अमेरिका में मध्यावधि चुनावों के लिए मतदान शुरू हो गया है। कांग्रेस के दोनों सदनों का नियंत्रण दांव पर है, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एजेंडे को तय करेगा।
अमेरिका में मध्यावधि चुनावों के लिए मंगलवार को मतदान शुरू हो गया है, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के शेष दो वर्षों के लिए एक अहम राजनीतिक परीक्षा साबित होंगे।
इन चुनावों के परिणामों से तय होगा कि अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों—प्रतिनिधि सभा और सीनेट—पर रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण बरकरार रहेगा या डेमोक्रेटिक पार्टी अपनी स्थिति मजबूत करने में कामयाब होगी। चुनाव प्रचार के दौरान महंगाई, बढ़ती जीवन-यापन लागत, आव्रजन नीतियां और ईरान युद्ध जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर मतदाताओं की राय ने चुनावी माहौल को गर्मा दिया है।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, चुनावी रण में पानी की तरह पैसा बहाया गया है। राष्ट्रपति ट्रंप के राजनीतिक संगठन 'मागा इंक' ने लगभग 28 करोड़ डॉलर खर्च किए हैं, जबकि उनके समर्थक एवं टेस्ला के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एलन मस्क ने 36.6 करोड़ डॉलर का भारी-भरकम निवेश किया है। अमेरिकी चुनाव सहायता आयोग (ईएसी) के आंकड़ों के मुताबिक देश में कुल पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 23.45 करोड़ है। निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए न्याय विभाग ने देश भर में 1,000 चुनाव निगरानीकर्ताओं को तैनात किया है। मतदान संपन्न होने के तुरंत बाद मतगणना शुरू हो जाएगी और अगले दिन तक अंतिम परिणाम आने की उम्मीद है। हालांकि, 'न्यूयार्क टाइम्स-सिएना यूनिवर्सिटी' के पूर्व-चुनाव सर्वेक्षण में डेमोक्रेट्स को टेक्सास, कंसास, मेन, अलास्का, मिशिगन और ओहायो जैसे छह राज्यों में बढ़त मिलते दिखाई गई है।
कांग्रेस में बहुमत का कड़ा गणित
प्रतिनिधि सभा की कुल 435 सीटों के लिए हो रहे मुकाबले में बहुमत का जादुई आंकड़ा 218 है। मौजूदा स्थिति में रिपब्लिकन पार्टी के पास 219 सीटें हैं, जबकि डेमोक्रेट्स के पास 214 सीटें हैं और 2 सीटें खाली हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी को प्रतिनिधि सभा में बहुमत पाने के लिए कम से कम चार सीटों पर जीत हासिल करनी होगी। वहीं सीनेट की 100 सीटों में से इस बार 35 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं। फिलहाल सीनेट में 53 सीटें रिपब्लिकन के पास, 45 डेमोक्रेट्स के पास और 2 निर्दलीय सदस्यों (जो डेमोक्रेट्स के साथ हैं) के पास हैं। यदि सीनेट में 50-50 सीटों की बराबरी की स्थिति बनती है, तो उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का वोट निर्णायक साबित होगा। इसके अलावा फ्लोरिडा और ओहायो में दो विशेष चुनाव भी आयोजित हो रहे हैं। अमेरिकी व्यवस्था के तहत प्रतिनिधि सभा के 435 सदस्यों का कार्यकाल दो साल का होता है, जबकि सीनेट के 100 सदस्यों का कार्यकाल छह साल का होता है और हर दो साल में एक-तिहाई सीटों पर नवीनीकरण होता है।
ट्रंप के एजेंडे और प्रशासन पर असर
मध्यावधि चुनावों के नतीजे सीधे तौर पर राष्ट्रपति ट्रंप की विधायी शक्तियों और प्रशासनिक प्राथमिकताओं को प्रभावित करेंगे। यदि डेमोक्रेट्स प्रतिनिधि सभा पर कब्जा जमा लेते हैं, तो वे रिपब्लिकन पार्टी के विधेयकों को रोकने, राष्ट्रीय बजट पर दबाव बनाने और सरकारी कामकाज की कड़ी जांच कराने की मजबूत स्थिति में आ जाएंगे। दूसरी ओर, सीनेट का नियंत्रण संघीय जजों, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों और कई शीर्ष प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियों को मंजूरी देने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि, कांग्रेस के किसी भी सदन में हार मिलने से ट्रंप अपनी राष्ट्रपति की कुर्सी नहीं खोएंगे, और उनके पास वीटो तथा कार्यपालिका की अन्य संवैधानिक शक्तियां बरकरार रहेंगी।
भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों और मतदाताओं की भूमिका
इन चुनावों में भारतीय मूल के कई उम्मीदवार विभिन्न महत्वपूर्ण पदों के लिए मैदान में हैं, जिन पर सबकी निगाहें टिकी हैं। ओहायो में रिपब्लिकन उम्मीदवार विवेक रामास्वामी गवर्नर पद की दौड़ में डेमोक्रेट एमी एक्टन को टक्कर दे रहे हैं। न्यूयार्क में सरिथा कोमातिरेड्डी रिपब्लिकन टिकट पर अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स को चुनौती दे रही हैं, जबकि लॉस एंजिलिस में नगर पार्षद नित्या रमन मेयर पद के लिए मौजूदा मेयर कैरेन बैस के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं। इसके अलावा संघीय प्रतिनिधि सभा के लिए कैलिफोर्निया से रो खन्ना और अमी बेरा, वॉशिंगटन से प्रमिला जयपाल तथा वर्जीनिया से सुहास सुब्रमण्यम अपनी सीटों पर पुनर्निर्वाचन के लिए मैदान में डटे हैं। कैलिफोर्निया की सिलिकॉन वैली और न्यू जर्सी जैसे क्षेत्रों में भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं की अच्छी खासी आबादी है, जो करीबी मुकाबलों में हार-जीत का रुख तय कर सकती है। एक हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, प्रतिनिधि सभा के चुनावों में 66 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकी उत्तरदाताओं ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के प्रति झुकाव दिखाया है, जबकि 18 प्रतिशत ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों का समर्थन किया है। समुदाय के मतदाताओं के लिए घरेलू अर्थव्यवस्था, महंगाई, रोजगार और स्वास्थ्य सेवाएं प्राथमिक चिंताएं बनी हुई हैं।
नवंबर के मंगलवार को मतदान की ऐतिहासिक परंपरा
अमेरिका में संघीय चुनावों के लिए नवंबर के पहले सोमवार के बाद आने वाले मंगलवार को मतदान कराने की परंपरा सदियों पुरानी है। यह व्यवस्था उस समय शुरू हुई थी जब देश की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित थी। नवंबर का महीना फसल कटाई का काम पूरा होने के बाद आता था, और मंगलवार का दिन चुनने से ग्रामीण इलाकों के मतदाताओं को रविवार का दिन आराम करने और सोमवार को लंबी यात्रा करके मतदान केंद्रों तक पहुंचने का पर्याप्त समय मिल जाता था।