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SCO Summit 2026: जिनपिंग से मिले पीएम मोदी, देखते रह गए शहबाज

SCO Summit 2026: जिनपिंग से मिले पीएम मोदी, देखते रह गए शहबाज

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की दुनिया में कब कौन सा समीकरण बदल जाए, इसका अंदाजा लगाना कई बार बड़े-बड़े राजनीतिक विश्लेषकों के लिए भी मुश्किल हो जाता है। बिश्केक की जमीन पर इन दिनों कुछ ऐसा ही कूटनीतिक नजारा देखने को मिला है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। मौका था 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन का, जहां भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक गर्मजोशी भरी मुलाकात ने कूटनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है, तो वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की बेबसी भी खुलकर दुनिया के सामने आ गई।

बिश्केक में सजा कूटनीति का मंच

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित 26वें SCO शिखर सम्मेलन का माहौल बेहद खास रहा। क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और आपसी संबंधों को बढ़ावा देने के लिए यूरेशियाई देशों के तमाम दिग्गज नेता इस ऐतिहासिक मंच पर एकत्र हुए हैं। सम्मेलन के पहले दिन से ही कूटनीतिक सरगर्मियां तेज थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब आयोजन स्थल पर कदम रखा, तो वहां उनका बेहद गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया। इस महासम्मेलन में भाग लेने से ठीक एक दिन पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर झापारोव के साथ एक द्विपक्षीय बैठक भी की थी। इस बैठक के दौरान दोनों शीर्ष नेताओं ने भारत और किर्गिस्तान के बीच चल रहे पारंपरिक और रणनीतिक संबंधों की गहराई से समीक्षा की। साथ ही, भविष्य की साझेदारी को और अधिक मजबूत और धारदार बनाने के लिए अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता को भी दोहराया।

शी जिनपिंग और पीएम मोदी की मुलाकात

मंगलवार का दिन इस शिखर सम्मेलन के दौरान सबसे बड़ा आकर्षण का केंद्र रहा, जब तमाम देशों के राष्ट्राध्यक्ष औपचारिक रूप से एक-दूसरे से रूबरू हो रहे थे। इसी दौरान एक ऐसा दिलचस्प पल कैमरे में कैद हुआ, जिसकी चर्चा आज पूरी दुनिया में हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग जब आमने-सामने आए, तो दोनों के बीच की बॉडी लैंग्वेज बेहद सकारात्मक और गर्मजोशी से भरपूर थी।

दोनों नेताओं ने न केवल एक-दूसरे का अभिवादन किया, बल्कि बेहद सहज अंदाज में हाथ भी मिलाया। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि वैश्विक मंच पर भारत और चीन के शीर्ष नेतृत्व के बीच इस तरह की सौहार्दपूर्ण बातचीत क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। हालांकि दोनों देशों के बीच सीमा से जुड़े मुद्दों पर कई स्तरों पर बातचीत जारी है, लेकिन एससीओ के मंच पर यह संक्षिप्त और सकारात्मक मुलाकात कूटनीतिक हलकों में बड़ा संदेश दे गई है।

शहबाज शरीफ की बेबसी और नजरअंदाजी

एक तरफ जहां प्रधानमंत्री मोदी की वैश्विक नेताओं के साथ सक्रिय सहभागिता देखने को मिल रही थी, वहीं दूसरी तरफ मंच पर खड़े पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की स्थिति बिल्कुल उलट थी। ग्रुप फोटो सेशन और अनौपचारिक मुलाकातों के दौरान पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ चुपचाप हाथ बांधे खड़े नजर आए। 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद यह दूसरा मौका था जब पीएम मोदी और शहबाज शरीफ किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक साथ नजर आए।

