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ड्रैगन की दोहरी चाल? हूती विद्रोहियों की लगाम खींचने के लिए चीन ने ईरान पर बनाया भारी दबाव

ड्रैगन की दोहरी चाल? हूती विद्रोहियों की लगाम खींचने के लिए चीन ने ईरान पर बनाया भारी दबाव

वैश्विक कूटनीति में बड़ा फेरबदल: बीजिंग से तेहरान तक पहुंची बात

मध्य पूर्व की भू-राजनीति में इन दिनों कूटनीतिक हलचल अपने चरम पर है। वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के सबसे अहम मार्गों में शुमार लाल सागर में पिछले कुछ समय से जारी भारी तनाव के बीच एक नया और हैरान करने वाला कूटनीतिक मोड़ सामने आया है। दुनिया की महाशक्ति के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटे चीन ने अब सीधे तौर पर ईरान पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। बीजिंग ने तेहरान से साफ शब्दों में कहा है कि वह यमन के हूती विद्रोहियों की आक्रामक गतिविधियों पर लगाम कसे।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब खाड़ी देशों और विशेष रूप से सऊदी अरब की ओर से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार यह दबाव बनाया जा रहा था कि इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाली के लिए क्षेत्रीय ताकतों को अपनी भूमिका निभानी होगी। सऊदी अरब की इस अपील के बाद अब बीजिंग का इस मामले में सक्रिय होना वैश्विक राजनीति के समीकरणों को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है।

सऊदी अरब की गुहार और चीन का रणनीतिक हस्तक्षेप

लाल सागर और अदन की खाड़ी में लगातार हो रहे हमलों ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों और वैश्विक अर्थव्यवस्था की नींद उड़ा रखी है। इन हमलों के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे एशिया से लेकर यूरोप तक माल ढुलाई की लागत और समय में भारी इजाफा हुआ है। इस स्थिति से सबसे ज्यादा चिंता खाड़ी देशों की बढ़ी है, जो अपने आर्थिक विजन और विकास योजनाओं को पटरी पर बनाए रखना चाहते हैं।

सूत्रों के अनुसार, सऊदी अरब के शीर्ष राजनयिकों ने हाल ही में बीजिंग के साथ उच्च स्तरीय बैठकों में इस बात पर जोर दिया था कि पश्चिम एशिया में स्थिरता लाने के लिए ईरान पर उसका प्रभाव बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। चीन, जो इस क्षेत्र में अपने आर्थिक हितों और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क रहता है, उसने सऊदी पक्ष की इस चिंता को गंभीरता से लिया है। यही वजह है कि अब चीनी अधिकारियों ने तेहरान के समकक्षों के सामने इस मुद्दे को कड़ाई से उठाया है।

ईरान के लिए खड़ी हुई दुविधा

ईरान के लिए यह कूटनीतिक दबाव एक बड़ी और पेचीदा दुविधा लेकर आया है। एक तरफ तेहरान तथाकथित 'धुरी के प्रतिरोध' (Axis of Resistance) का नेतृत्व करने का दावा करता है, जिसमें यमन के हूती विद्रोही भी शामिल माने जाते हैं, तो दूसरी तरफ चीन के साथ उसके गहरे रणनीतिक और आर्थिक संबंध हैं। ईरान अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए काफी हद तक चीनी तेल आयात और व्यापारिक समझौतों पर निर्भर है।

  • आर्थिक निर्भरता: चीन, ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, जो अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद तेहरान की अर्थव्यवस्था को जीवनदान दे रहा है।
  • कूटनीतिक संतुलन: बीजिंग के साथ हाल के वर्षों में ईरान ने 25 साल के रणनीतिक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे चीन की बात को सिरे से खारिज करना ईरान के लिए आसान नहीं होगा।
  • क्षेत्रीय प्रभाव: हूती विद्रोहियों पर तेहरान का वैचारिक और सैन्य प्रभाव जगजाहिर है, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ने पर ईरान को अपनी रणनीति बदलने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

लाल सागर में सुरक्षा और वैश्विक व्यापार का भविष्य

लाल सागर से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों पर हूती हमलों ने अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों को भी सैन्य कार्रवाई के लिए प्रेरित किया है। हालांकि, पश्चिमी देशों के सैन्य अभियानों के बावजूद इस समस्या का कोई स्थाई समाधान अभी तक नहीं निकल पाया है। ऐसे में, यदि चीन कूटनीतिक माध्यमों से इस संकट को हल करने में थोड़ी भी सफलता हासिल करता है, तो वैश्विक मंच पर बीजिंग की मध्यस्थता की छवि को और मजबूती मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन नहीं चाहता कि पश्चिम एशिया में कोई भी बड़ा संघर्ष उसकी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं या ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डाले। मध्य पूर्व से आने वाला कच्चा तेल चीन की अर्थव्यवस्था के लिए जीवन रेखा है, और इस आपूर्ति में किसी भी प्रकार की बाधा बीजिंग को बिल्कुल मंजूर नहीं है।

आगे की राह: कूटनीति बनाम कड़े तेवर

आने वाले हफ्तों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या तेहरान अपने करीबी साझीदार चीन की बात मानते हुए हूती विद्रोहियों को शांत करने के लिए कोई ठोस कदम उठाता है या नहीं। यदि ईरान इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल करता है, तो लाल सागर के अशांत जल में शांति लौटने की उम्मीद बंध सकती है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए एक बहुत बड़ी राहत की खबर होगी। बहरहाल, इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि मध्य पूर्व की सियासत में पर्दे के पीछे से खेल बदलने की ताकत रखने वाले खिलाड़ियों में चीन अब एक प्रमुख केंद्र बिंदु बन चुका है।

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ममता पाठक

ममता पाठक

Chief Editor

ममता पाठक न्यूज़रूम की संपादकीय दिशा तय करने वाली प्रमुख स्तंभ हैं। अंतरराष्ट्रीय खबरों की गहरी समझ और वर्षों के अनुभव के साथ, वे कंटेंट की गुणवत्त...

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