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स्पेन में अचानक क्यों गिरेगी सरकार? पीएम सांचेज ने 8 महीने पहले ही कर दिया चुनाव का ऐलान

स्पेन में अचानक क्यों गिरेगी सरकार? पीएम सांचेज ने 8 महीने पहले ही कर दिया चुनाव का ऐलान

स्पेन की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। देश के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने तय समय से करीब 8 महीने पहले ही आम चुनाव कराने का बड़ा दांव चल दिया है। अचानक लिए गए इस फैसले ने यूरोपीय राजनीति में हलचल मचा दी है। आखिर ऐसी कौन सी परिस्थितियां बन गईं कि एक मजबूत सियासी समीकरण के बीच प्रधानमंत्री को समय से पहले इलेक्शन का रास्ता चुनना पड़ा? आइए इस राजनीतिक उठापटक के हर पहलू को गहराई से समझते हैं।

29 नवंबर 2026 को डाले जाएंगे वोट

घोषित शेड्यूल के मुताबिक, स्पेन में अब 29 नवंबर 2026 को आम चुनाव होंगे। प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने खुद टीवी पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए इस बात की जानकारी दी। उन्होंने साफ किया कि मौजूदा राजनीतिक गतिरोध को तोड़ने और देश को एक स्पष्ट दिशा देने के लिए जनता के बीच जाना ही एकमात्र विकल्प बचा था। इस फैसले के बाद से ही स्पेनिश संसद को भंग करने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिसके लिए कैबिनेट की मंजूरी ली जा रही है।

हाउसिंग क्राइसिस: जनता के गुस्से की सबसे बड़ी आग

विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव के केंद्र में सबसे बड़ा मुद्दा 'आवास संकट' यानी हाउसिंग क्राइसिस रहने वाला है। पिछले कुछ हफ्तों से स्पेन के अलग-अलग शहरों में घरों की आसमान छूती कीमतों, लोगों को जबरन बेघर किए जाने और किफायती मकानों की भारी कमी के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

राजधानी मैड्रिड में हुई एक घटना ने इस गुस्से को और भड़का दिया, जहां 87 साल की एक बुजुर्ग महिला को उसके घर से बाहर निकाल दिया गया। इस अमानवीय घटना के बाद जनता का आक्रोश सड़क पर फूट पड़ा और कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों तथा पुलिस के बीच झड़पें व आगजनी की घटनाएं देखने को मिलीं।

संसद में पिछड़, अल्पमत सरकार पर बढ़ा दबाव

54 वर्षीय पेड्रो सांचेज साल 2018 से देश की सत्ता संभाल रहे हैं। साल 2023 से वे वामपंथी दल ‘सुमार’ के समर्थन से अल्पमत गठबंधन सरकार चला रहे हैं। हालांकि, उनकी यह राह कभी भी आसान नहीं रही। कानून पास करने के लिए उन्हें लगातार छोटी-छोटी क्षेत्रीय पार्टियों पर निर्भर रहना पड़ता है।

हाल ही में सांचेज सरकार को उस समय करारा झटका लगा, जब विपक्षी दलों ने मिलकर किराएदारों की सुरक्षा और प्रॉपर्टी के नाम पर हो रही सट्टेबाजी को रोकने वाले इमरजेंसी उपायों को संसद में रोक दिया। इस हार ने प्रधानमंत्री की राजनीतिक जमीन खिसका दी और तभी से यह कयास लगाए जा रहे थे कि वे जनता का समर्थन हासिल करने के लिए समय से पहले चुनाव का पत्ता फेंक सकते हैं।

भ्रष्टाचार के आरोप और माइग्रेशन संकट की दोहरी मार

महंगाई और आवास संकट के अलावा भी पेड्रो सांचेज के सामने कई मोर्चों पर चुनौतियां खड़ी हैं। उनकी अपनी सोशलिस्ट पार्टी के कुछ सदस्यों, जिनमें उनके परिवार के लोग (पत्नी और भाई) भी शामिल हैं, से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों की जांच चल रही है। हालांकि, इन सभी ने किसी भी तरह के गलत काम से इनकार किया है, लेकिन विपक्ष को सरकार को घेरने का एक बड़ा हथियार मिल गया है।

इसके अलावा, सेउटा में आप्रवासन (Migration) के मुद्दों से जिस तरह से सांचेज प्रशासन ने निपटा है, उसकी भी तीखी आलोचना हुई है। अंतरराष्ट्रीय मंचों और घरेलू स्तर पर सरकार की नीतियों पर सवाल उठते रहे हैं।

विपक्ष ने किया स्वागत, कांटे की होगी टक्कर

इस शुरुआती चुनाव की घोषणा के बाद स्पेन की मुख्य विपक्षी पार्टी ‘पॉपुलर पार्टी’ के नेता अल्बर्टो नुनेज फीजू ने इसका खुले दिल से स्वागत किया है। फीजू का कहना है कि इस चुनाव से देश के निराश मतदाताओं को अपनी पसंद की सरकार चुनने और देश का भविष्य तय करने का सुनहरा मौका मिलेगा।

सांचेज ने अपने भाषण में देश की जनता से अपील की है कि वे संसद में उनकी पार्टी की ताकत को बढ़ाएं ताकि प्रोग्रेसिव नीतियां बिना किसी बाधा के लागू की जा सकें। बहरहाल, 29 नवंबर का यह चुनाव तय करेगा कि स्पेन की सत्ता की कमान किसके हाथों में जाती है और क्या आम जनता का गुस्सा सांचेज की कुर्सी पर भारी पड़ता है या नहीं।

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ममता पाठक

ममता पाठक

Chief Editor

ममता पाठक न्यूज़रूम की संपादकीय दिशा तय करने वाली प्रमुख स्तंभ हैं। अंतरराष्ट्रीय खबरों की गहरी समझ और वर्षों के अनुभव के साथ, वे कंटेंट की गुणवत्त...

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