Breaking
► UN फोरम में गूंजा नासिक: 2030 तक हरित शहर और सिंहस्थ का खाका ► सुलतानपुर में किसानों के किराये पर दिए ट्रैक्टर और ट्रॉली बेचे जाने का आरोप, मुकदमा दर्ज ► IND-W vs ZIM-W T20: भारत ने जिम्बाब्वे को 4 विकेट से हराया, मंधाना की कप्तानी में विजयी शुरुआत ► दिल्ली के जंतर-मंतर प्रदर्शन पर बने वीडियो गेम सोशल मीडिया पर वायरल ► काशी का अनोखा दुर्गा पंडाल: 259 साल से बिना विसर्जन विराजमान हैं मां ► अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की प्रेस सचिव केटी जकारिया 5 दिन में पद से हटीं ► अंकिता भंडारी के माता-पिता ने की सीबीआई अधिकारियों से मुलाकात, वीआईपी की संलिप्तता की जांच की मांग ► पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर में मुकेश कुमार शर्मा ने चलाया जनसंपर्क अभियान ► कल्याण में दो नाबालिग बच्चियों के साथ यौन अपराध, पुलिस ने दोनों आरोपियों को दबोचा ► बिहार में दुर्गा पूजा सप्तमी पर खिलेगी धूप, उमस भरी गर्मी से रहना होगा सतर्क ► UN फोरम में गूंजा नासिक: 2030 तक हरित शहर और सिंहस्थ का खाका ► सुलतानपुर में किसानों के किराये पर दिए ट्रैक्टर और ट्रॉली बेचे जाने का आरोप, मुकदमा दर्ज ► IND-W vs ZIM-W T20: भारत ने जिम्बाब्वे को 4 विकेट से हराया, मंधाना की कप्तानी में विजयी शुरुआत ► दिल्ली के जंतर-मंतर प्रदर्शन पर बने वीडियो गेम सोशल मीडिया पर वायरल ► काशी का अनोखा दुर्गा पंडाल: 259 साल से बिना विसर्जन विराजमान हैं मां ► अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की प्रेस सचिव केटी जकारिया 5 दिन में पद से हटीं ► अंकिता भंडारी के माता-पिता ने की सीबीआई अधिकारियों से मुलाकात, वीआईपी की संलिप्तता की जांच की मांग ► पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर में मुकेश कुमार शर्मा ने चलाया जनसंपर्क अभियान ► कल्याण में दो नाबालिग बच्चियों के साथ यौन अपराध, पुलिस ने दोनों आरोपियों को दबोचा ► बिहार में दुर्गा पूजा सप्तमी पर खिलेगी धूप, उमस भरी गर्मी से रहना होगा सतर्क

ट्रंप की चेतावनी पर ईरान का पलटवार, अमेरिकी नीति को बताया रणनीतिक विफलता

ट्रंप की चेतावनी पर ईरान का पलटवार, अमेरिकी नीति को बताया रणनीतिक विफलता

वैश्विक कूटनीति के पटल पर एक बार फिर तनाव के काले बादल मंडराने लगे हैं। वाशिंगटन और तेहरान के बीच जुबानी जंग ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सरगर्मी तेज कर दी है। अमेरिकी नेतृत्व की तरफ से मिल रही चेतावनियों के बीच अब ईरान की तरफ से तीखा और रणनीतिक पलटवार सामने आया है। ईरानी हुक्मरानों का कहना है कि इस तरह की धमकियां किसी ताकत का प्रदर्शन नहीं, बल्कि सीधे तौर पर अमेरिकी विदेश नीति के एक बड़े गतिरोध और रणनीतिक नाकामी को उजागर करती हैं।

कड़े शब्दों में तेहरान का जवाब

हाल ही में जब अमेरिका की तरफ से आक्रामक बयानों का दौर शुरू हुआ, तो ईरान ने भी बिना देर किए इसका मुंहतोड़ जवाब दिया। तेहरान के शीर्ष राजनीतिक हलकों से साफ कर दिया गया है कि बाहरी दबाव और धमकियों की भाषा अब पुरानी पड़ चुकी है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन के पास मध्य पूर्व को लेकर कोई ठोस कूटनीति नहीं बची है, और यही वजह है कि वे बार-बार बयानबाजी का सहारा ले रहे हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयानों से क्षेत्रीय स्थिरता को भारी नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि, तेहरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे किसी भी संभावित आक्रामकता का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन वे कूटनीतिक संवाद के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं करना चाहते।

रणनीतिक डेड एंड पर अमेरिका?

ईरान के वरिष्ठ राजनयिकों और सैन्य विश्लेषकों का तर्क है कि वाशिंगटन की नीतियां अपने ही बुने हुए जाल में फंस चुकी हैं। कड़े प्रतिबंधों और सैन्य धमकियों के बावजूद ईरान के रुख में कोई नरमी नहीं आई है, जिसे तेहरान अपनी जीत के रूप में देख रहा है।

  • प्रतिबंधों का बेअसर होना: सालों के कड़े आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद ईरानी अर्थव्यवस्था ने खुद को वैकल्पिक रास्तों के जरिए संभाल लिया है।
  • क्षेत्रीय प्रभाव: मध्य पूर्व में ईरान के सहयोगी गुटों और उसकी भू-राजनीतिक स्थिति ने अमेरिका और उसके सहयोगियों की नींद उड़ा रखी है।
  • कूटनीतिक विकल्प सीमित: जानकारों का मानना है कि सैन्य विकल्प के खौफ और बातचीत की मेज पर असफलता के कारण अमेरिका आज एक रणनीतिक चौराहे पर खड़ा है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएं

इस ताजा बयानबाजी के बाद दुनिया भर के कूटनीतिक गलियारों में चिंता की लहर दौड़ गई है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य प्रमुख देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। मध्य पूर्व का यह क्षेत्र पहले से ही कई मोर्चों पर अशांति का सामना कर रहा है, ऐसे में यदि वाशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव किसी सैन्य संघर्ष में बदलता है, तो इसके वैश्विक स्तर पर भयंकर परिणाम हो सकते हैं।

विशेषकर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर इसका सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। एशियाई और यूरोपीय बाजार इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।

आगे क्या हो सकता है?

मौजूदा हालात यह संकेत देते हैं कि आने वाले दिनों में कूटनीतिक स्तर पर खींचतान और बढ़ सकती है। अमेरिका में आगामी राजनीतिक सरगर्मी और ईरान के भीतर की घरेलू परिस्थितियों को देखते हुए दोनों देश अपनी-अपनी रणनीतियों को धार दे रहे हैं।

क्या यह सिर्फ शब्दों की जंग बनकर रह जाएगी या फिर इसके परिणाम धरातल पर नजर आएंगे? यह आने वाला वक्त ही तय करेगा, लेकिन फिलहाल इतना तय है कि मध्य पूर्व की सियासत एक बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रही है।

About the Author

ममता पाठक

ममता पाठक

Chief Editor

ममता पाठक न्यूज़रूम की संपादकीय दिशा तय करने वाली प्रमुख स्तंभ हैं। अंतरराष्ट्रीय खबरों की गहरी समझ और वर्षों के अनुभव के साथ, वे कंटेंट की गुणवत्त...

Read More

अगली खबर पढ़ें:

आगे पढ़ें →