लेकिन प्रोटोकॉल और कूटनीतिक मर्यादा के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया। पिछले साल चीन के तियानजिन शहर में हुए 25वें एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला था, जहां दोनों नेताओं के बीच किसी भी तरह का संवाद नहीं हुआ था। बिश्केक में भी इतिहास ने खुद को दोहराया और भारतीय प्रधानमंत्री ने पड़ोसी मुल्क के हुक्मरान को तवज्जो न देकर यह साफ कर दिया कि जब तक आतंकवाद और क्षेत्रीय स्थिरता पर पाकिस्तान का रवैया नहीं बदलता, तब तक सामान्य कूटनीति की उम्मीद करना बेमानी है।

भारत का क्षेत्रीय दृष्टिकोण: 'सुरक्षा, संपर्क और अवसर'

उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान की अपनी इस महत्वपूर्ण यात्रा पर रवाना होने से पहले, नई दिल्ली से जारी अपने अधिकारिक बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एससीओ संगठन में भारत की भूमिका को बहुत स्पष्ट रूप से रेखांकित किया था। उन्होंने कहा था कि साल 2017 से भारत इस संगठन का एक बेहद सक्रिय, सकारात्मक और रचनात्मक सदस्य बना हुआ है।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत का मुख्य फोकस हमेशा से 'सुरक्षा, संपर्क और अवसर' (Security, Connectivity, and Opportunity) के तीन बुनियादी स्तंभों पर टिका रहा है। मध्य एशिया के तमाम देशों के साथ भारत अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्तों को पुनर्जीवित करने के साथ-साथ आधुनिक तकनीकी और आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। आतंकवाद, अलगाववाद और धार्मिक कट्टरपंथ जैसी समकालीन वैश्विक चुनौतियों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने यह संदेश भी दिया कि एससीओ के सदस्य देशों को मिलकर एक सुरक्षित और भयमुक्त क्षेत्र के निर्माण के लिए एकजुट होना होगा।

मध्य एशिया के साथ मजबूत होते भारत के रिश्ते

पिछले कुछ वर्षों में भारत की विदेश नीति में मध्य एशियाई देशों (Central Asian Republics) के साथ संबंधों को प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रखा गया है। ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक गलियारे, और रणनीतिक साझीदारी के लिहाज से किर्गिस्तान, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान जैसे देश भारत के लिए बेहद अहम हैं।

बिश्केक का यह शिखर सम्मेलन इस दिशा में एक और मील का पत्थर साबित हो रहा है। एक तरफ जहां बहुपक्षीय मंचों पर भारत अपनी बात मजबूती से रख रहा है, वहीं दूसरी तरफ द्विपक्षीय बैठकों के जरिए कूटनीतिक मोर्चे पर अपने प्रभाव को लगातार विस्तार दे रहा है। चीनी राष्ट्रपति के साथ सकारात्मक संवाद और पाकिस्तान की बेरुखी जैसी तस्वीरें यह साबित करती हैं कि आज का भारत अपनी शर्तों पर क्षेत्रीय राजनीति की दिशा तय करने की कूवत रखता है।

निष्कर्ष

शंघाई सहयोग संगठन का यह 26वां संस्करण भारत के बढ़ते वैश्विक कद और परिपक्व कूटनीति का एक और जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया है। जहां एक ओर भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर अपने रुख से कोई समझौता न करते हुए पाकिस्तान को पूरी तरह हाशिए पर धकेल दिया, वहीं दूसरी ओर चीन के साथ संवाद के रास्ते खुले रखकर अपनी कूटनीतिक परिपक्वता का परिचय भी दिया। आने वाले दिनों में बिश्केक में बनी यह कूटनीतिक जमीन एशिया की भू-राजनीति को किस दिशा में ले जाती है, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी रहेंगी।

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ममता पाठक

ममता पाठक

Chief Editor

ममता पाठक न्यूज़रूम की संपादकीय दिशा तय करने वाली प्रमुख स्तंभ हैं। अंतरराष्ट्रीय खबरों की गहरी समझ और वर्षों के अनुभव के साथ, वे कंटेंट की गुणवत्त...

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