उत्तराखंड में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और हितों को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्यभर में अब खुली मिठाइयों और बेकरी उत्पादों की ट्रे व काउंटर पर निर्माण तिथि (मैन्युफैक्चरिंग डेट) और एक्सपायरी या उपयोग की अंतिम तिथि (यूज बाई डेट) प्रदर्शित करना अनिवार्य कर दिया गया है।
त्योहारों और शादी-विवाह के इस सीजन में अक्सर बाजार में मिठाइयों की मांग अचानक बढ़ जाती है, जिसके चलते गुणवत्ता और ताजगी को लेकर ग्राहकों की चिंताएं भी बढ़ जाती हैं। इसी को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग ने यह सख्त निर्देश जारी किए हैं। नियमों का यह नया आदेश सोमवार से प्रभावी हो गया है, जिससे कारोबारियों को अपनी दुकानों में बेचे जाने वाले हर खुले उत्पाद की सही जानकारी डिस्प्ले करनी होगी।
खाद्य सुरक्षा आयुक्त के निर्देश और पारदर्शिता
खाद्य सुरक्षा आयुक्त विनय शंकर पांडेय द्वारा जारी किए गए इन आधिकारिक निर्देशों के अनुसार, दुकानदारों को बिक्री के लिए काउंटर पर सजाकर रखे जाने वाले सभी उत्पादों की दोनों महत्वपूर्ण तिथियां स्पष्ट रूप से बोर्ड या टैग पर लिखनी होंगी। इस व्यवस्था के लागू होने से ग्राहकों को यह जांचने में आसानी होगी कि वे जो मिठाई खरीद रहे हैं, वह कितनी ताज़ा है और उसका सेवन कब तक किया जा सकता है।
विभाग द्वारा समय-समय पर किए जाने वाले निरीक्षणों में यह बात सामने आई थी कि पैकबंद खाद्य पदार्थों की तरह खुली मिठाइयों के मामले में निर्माण और उपयोग की अंतिम तिथि की कोई जानकारी ग्राहकों को नहीं मिल पाती थी। कई बार दुकानदार बासी या पुरानी मिठाइयां भी बेच देते हैं, जिससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का जोखिम रहता है। इस नई व्यवस्था से व्यापारिक पारदर्शिता में सुधार होगा और बासी मिठाइयों की बिक्री पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
निरीक्षण अभियान चलाएगा खाद्य विभाग
नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी विभिन्न जिलों में मिठाई और बेकरी प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण करेंगे। यदि किसी दुकान पर खुली मिठाइयों की ट्रे या काउंटर पर निर्माण और एक्सपायरी तिथि प्रदर्शित नहीं पाई जाती है, तो संबंधित कारोबारियों के खिलाफ ऑन-द-spot कार्रवाई की जा सकती है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले प्रतिष्ठानों को बख्शा नहीं जाएगा।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि मिठाइयों की उपयोग अवधि उनकी निर्माण विधि, उनमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री, कमरे के तापमान और उनके भंडारण के तरीकों पर निर्भर करती है। इसलिए दुकानदारों को अपनी श्रेणी के अनुसार सही समयावधि प्रदर्शित करनी होगी ताकि उपभोक्ताओं को सटीक जानकारी मिल सके।