आसमान में उड़ रहे एक कमर्शियल विमान के भीतर जब मौत का साया मंडराने लगे और कॉकपिट के अंदर ही खूनी संघर्ष छिड़ जाए, तो यात्रियों की रूह कांपना लाजिमी है। कुछ ऐसा ही खौफनाक मंजर हाल ही में फ्लाइदुबई की फ्लाइट संख्या FZ1073 में देखने को मिला, जब दुबई से तेल अवीव के लिए उड़ान भरने वाली इस बोइंग 737 मैक्स 8 उड़ान को हवा में ही हाईजैक करने की एक नाकाम लेकिन बेहद खतरनाक कोशिश की गई। इस घटना ने केवल विमानन सुरक्षा पर ही गंभीर सवाल खड़े नहीं किए हैं, बल्कि खुफिया एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
दुबई से तेल अवीव की सामान्य उड़ान कैसे बनी खौफ का साया
बुधवार का दिन विमानन इतिहास के सबसे डरावने पलों में से एक साबित हो सकता था। विमान में कुल 182 लोग सवार थे और ज्यादातर यात्री इजरायली नागरिक थे। उड़ान भरने के बाद शुरुआती दो घंटे तक सब कुछ बिल्कुल सामान्य था। विमान करीब 34,000 फीट की ऊंचाई पर क्रूज़िंग मोड में था। किसी को इस बात का आभास भी नहीं था कि कॉकपिट के भीतर क्या पक रहा है। अचानक, फ्लाइट डेटा ने कुछ ऐसा दिखाया जिसने एविएशन वर्ल्ड को हिलाकर रख दिया। महज कुछ ही मिनटों में विमान की ऊंचाई तेजी से नीचे गिरने लगी।
आंकड़ों के मुताबिक, विमान ने महज़ 90 सेकंड के भीतर अपनी आधी से ज्यादा क्रूज़िंग ऊंचाई खो दी। विमान एक भयानक गोता (plunge) लगा रहा था। कॉकपिट के अंदर ओमान के को-पायलट ने कथित तौर पर विमान के आपातकालीन क्रैश एक्स (कुल्हाड़ी) से भारतीय कैप्टन स्मित मच्छड़ पर जानलेवा हमला कर दिया था। कैप्टन गंभीर रूप से घायल हो गए और खून से लथपथ होकर फर्श पर गिर गए। हमलावर को-पायलट ने विमान पर नियंत्रण करने की कोशिश की, जिससे विमान बेकाबू होकर तेजी से नीचे गोता लगाने लगा।
कैप्टन की बहादुरी और यात्रियों का अदम्य साहस
गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, भारतीय कैप्टन स्मित मच्छड़ ने हार नहीं मानी। बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत में उन्होंने साझा किया कि वह फर्श पर थे और विमान को नीचे गिरते हुए महसूस कर सकते थे। उन्हें पता था कि यह कुछ करने का आखिरी मौका है। दर्द से कराहते हुए कैप्टन किसी तरह कॉकपिट के दरवाजे तक पहुंचे और उसे खोल दिया।
दरवाजा खुलते ही केबिन में भगदड़ मच गई। यात्रियों और क्रू सदस्यों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए तुरंत मोर्चा संभाला। चीख-पुकार के बीच यात्रियों ने हमलावर को-पायलट को दबोच लिया और उसे कसकर काबू में कर लिया। विमान में मौजूद एक इजरायली दंत चिकित्सक, डॉ. शोता मुसायेव, तुरंत घायलों की मदद के लिए आगे आए। इस बीच, विमान में मौजूद दो अन्य ऑफ-ड्यूटी फ्लाइदुबई पायलटों ने तुरंत कमान संभाली और विमान को करीब 15,000 फीट की सुरक्षित ऊंचाई पर स्थिर किया। विमान के ट्रांसपोंडर को तुरंत '7500' कोड पर सेट किया गया, जो कि अनधिकृत हस्तक्षेप यानी हाईजैकिंग का संकेत देता है। इसके बाद विमान को सुरक्षित रूप से सऊदी अरब के ताबुक में लैंड कराया गया।
खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा चूक पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर ओमान के उस को-पायलट को कॉकपिट में घुसने की अनुमति कैसे मिली, जिसके बारे में पहले से ही विवादित रिपोर्ट्स थीं? इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फ्लाइट के टेकऑफ होने से पहले ही इजरायली अधिकारियों (जिनमें परिवहन मंत्रालय और मोसाद शामिल हैं) के पास सभी क्रू और यात्रियों की सूची पहुंच चुकी थी। इसके बावजूद, ओमान के को-पायलट हम्मम अल-हम्गामी को फ्लैग नहीं किया गया।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ओमान के अधिकारियों ने कथित तौर पर चरमपंथी विचारों के चलते उसे अपने देश में उड़ान भरने से प्रतिबंधित कर दिया था। हालांकि यह अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि उसके विचार किस प्रकार के थे या क्या ओमान ने इस बारे में किसी अन्य देश या एयरलाइन को सचेत किया था या नहीं। कैलिफोर्निया स्थित एक लिंक्डइन प्रोफाइल और अन्य स्रोतों से पता चलता है कि उसने ओमान एयर और रॉयल एयर المغرب जैसी एयरलाइंस के साथ काम किया था। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अधिकारियों ने इस पूरी घटना को एक 'आतंकवादी कृत्य' करार दिया है।
जांच का दायरा और वैश्विक चिंताएं
चूंकि विमान यूएई में पंजीकृत है और उसके ध्वज के तहत उड़ता है, इसलिए इस मामले की मुख्य जांच यूएई के अटॉर्नी जनरल हमद सैफ अल-शम्सी के नेतृत्व में की जा रही है। जांच एजेंसियां इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही हैं कि क्या हमलावर ने 'लोन वुल्फ' के रूप में अकेले इस हमले को अंजाम दिया या फिर उसके पीछे किसी बड़े आतंकी संगठन का हाथ था। यूएई के राष्ट्रपति सलाहकार अनवर गर्गश ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया है कि यह घटना इस बात का प्रमाण है कि क्षेत्र में उग्रवाद और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है।
इस सनसनीखेज घटना ने मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक समीकरणों और विमानन सुरक्षा के कड़े सुरक्षा मानकों पर एक बार फिर से विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। जहाँ एक तरफ घायल कैप्टन स्मित मच्छड़ की सूझबूझ और यात्रियों की बहादुरी ने एक बड़े विमान हादसे को टाल दिया, वहीं दूसरी तरफ एयरलाइंस की हायरिंग और क्रॉस-बॉर्डर सिक्योरिटी चेकिंग पर अब कड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।