उत्तर प्रदेश के बहराइच की पारंपरिक चमचम मिठाई अपनी अनूठी बनावट और शाही स्वाद के लिए जानी जाती है, जो बंगाल के प्रसिद्ध रसगुल्लों और संदेश को कड़ी टक्कर देती है।
भारत में जब भी रसीली और पारंपरिक मिठाइयों की बात होती है, तो पश्चिम बंगाल के रसगुल्ले और संदेश का नाम सबसे पहले लिया जाता है। हालांकि, उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले की गलियों में तैयार होने वाली चमचम ने अपनी खास पहचान बनाई है। स्वाद और बनावट के मामले में यह बंगाली मिठाइयों से कम नहीं आंकी जाती है।
बहराइच की चमचम और बंगाली मिठाइयों में अंतर
बंगाल का रसगुल्ला अपने अत्यधिक स्पंजी और मुलायम स्वरूप के लिए प्रसिद्ध है, वहीं बहराइच की चमचम की बाहरी परत हल्की कड़क होती है जबकि अंदर का हिस्सा चाशनी से पूरी तरह लबालब भरा रहता है। संदेश की तरह इस मिठाई में भी दूध की सोंधी मिठास मिलती है, लेकिन इसके बीच में भरी जाने वाली मावा यानी खोया और मेवों की स्टफिंग इसे एक शाही और समृद्ध स्वाद प्रदान करती है।
घर पर कैसे तैयार करें बहराइच स्टाइल चमचम
पारंपरिक स्वाद को घर पर पाने के लिए गुणवत्तापूर्ण दूध, चीनी, मावा और सूखे मेवों की आवश्यकता होती है। छेना तैयार कर उसे मनचाहा आकार देकर चाशनी में पकाया जाता है। पकने के बाद इसे ठंडा कर बीच से चीरा लगाकर मावा और ड्राई फ्रूट्स भरा जाता है, जिससे यह बहराइच की मशहूर मिठाई का रूप ले लेती है।