भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) वाराणसी के वैज्ञानिकों ने एक बार फिर वैश्विक पटल पर देश का नाम रोशन किया है। संस्थान के भौतिकी विभाग के जाने-माने रिसर्चर प्रो. अभिषेक कुमार श्रीवास्तव को अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में एक बेहद प्रतिष्ठित और बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें 'कमेटी ऑन स्पेस रिसर्च' यानी COSPAR (Committee on Space Research) का वैज्ञानिक आयोग-C और E का इंटर-कमीशन लाइजनिंग ऑफिसर नियुक्त किया गया है।
इस महत्वपूर्ण नियुक्ति के बाद प्रो. श्रीवास्तव अब साल 2026 से लेकर 2030 तक, यानी पूरे चार साल की लंबी अवधि के लिए इस जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगे। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत शोध करियर में एक मील का पत्थर है, बल्कि यह भारतीय वैज्ञानिक समुदाय और विशेषकर काशी हिंदू विश्वविद्यालय (IIT-BHU) के लिए भी गर्व का क्षण है।
क्या होगी प्रो. अभिषेक कुमार श्रीवास्तव की नई भूमिका?
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाली इस जिम्मेदारी के तहत प्रो. श्रीवास्तव की भूमिका बेहद अहम और दूरगामी परिणामों वाली होगी। वह COSPAR के अंतर्गत आने वाले विभिन्न वैज्ञानिक आयोगों, विषयगत पैनलों और तमाम सलाहकार निकायों के बीच एक मजबूत कड़ी का काम करेंगे। उनका मुख्य कार्य विभिन्न वैज्ञानिक समूहों के बीच आपसी संवाद को और अधिक बेहतर बनाना और उनके बीच सटीक समन्वय (Coordination) स्थापित करना होगा।
आज के समय में जब अंतरिक्ष विज्ञान बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है, ऐसे में दुनिया भर के वैज्ञानिकों के बीच शोध से जुड़ी सूचनाओं, नए डेटा और वैज्ञानिक निष्कर्षों का आदान-प्रदान सुगम होना बेहद जरूरी है। प्रो. श्रीवास्तव इसी सूचनाओं के आदान-प्रदान को और अधिक पारदर्शी और तेज बनाने की प्रक्रिया में अपनी महत्वपूर्ण विशेषज्ञता का योगदान देंगे।
किन दो महत्वपूर्ण आयोगों के साथ करेंगे काम?
प्रो. अभिषेक कुमार श्रीवास्तव मुख्य रूप से COSPAR के दो प्रमुख और बेहद जटिल वैज्ञानिक आयोगों के साथ मिलकर काम करेंगे:
- वैज्ञानिक आयोग-E (Research in Astrophysics from Space): यह आयोग अंतरिक्ष आधारित अवलोकनों और दूरबीनों के जरिए ब्रह्मांड के रहस्यों को टटोलने का काम करता है। इसमें तारों के बनने की प्रक्रिया, आकाशगंगाओं (Galaxies), गैलेक्टिक एवं एक्स्ट्रागैलेक्टिक एस्ट्रोफिजिक्स, सूर्य से जुड़े अध्ययन (Solar Studies), हेलियोस्फेरिक रिसर्च और दूसरे ग्रहों की दुनिया यानी एक्सोप्लैनेट विज्ञान जैसे बेहद आधुनिक विषय शामिल हैं।
- वैज्ञानिक आयोग-C (Space Studies of the Upper Atmospheres of the Earth and Planets, Including Reference Atmospheres): यह आयोग हमारी अपनी पृथ्वी और हमारे सौर मंडल के अन्य ग्रहों के ऊपरी वायुमंडल के अंतरिक्ष आधारित अध्ययन पर पूरी तरह केंद्रित है। इसके तहत वायुमंडलीय परतों और ग्रहीय प्रक्रियाओं की गहराइयों को समझने के लिए वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाता है।
क्या है COSPAR और इसका महत्व?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि COSPAR (कमेटी ऑन स्पेस रिसर्च) दुनिया भर के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का सबसे प्रतिष्ठित और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठन है। इसकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष अनुसंधान को बढ़ावा देना और दुनिया भर के शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच शोध परिणामों, विचारों और सूचनाओं का खुलकर आदान-प्रदान करना है।
यह संगठन विभिन्न आयोगों और पैनलों के जरिए अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े अनगिनत विषयों पर वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग की रूपरेखा तैयार करता है। जब भारत का कोई वैज्ञानिक इस तरह के वैश्विक संगठन में नेतृत्वकारी भूमिका निभाता है, तो इससे अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में देश की स्थिति और अधिक मजबूत होती है।
IIT-BHU प्रशासन में खुशी की लहर
प्रो. अभिषेक कुमार श्रीवास्तव की इस शानदार उपलब्धि पर पूरे संस्थान में उत्साह का माहौल है। IIT (BHU) के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने इस अंतरराष्ट्रीय नियुक्ति को संस्थान के लिए बेहद गौरव का विषय बताया है। उन्होंने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि वैश्विक वैज्ञानिक शोध में IIT (BHU) की भागीदारी लगातार और तेजी से बढ़ रही है।
निदेशक ने अंतरिक्ष विज्ञान और खगोल भौतिकी जैसे कठिन और भविष्यवादी क्षेत्रों में संस्थान की शोध प्रतिबद्धता और अकादमिक उत्कृष्टता को भी रेखांकित किया। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रो. श्रीवास्तव की इस नियुक्ति से आने वाले समय में अंतरिक्ष विज्ञान, खगोल भौतिकी, ग्रहीय विज्ञान (Planetary Science) और वायुमंडलीय अनुसंधान के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए और बड़े सहयोग विकसित होंगे, जिससे भारत के युवा शोधकर्ताओं को भी काफी कुछ सीखने का अवसर मिलेगा।
भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए क्यों जरूरी है यह समन्वय?
वर्तमान समय में अंतरिक्ष केवल विज्ञान की एक शाखा नहीं रह गया है, बल्कि यह देशों के रणनीतिक और तकनीकी भविष्य की धुरी बन चुका है। भारत जिस प्रकार गगनयान और अंतरिक्ष स्टेशन जैसी अपनी महत्वाकांक्षी योजनाओं पर काम कर रहा है, ऐसे दौर में भारतीय वैज्ञानिकों का वैश्विक निकायों के शीर्ष पदों पर होना देश के लिए एक बड़ा रणनीतिक लाभ साबित होता है।
प्रो. श्रीवास्तव जैसे अनुभवी वैज्ञानिक जब वैश्विक मंचों पर समन्वय की कमान संभालते हैं, तो इससे अंतरिक्ष से जुड़े अंतरराष्ट्रीय डेटा साझा करने के समझौतों और संयुक्त अंतरिक्ष अभियानों में भारत की आवाज और अधिक मजबूत होती है। साल 2030 तक का यह चार साल का कार्यकाल अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में कई नए आयाम स्थापित कर सकता है, जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी रहेंगी।