देहरादून की सड़कों पर इतिहास के पहिए उस समय दौड़ पड़े जब विरासत आर्ट एंड हेरिटेज फेस्टिवल के अंतर्गत एक भव्य विंटेज कार और बाइक रैली का आयोजन किया गया। इस अनूठी रैली में सदी से भी अधिक पुरानी साइकिल से लेकर द्वितीय विश्व युद्ध के दौर के सैन्य वाहनों तक ने शहरवासियों का ध्यान अपनी ओर खींचा।
राजधानी देहरादून में रीच संस्था के तत्वावधान में हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित सांस्कृतिक महोत्सव के तीसरे दिन यह विंटेज वाहन रैली निकाली गई। इस आयोजन ने पुराने वाहनों के शौकीनों और आम नागरिकों को अपने दौर की बेहतरीन इंजीनियरिंग, तकनीक और डिजाइन को करीब से देखने का शानदार अवसर प्रदान किया।
सदी पुरानी साइकिल से लेकर युद्धकालीन जीप तक बनीं शान
रैली में शामिल होने वाले वाहनों का इतिहास जितना पुराना था, उनकी बनावट उतनी ही दिलचस्प थी। इस काफिले में सबसे खास आकर्षण का केंद्र वर्ष 1870 की फायरफॉक्स साइकिल रही। इसके अलावा वर्ष 1926 की शेवरले कार और द्वितीय विश्व युद्ध के दौर की ब्रिटेन स्थित फोर्ड कंपनी द्वारा वर्ष 1944 में निर्मित जीप ने भी लोगों में गहरी उत्सुकता जगाई। इन वाहनों की चमक-दमक और उनकी बेहतरीन संभाल को देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनके मालिकों ने इन्हें कितनी सावधानी से सहेज कर रखा है।
रैली का तय मार्ग और उमड़ी भीड़
इस ऐतिहासिक और आकर्षक विंटेज रैली को समाजसेवी डॉ. एस. फारुख ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र से शुरू हुई यह रैली कौलागढ़ से होते हुए चकराता रोड और शहर के व्यस्त समझे जाने वाले घंटाघर से गुजरी और अंत में वापस हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र पर आकर संपन्न हुई। रास्ते भर इन पुरानी गाड़ियों के दीदार के लिए सड़क किनारे लोगों की अच्छी खासी भीड़ जुटी रही। वाहन चालकों ने भी अपनी गाड़ियों की गति धीमी कर लोगों का उत्साह बढ़ाया।
70 दोपहिया और 30 विंटेज कारों का हुआ था पंजीकरण
आयोजकों के अनुसार, इस विशेष रैली के लिए कुल 100 पुराने वाहनों का पंजीकरण किया गया था। इसमें 70 दोपहिया वाहन और 30 विंटेज कारें शामिल थीं। कारों और मोटरसाइकिलों के इस बड़े काफिले ने आधुनिक युग के बीच अतीत की यादों को ताजा कर दिया।
वेस्पा स्कूटर और राजदूत मोटरसाइकिल ने भी खींचा ध्यान
सिर्फ कारें ही नहीं, बल्कि पुराने दौर के दोपहिया वाहनों ने भी इस रैली में चार चांद लगाए। वाहन प्रेमियों के बीच वर्ष 1960 का वेस्पा 125 स्कूटर और वर्ष 1984 का राजदूत (Rajdoot) मोटरसाइकिल विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। इन वाहनों को सड़क पर चलते देख कई लोगों को अपने पुराने दिनों की यादें ताजा हो गईं।
महोत्सव के आयोजकों ने बताया कि दिन में इस रोमांचक वाहन रैली के सफल आयोजन के बाद, शाम के सत्र में हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र के सभागार में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय और पारंपरिक कला की प्रस्तुतियां हुईं।