स्मार्टफोन की बैटरी और परफॉर्मेंस को बेहतर बनाने के लिए कुछ गुप्त सेटिंग्स को बदलना बेहद जरूरी है। आमतौर पर नए फोन की बैटरी लंबे समय तक चलती है, लेकिन कुछ महीनों बाद बैकग्राउंड में चलने वाली अनचाही प्रक्रियाओं के कारण बैटरी तेजी से खत्म होने लगती है।
फोन की सेटिंग्स में कई ऐसे विकल्प छिपे होते हैं जो लगातार डेटा और ऊर्जा की खपत करते हैं। इन सेटिंग्स को प्रबंधित करके फोन के प्रदर्शन को सुधारा जा सकता है। आइए जानते हैं उन महत्वपूर्ण बदलावों के बारे में जिन्हें अपनाकर फोन की कार्यक्षमता बढ़ाई जा सकती है।
वाई-फाई और ब्लूटूथ स्कैनिंग बंद करें
फोन की लोकेशन सेटिंग्स के भीतर वाई-फाई और ब्लूटूथ स्कैनिंग के विकल्प सक्रिय रहते हैं। भले ही मुख्य वाई-फाई या ब्लूटूथ टॉगल बंद हो, यह फीचर लगातार नजदीकी सिग्नलों की खोज करता रहता है। इसे बंद करने से ऊर्जा की खपत में कमी आती है और बैटरी लाइफ बेहतर होती है।
डेवलपर ऑप्शंस में एनिमेशन स्केल बदलें
फोन के अबाउट फोन विकल्प में जाकर बिल्ड नंबर पर लगातार सात बार टैप करने से डेवलपर विकल्प खुल जाते हैं। इसमें विंडो एनिमेशन स्केल, ट्रांजिशन एनिमेशन स्केल और एनिमेटर ड्यूरेशन स्केल को 0.5x करने पर ऐप्स खुलने और बंद होने की गति तेज महसूस होती है। इस प्रक्रिया से फोन का यूजर इंटरफेस अधिक संवेदनशील बनता है।
डेटा उपयोग और डायग्नोस्टिक्स को अक्षम करें
गूगल सेटिंग्स के अंतर्गत उपयोग और डायग्नोस्टिक्स का विकल्प होता है, जो फोन के इस्तेमाल से जुड़ा डेटा निरंतर भेजता रहता है। इसे बंद करने से न केवल मोबाइल डेटा की बचत होती है, बल्कि बैकग्राउंड में होने वाली अतिरिक्त प्रोसेसिंग भी रुकती है।
बैकग्राउंड डेटा और ऐप अनुमतियों पर नियंत्रण
कई सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स पृष्ठभूमि में लगातार सामग्री लोड करते रहते हैं। ऐप सेटिंग्स में जाकर बैकग्राउंड डेटा उपयोग को सीमित करने से यह समस्या हल होती है। इससे रैम और बैटरी दोनों पर पड़ने वाला दबाव कम होता है।
क्विक शेयर और नियरबाय शेयर की विजिबिलिटी सीमित करें
क्विक शेयर या नियरबाय शेयर को हमेशा चालू रखने के बजाय आवश्यकतानुसार ही सक्रिय रखना चाहिए। इसे 'कॉन्टेक्ट्स ओनली' या सीमित समय के लिए दृश्यमान रखने से फोन अनावश्यक रूप से सिग्नल प्रसारित नहीं करता है, जिससे ऊर्जा की बचत होती है।
बैटरी रखरखाव से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव
लिथियम-आयन बैटरी की उम्र बढ़ाने के लिए 20-80 नियम का पालन करना फायदेमंद माना जाता है। बैटरी को पूरी तरह शून्य होने से बचाने और 85 प्रतिशत के आसपास चार्जिंग रोकने से बैटरी की दीर्घकालिक सेहत सुरक्षित रहती है। इसके अलावा डेवलपर विकल्प बदलने से फोन की वारंटी पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है।