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वाराणसी में दर्दनाक हादसा: बारिश के बीच कच्ची दीवार गिरने से युवा शिक्षक की मौत

वाराणसी में दर्दनाक हादसा: बारिश के बीच कच्ची दीवार गिरने से युवा शिक्षक की मौत

कुदरत का कहर कई बार इंसानी जिंदगियों पर इस तरह टूट पड़ता है कि परिवार बिखर कर रह जाते हैं। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले से एक ऐसी ही दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। मिर्जामुराद थाना क्षेत्र के राने गांव में मानसूनी बारिश के बीच एक कच्ची दीवार काल बनकर बरसी। इस दर्दनाक हादसे में महज 27 साल के एक युवा की जान चली गई, जो न सिर्फ खुद पढ़ रहा था बल्कि अपने परिवार का सहारा बनने के लिए छोटे बच्चों को कोचिंग भी पढ़ाता था और सेंट्रिंग का काम भी करता था।

मंगलवार देर रात हुआ दर्दनाक हादसा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना मंगलवार देर रात की है। वाराणसी और आसपास के इलाकों में पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश का दौर जारी है। बारिश के कारण कच्चे मकानों और दीवारों की नींव कमजोर हो चुकी है। राने गांव निवासी शिवपूजन भारती के घर के पास पशुशाला की एक कच्ची मिट्टी की दीवार पहले से ही नमी की चपेट में थी। मंगलवार की रात जब तेज बारिश हो रही थी, तब शिवपूजन का 27 वर्षीय बेटा जिलाजीत भारती किसी काम से घर के पीछे की तरफ गया हुआ था।

अंधेरे और तेज बारिश के बीच अचानक वह कच्ची दीवार भरभराकर जिलाजीत के ऊपर आ गिरी। दीवार इतनी कच्ची और मिट्टी भारी थी कि युवक संभलने का मौका तक नहीं पा सका और मलबे के नीचे पूरी तरह दब गया। हादसे की आहट और मलबे के गिरने की आवाज सुनते ही घर के भीतर मौजूद उसकी मां की चीख निकल पड़ी। मां की चीख-पुकार सुनकर जिलाजीत के दोनों भाई तुरंत मौके की तरफ दौड़े और बिना एक पल गंवाए राहत एवं बचाव कार्य में जुट गए।123

एक घंटे की मशक्कत के बाद निकाला गया बाहर

अंधेरी रात और भारी बारिश के बीच भाइयों ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने तुरंत फावड़ा उठाया और मलबे को हटाना शुरू किया। यह एक ऐसा संघर्ष था जिसमें हर गुजरता सेकंड भारी पड़ रहा था। करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत और संघर्ष के बाद परिजनों ने किसी तरह मलबे को हटाकर जिलाजीत को बाहर निकाला। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

हादसे में जिलाजीत के सिर पर बेहद गंभीर चोटें आई थीं, जिससे वह अचेत हो चुका था। परिजन बिना पुलिस का इंतजार किए उसे तुरंत नजदीकी निजी अस्पताल लेकर भागे। डॉक्टरों ने उसके शरीर की जांच की और फिर उसे मृत घोषित कर दिया। युवा बेटे की सांसें थमने की खबर सुनते ही अस्पताल और घर में कोहराम मच गया।

परिवार का इकलौता संबल और उम्मीद टूटा

जिलाजीत भारती अपने तीन भाइयों और एक बहन में दूसरे नंबर पर था। वह अपने घर की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहा था। पढ़ाई के साथ-साथ वह बच्चों को कोचिंग भी पढ़ाता था और इसके अलावा सेंट्रिंग का काम करके अपने पिता का हाथ बंटाता था। उसके पिता मजदूरी कर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण करते हैं।

घर की तंगहाली के बीच जिलाजीत परिवार की सबसे बड़ी उम्मीद था। लेकिन इस एक हादसे ने उस उम्मीद को हमेशा के लिए बुझा दिया। बेटे की अचानक हुई इस मौत से उसकी मां और बहन का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव के लोगों का कहना है कि जिलाजीत बेहद मिलनसार और मेहनती लड़का था, जिसकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। उसकी मौत से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।

रात का समय होने के कारण नहीं दी गई पुलिस सूचना

घटना चूंकि देर रात हुई और परिवार पूरी तरह से सदमे में था, इसलिए उन्होंने तुरंत पुलिस को इस दुर्घटना की सूचना नहीं दी। सदमे और गमगीन माहौल के बीच परिजनों ने सुबह होने पर पारंपरिक रूप से शव का अंतिम संस्कार कर दिया। हालांकि, इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में प्रशासनिक और सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बारिश के दिनों में कच्चे निर्माणों का बढ़ता खतरा

इस हृदयविदारक घटना के बाद राने गांव और आसपास के ग्रामीण इलाकों में हड़कंप मच गया है। लोगों के मन में अब यह डर बैठ गया है कि लगातार हो रही बारिश के चलते और भी कई कच्चे मकान या पुरानी जर्जर दीवारें कभी भी गिर सकती हैं।

  • ग्रामीणों और जानकारों का कहना है कि मानसून के मौसम में इस तरह के हादसे अक्सर सामने आते हैं, जिन पर समय रहते ध्यान देना जरूरी है:
  • कच्ची मिट्टी की दीवारों में नमी आने से उनकी मजबूती खत्म हो जाती है।
  • लगातार बारिश के दौरान पुराने और जर्जर मकानों के पास जाने से बचना चाहिए।
  • प्रशासन को ऐसे मौसम में कमजोर मकानों में रहने वाले लोगों के लिए उचित दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए।

जिलाजीत की मौत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि प्राकृतिक आपदाएं और सुरक्षा में थोड़ी सी भी अनदेखी कितनी भारी पड़ सकती है। वाराणसी की इस घटना ने एक हंसते-खेल्ते परिवार को हमेशा के लिए गहरे जख्म दे दिए हैं। प्रशासन और आम जनता दोनों के लिए यह एक चेतावनी है कि बारिश के मौसम में जर्जर और कच्चे निर्माणों को लेकर पूरी सतर्कता बरती जाए ताकि किसी अन्य परिवार को इस तरह का दर्द न झेलना पड़े।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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