यरुशलम। इजरायली संसदीय चुनाव में अधिकांश मतों की गिनती पूरी होने के बाद देश में त्रिशंकु संसद के स्पष्ट आसार बनते नजर आ रहे हैं। 120 सीटों वाली संसद ‘नीसेट’ में सरकार गठन के लिए आवश्यक 61 सीटों का जादुई आंकड़ा किसी भी राजनीतिक गठबंधन को मिलता नहीं दिख रहा है। तमाम पूर्वानुमानों को दरकिनार करते हुए प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी 26 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है, लेकिन उनके नेतृत्व वाले दक्षिणपंथी दलों के गठबंधन को अब तक केवल 53 सीटें ही हासिल हुई हैं।
प्रमुख दलों की स्थिति और सीटों का गणित
चुनाव परिणामों के शुरुआती रुझानों के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के मुख्य प्रतिद्वंद्वी गादी आइसेनकोट की ‘याशर पार्टी’ के नेतृत्व वाले गठबंधन को 48 सीटों पर संतोष करना पड़ा है। वहीं, इस चुनाव में सबसे बड़ा उलटफेर अरब पार्टियों का रहा है, जिन्होंने अप्रत्याशित प्रदर्शन करते हुए 19 सीटों पर कब्जा जमाया है। अरब मतदाताओं के बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों पर पहुंचने के कारण इन पार्टियों की स्थिति मजबूत हुई है और वे संभावित किंगमेकर के रूप में उभरकर सामने आई हैं।
लिकुड पार्टी द्वारा धांधली के आरोप और जांच की मांग
अरब बहुل क्षेत्रों में मतदान के दौरान भारी भीड़ उमड़ने और उनके शानदार प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री नेतन्याहू की पार्टी लिकुड ने इन दलों पर चुनाव में मतों की चोरी और धोखाधड़ी का गंभीर आरोप लगाया है। लिकुड पार्टी ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। दूसरी ओर, नेतन्याहू के धुर विरोधी गादी आइसेनकोट ने अरब पार्टियों के साथ मुद्दा आधारित सहयोग के लिए बातचीत करने के संकेत दिए हैं, जिससे इजरायल का राजनीतिक समीकरण और अधिक पेचीदा हो गया है.
राष्ट्रपति की अपील और कार्यवाहक सरकार के संकेत
संसद में किसी भी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत न मिलने की स्थिति से निपटने के लिए इजरायल के राष्ट्रपति आइजक हरजोग ने सभी राजनीतिक दलों से नए और व्यावहारिक गठबंधन की संभावनाएं तलाशने का आग्रह किया है। हालांकि, देश की मौजूदा राजनीतिक सरगर्मी और दलों के कड़े रुख को देखते हुए किसी भी दल द्वारा अपना पुराना गठबंधन छोड़कर नए समीकरण में शामिल होने की संभावना बेहद क्षीण नजर आ रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसी स्थिति में बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व में ही कार्यवाहक सरकार को कामकाज संभालना पड़ सकता है।
सैन्य फैसले और सुरक्षा बलों पर राजनीतिक दबाव की आशंका
कार्यवाहक सरकार के लंबे समय तक बने रहने की संभावनाओं के बीच विपक्षी नेता गादी आइसेनकोट ने सुरक्षा बलों के प्रमुखों को आगाह किया है कि वे किसी भी प्रकार के राजनीतिक दबाव से पूरी तरह दूर रहें। विश्लेषकों का यह भी मानना है कि कार्यवाहक सरकार होने की स्थिति में प्रधानमंत्री नेतन्याहू को आगामी सैन्य अभियानों और रणनीतिक फैसलों को अमलीजामा पहनाने में प्रशासनिक और कानूनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
शेयर बाजार पर असर और ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख
देश में छाए राजनीतिक अनिश्चितता के बादलों का असर अर्थव्यवस्था पर भी तुरंत दिखाई देने लगा है। बुधवार को तेल अवीव का शेयर बाजार करीब तीन प्रतिशत तक लुढ़क गया, जबकि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इजरायली मुद्रा शेकल में भी कमजोरी दर्ज की गई। इसके बावजूद, मतगणना के रुझान सामने आने के बाद नेतन्याहू ने लिकुड पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और वफादारों के साथ एक अहम बैठक की, जिसमें उन्होंने एक मजबूत दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सरकार के गठन का पुरजोर आह्वान किया।
बैठक के दौरान नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि इजरायल का सैन्य अभियान पूरी ताकत से जारी रहेगा। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ निर्णायक सैन्य कार्रवाई करने की अपनी मंशा भी खुलकर जाहिर की। राष्ट्रपति ट्रंप को इजरायल का सच्चा मित्र बताते हुए नेतन्याहू ने कहा कि देश के पास ईरान के खतरे को हमेशा के लिए समाप्त करने का एक ऐतिहासिक अवसर आया है, जिसका पूरा लाभ उठाया जाना चाहिए।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का जताया आभार
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चुनाव के दौरान दी गई मदद और इजरायली मतदाताओं से उनके पक्ष में मतदान करने की सार्वजनिक अपील के लिए उनका विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ट्रंप के समर्थन से उन्हें चुनाव लड़ने और आगे की रणनीतियों को तय करने में काफी सहायता मिली है। उल्लेखनीय है कि चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में ट्रंप ने इजरायली नागरिकों से अपील की थी कि वे नेतन्याहू को सत्ता में वापस लाएं ताकि दोनों देश मिलकर ईरान की चुनौती से पूरी तरह निपट सकें।