महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम के कर्मचारियों का वेतन संकट गहराया। सरकार से पर्याप्त बजट न मिलने पर यूनियन ने जताई नाराजगी और कार्रवाई की मांग की।
महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) के हजारों कर्मचारियों के सामने एक बार फिर गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। राज्य सरकार की ओर से परिवहन निगम को पर्याप्त वित्तीय सहायता और बजट न मिलने के कारण कर्मचारियों का वेतन समय पर नहीं मिल पा रहा है। इस स्थिति को लेकर श्रमिक संगठनों में भारी असंतोष व्याप्त है।
महाराष्ट्र एसटी कर्मचारी कांग्रेस ने इस पूरे वेतन संकट के लिए सीधे तौर पर राज्य सरकार की नीतियों और वित्तीय प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है। यूनियन के महासचिव श्रीरंग बरगे ने कड़े शब्दों में आरोप लगाया है कि राज्य सरकार की ओर से फंड जारी करने में बरती जा रही लापरवाही के कारण अदालती आदेशों का भी उल्लंघन हो रहा है, जो कि अत्यंत चिंताजनक है।
वेतन भुगतान के लिए जरूरी राशि और आवंटن में भारी अंतर
उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, नवंबर 2025 से अक्टूबर 2026 तक की अवधि के दौरान एसटी निगम के कर्मचारियों और अधिकारियों के वेतन भुगतान के लिए कुल 6,495 करोड़ रुपये की आवश्यकता थी। इसके विपरीत, इस पूरे कार्यकाल में राज्य सरकार द्वारा केवल 5,156.85 करोड़ रुपये ही निगम को उपलब्ध कराए गए हैं।
इस प्रकार, जरूरी राशि और सरकार से प्राप्त वास्तविक बजट के बीच कुल 1,338.15 करोड़ रुपये का बड़ा अंतर सामने आया है। इस भारी भरकम वित्तीय घाटे का सीधा और प्रतिकूल असर परिवहन निगम के कर्मचारियों के मासिक वेतन भुगतान पर पड़ रहा है, जिससे समय पर भुगतान की प्रक्रिया बाधित हुई है।
सितंबर 2026 में सबसे अधिक वित्तीय घाटा
वित्तीय वर्ष के दौरान बजट की स्थिति का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि सितंबर 2026 का महीना सबसे अधिक संकटपूर्ण रहा। इस अकेले महीने में वेतन के लिए जरूरी बजट में 179.94 करोड़ रुपये की सबसे बड़ी कमी दर्ज की गई। लगातार महीनों में इस तरह की वित्तीय अनिश्चितता के कारण कर्मचारियों को हर महीने वेतन देरी की समस्या से जूझना पड़ रहा है।
अदालती आदेशों की अनदेखी और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
यूनियन के महासचिव श्रीरंग बरगे ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि वेतन भुगतान को लेकर पूर्व में दिए गए अदालती निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है। महाराष्ट्र एसटी कर्मचारी कांग्रेस ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए वित्तीय प्रबंधन में लापरवाही बरतने वाले और समय पर बजट जारी न करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की है।
कर्मचारियों और परिवारों पर बढ़ा आर्थिक दबाव
नियमित और समय पर वेतन न मिलने के कारण एसटी निगम के कर्मचारियों के समक्ष गंभीर घरेलू व वित्तीय संकट पैदा हो गया है। समय पर वेतन न आने से कर्मचारियों को अपने परिवार का भरण-पोषण करने, बच्चों की स्कूल-कॉलेज की फीस भरने, चिकित्सा खर्च उठाने तथा बैंक ऋण की किस्तें चुकाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारी संगठनों ने सरकार से मांग की है कि वह इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करते हुए बकाया बजट जारी करे और भविष्य के लिए वेतन भुगतान की व्यवस्था को पूरी तरह नियमित बनाए।