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि सुरक्षा बलों से जुड़ी जरूरी आवश्यकताओं और रणनीतिक परियोजनाओं को भी समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। इन प्रोजेक्ट्स को शामिल करने से न केवल सुरक्षा तंत्र मजबूत होगा, बल्कि सैनिकों और स्थानीय नागरिकों दोनों को फायदा मिलेगा।

जिला प्रशासन को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों का अध्ययन करें और उसी के आधार पर योजनाओं के प्रस्ताव तैयार करें।

वित्तीय संसाधनों का होगा बेहतर प्रबंधन

परियोजनाओं के क्रियान्वयन में किसी तरह की धन की कमी न आए, इसके लिए प्रशासन ने एक स्मार्ट रणनीति बनाई है। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया है कि केंद्र को भेजे जाने वाले प्रस्तावों में परियोजनाओं की प्राथमिकता अवरोही क्रम (Descending Order) में होनी चाहिए।

इसके साथ ही, यह भी निर्देश दिए गए हैं कि जिन विकास कार्यों के लिए केंद्र या राज्य की अन्य किसी मौजूदा योजना के तहत बजट मिल सकता है, उन्हें उन्हीं योजनाओं के माध्यम से वित्तपोषित कराया जाए। ऐसा करने से वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम का बजट अन्य जरूरी और विशिष्ट परियोजनाओं के लिए बचाया जा सकेगा, जिससे कम खर्च में ज्यादा से ज्यादा विकास कार्य हो सकें।

हर जिले से तैयार होंगे पांच बड़े और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट

इस पूरी योजना को एक तय समयसीमा और विजन के साथ आगे बढ़ाने के लिए राज्य के प्रत्येक संबंधित जिले को पांच-पांच बड़े और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट तैयार करने को कहा गया है। इन प्रोजेक्ट्स में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं को समाहित करने के निर्देश दिए गए हैं:

  • बेहतर कनेक्टिविटी और आधारभूत ढांचे का विकास।
  • स्थानीय आजीविका और स्वरोजगार के नए अवसर।
  • पर्यटन और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण।
  • सीमावर्ती क्षेत्रों की खास रणनीतिक आवश्यकताएं।

शीर्ष अधिकारियों की रही मौजूदगी

इस उच्चस्तरीय बैठक में शासन के कई बड़े चेहरे और विभागाध्यक्ष मौजूद रहे। इनमें प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, डीजी कारागार अभिनव कुमार, सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल, सी. रविशंकर और आईजी डॉ. नीलेश आनंद भरणे ने अपने-अपने विभागों से जुड़े अहम सुझाव दिए। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि मुख्य सचिव द्वारा दिए गए निर्देशों के तहत बहुत जल्द सभी प्रस्तावों को अंतिम रूप देकर केंद्र सरकार को भेज दिया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन योजनाओं को तय समयसीमा के भीतर पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ लागू किया गया, तो देश के सीमावर्ती गांवों की डेमोग्राफी पूरी तरह बदल जाएगी। इससे न सिर्फ पलायन रुकेगा, बल्कि देश की सरहदें भी अंदर से और अधिक सुरक्षित और मजबूत बन सकेंगी।

About the Author

नसीम अहमद

नसीम अहमद

Writer

नसीम अहमद जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं। उन...

Read More

अगली खबर पढ़ें:

आगे पढ़ें →