नागपुर में DRI ने सड़ी सुपारी तस्करी मामले में कारोबारी जयेश पंचमतिया को गिरफ्तार किया। 105% कस्टम ड्यूटी चोरी और गुटखा कंपनियों को सप्लाई का शक है।
राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) की इंदौर टीम ने नागपुर के प्रमुख सुपारी कारोबारी जयेश पंचमतिया को हिरासत में लेकर इंदौर पहुंचाई है। यह कार्रवाई वर्ष 2024 में इंदौर में पकड़ी गई करोड़ों रुपये की सड़ी सुपारी की बड़ी खेप और उससे जुड़े तस्करी रैकेट की चल रही जांच के सिलसिले में की गई है।
कार्रवाई की भनक लगते ही नागपुर और आसपास के सुपारी व्यापारिक हलकों में खलबली मच गई है। डीआरआई इस पूरे प्रकरण में सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) की बड़े पैमाने पर हुई चोरी और अंतरराष्ट्रीय तस्करी के नेटवर्क को खंगालने में जुटी हुई है।
वर्ष 2024 की बड़ी जब्ती से जुड़ा है मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई वर्ष 2024 में इंदौर में सामने आए सड़ी सुपारी के आयात से जुड़े एक बड़े मामले की कड़ियों को जोड़ने के लिए की जा रही है। उस दौरान विभाग ने कार्रवाई करते हुए लगभग 30 से 35 करोड़ रुपये मूल्य की सुपारी जब्त की थी। जांच के दौरान यह बात सामने आई थी कि जयेश पंचमतिया के गोदाम में भी भारी मात्रा में अवैध सुपारी पकड़ी गई थी। जब्त की गई बोरियों पर 'ओरिजिन ऑफ बांग्लादेश' (बांग्लादेश का मूल) लिखा हुआ पाया गया था।
कस्टम ड्यूटी बचाने और गुटखा कंपनियों तक सप्लाई का शक
डीआरआई इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि जब बांग्लादेश में सुपारी का उत्पादन नहीं होता है, तो वहां के नाम से इतनी बड़ी खेप भारत कैसे पहुंचाई गई। शुरुआती जांच और खुफिया इनपुट के आधार पर विभाग को संदेह है कि इस तस्करी के जरिए भारी मात्रा में कस्टम ड्यूटी की चोरी की गई है।
नियमानुसार सुपारी के आयात पर लगभग 105 प्रतिशत तक सीमा शुल्क लगता है। इस भारी-भरकम कर को बचाने के लिए तस्कर और कारोबारी अवैध और छिपे हुए रास्तों का इस्तेमाल करते हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि इस तरह अवैध रूप से नागपुर और अन्य शहरों तक पहुंचाई जाने वाली इस सड़ी और निम्न गुणवत्ता की सुपारी की मुख्य आपूर्ति गुटखा बनाने वाली कंपनियों को की जाती है।
नागपुर के अन्य कारोबारियों पर भी लटकी तलवार
इस हाई-प्रोफाइल मामले में केवल जयेश पंचमतिया ही नहीं, बल्कि नागपुर जिले से जुड़े तीन अन्य संदिग्धों के नाम भी दर्ज हैं। सूत्रों के अनुसार, इनमें चौरसिया और सिद्दीक नामक सुपारी कारोबारी शामिल हैं, जबकि तीसरा संदिग्ध एक फाइनेंसर है। यह फाइनेंसर कागजों पर लोहे (आयरन/स्टील) का व्यापार करता है, लेकिन असल में सुपारी के अवैध धंधे के लिए फंडिंग का काम संभालता है। इन सभी के नाम एफआईआर में शामिल होने के कारण आने वाले दिनों में इनकी गिरफ्तारी की भी पूरी संभावना जताई जा रही है।
चेन्नई और मद्रास उच्च न्यायालय से भी रहा है पुराना नाता
गिरफ्तार किए गए कारोबारी जयेश पंचमतिया (जिसे 'टिक्कू भाई' के नाम से भी जाना जाता है) का विवादों से पुराना नाता रहा है। पूर्व में उसका नाम चेन्नई में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) तथा मद्रास उच्च न्यायालय में सीमा शुल्क से जुड़े पुराने मामलों में भी आ चुका है। उस समय भी उसकी भूमिका सुपारी के अवैध आयात और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन में संदिग्ध पाई गई थी। डीआरआई अब इन पुराने संपर्कों और वर्तमान तस्करी नेटवर्क के बीच के संबंधों को स्थापित करने के लिए उससे पूछताछ कर रही है।