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नेपाल में चमत्कार: तीन दिन तक मलबे में दबी रही 6 साल की मासूम, ऐसे बची जान

नेपाल में चमत्कार: तीन दिन तक मलबे में दबी रही 6 साल की मासूम, ऐसे बची जान

कुदरत के कहर के आगे जब इंसान बेबस नजर आता है, तब कभी-कभी ऐसे चमत्कार सामने आते हैं जिन पर यकीन करना मुश्किल हो जाता है। नेपाल में इन दिनों आई भयंकर प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचा रखी है। इस बीच रसुवा जिले से एक ऐसी दिल को सुकून देने वाली और हैरान करने वाली खबर सामने आई है, जिसे सुनकर हर कोई दंग है। यहाँ एक छह साल की मासूम बच्ची ने मौत को मात दे दी है। मलबे और कीचड़ के ढेर के नीचे लगातार तीन दिनों तक दबी रहने के बावजूद इस नन्ही बच्ची की सांसें चलती रहीं। जब सुरक्षाबलों ने उसे बाहर निकाला, तो हर किसी की आंखें नम थीं।

तिब्बत से आई बाढ़ ने मचाई भयंकर तबाही

प्राप्त जानकारी के अनुसार, तिब्बत की तरफ से अचानक आई भीषण बाढ़ और मलबे के सैलाब ने नेपाल के कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। इस विनाशकारी आपदा ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें अब तक 675 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि हजारों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। हर तरफ मातम और तबाही का मंजर है। ऐसे निराशाजनक और डरावने माहौल के बीच रसुवा जिले के टिमुरे इलाके से आई यह घटना किसी चमत्कार से कम नहीं है।

भोटेकोशी नदी के किनारे आए इस जलप्रलय ने पल भर में सब कुछ तहस-नहस कर दिया। इसी मलबे और कीचड़ के नीचे यह छह साल की बच्ची दब गई थी। किसी को उम्मीद नहीं थी कि इस भयंकर आपदा के इतने दिनों बाद भी कोई जीवित बचा होगा। लेकिन कहते हैं न कि 'जाको राखे साइयां, मार सके ना कोय', इस बच्ची के मामले में यह कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है।

राहत-बचाव अभियान के दौरान सुनाई दी रोने की क्षीण आवाज

घटना शुक्रवार शाम की है, जब नेपाल के सशस्त्र पुलिस बल की एक टुकड़ी टिमुरे क्षेत्र में भोटेकोशी नदी के आसपास राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई थी। जवान मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे थे और स्थिति का जायजा ले रहे थे। तभी अचानक एक जवान का ध्यान मलबे के एक ढेर की तरफ गया। वहां से किसी के रोने की बहुत ही धीमी और दबी हुई आवाज आ रही थी।

पहले तो जवानों को अपनी कानों पर यकीन नहीं हुआ, क्योंकि मलबे को गिरे हुए तीन दिन बीत चुके थे। लेकिन जब ध्यान से सुना गया, तो वह किसी बच्चे के रोने की ही आवाज थी। बिना एक पल गंवाए, सशस्त्र पुलिस के जवानों ने अपनी पूरी ताकत के साथ मिट्टी और पत्थरों की खुदाई शुरू कर दी। युद्ध स्तर पर चलाए गए इस रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान जब मलबे को हटाया गया, तो अंदर का नजारा देख सभी हैरान रह गए। छह साल की वह मासूम बच्ची वहीं दबी हुई थी और उसकी सांसें चल रही थीं।

अस्पताल में जारी है इलाज

लगातार तीन दिनों तक बिना खाए-पिए, अंधेरे और घुटन भरे मलबे में दबे रहने के कारण बच्ची की शारीरिक स्थिति बेहद कमजोर हो चुकी थी। उसके शरीर पर कुछ चोटें भी आई थीं। तुरंत उसे मलबे से निकालकर सुरक्षित बाहर लाया गया और सबसे पहले बॉर्डर आउट पोस्ट, टिमुरे ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसका प्राथमिक उपचार शुरू किया।

बच्ची की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत उसी दिन यानी शुक्रवार को ही हेलिकॉप्टर के जरिए राजधानी काठमांडू भेजने का प्रयास किया गया था। लेकिन, मौसम की खराबी और रात का समय होने के कारण हेलिकॉप्टर उड़ान नहीं भर सका। इसके बाद सुरक्षा बलों और डॉक्टरों ने रात भर बॉर्डर आउट पोस्ट पर ही उसकी देखरेख की और लगातार उसका इलाज जारी रखा ताकि उसकी हालत बिगड़ने न पाए।

शनिवार को काठमांडू किया गया एयरलिफ्ट

अगले दिन यानी शनिवार की दोपहर को जब मौसम कुछ साफ हुआ, तो बिना देर किए बच्ची को हेलिकॉप्टर की मदद से काठमांडू लाया गया। वर्तमान में उसे काठमांडू के एक बड़े अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की विशेष निगरानी में उसका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, बच्ची की हालत अब स्थिर है और वह धीरे-धीरे रिकवर कर रही है।

त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण

नेपाल में इस वक्त बाढ़ और भूस्खलन की वजह से हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस आपदा में अब तक 675 लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 2,400 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश लगातार जारी है। ऐसे में इस छह साल की बच्ची का तीन दिन बाद जिंदा मिल जाना इस पूरी त्रासदी के बीच किसी अजूबे और उम्मीद की किरण जैसा है।

इस घटना का वीडियो और खबर जैसे ही सोशल मीडिया और स्थानीय माध्यमों पर फैली, हर कोई इसे भगवान का चमत्कार मान रहा है। सशस्त्र पुलिस बल के जवानों की सूझबूझ और सतर्कता के कारण आज इस नन्ही जान को नया जीवन मिल सका है। देश-दुनिया के लोग इस बच्ची के जल्द से जल्द पूरी तरह स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।

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ममता पाठक

ममता पाठक

Chief Editor

ममता पाठक न्यूज़रूम की संपादकीय दिशा तय करने वाली प्रमुख स्तंभ हैं। अंतरराष्ट्रीय खबरों की गहरी समझ और वर्षों के अनुभव के साथ, वे कंटेंट की गुणवत्त...

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