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वंदे भारत की लग्जरी सीट पर संकट: अब नहीं घूम पाएगी एग्जीक्यूटिव क्लास की कुर्सी

वंदे भारत की लग्जरी सीट पर संकट: अब नहीं घूम पाएगी एग्जीक्यूटिव क्लास की कुर्सी

भारतीय रेलवे की शान कही जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस (Vande Bharat Express) को लेकर एक ऐसा अपडेट सामने आया है, जो नियमित रूप से इस ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों को हैरान कर सकता है। देश की इस प्रीमियम सेमी-हाई स्पीड ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत यानी उसकी 180 डिग्री घूमने वाली लग्जरी सीटों (Reclining and Revolving Seats) पर अब संकट के बादल मंडरा रहे हैं। रेलवे प्रशासन इन सीटों के भविष्य को लेकर एक बड़े बदलाव पर विचार कर रहा है, जिससे यात्रियों के सफर करने का अनुभव पूरी तरह से बदल सकता है।

आखिर क्या है पूरा मामला?

जब देश में पहली वंदे भारत ट्रेन का संचालन शुरू हुआ था, तो इसकी सबसे ज्यादा चर्चा इसकी अत्याधुनिक सुविधाओं को लेकर हुई थी। खासकर एग्जीक्यूटिव चेयर कार (Executive Class) में दी जाने वाली वे कुर्सियां आकर्षण का मुख्य केंद्र थीं, जिन्हें यात्री अपनी सुविधा के अनुसार 180 डिग्री तक घुमा सकते थे। इसका फायदा यह होता था कि परिवार या दोस्तों का समूह आमने-सामने बैठकर सफर का आनंद ले सकता था और ट्रेन की दिशा बदलने पर सीट को आसानी से घुमाया जा सकता था।

लेकिन हाल ही में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, तकनीकी दिक्कतों और रखरखाव में आने वाली लगातार परेशानियों के चलते रेलवे इन घूमने वाली सीटों को हटाने पर विचार कर रहा है। आने वाले समय में नई बनने वाली रेक या मौजूदा रेक के मेंटेनेंस के दौरान इन्हें फिक्स्ड सीटों (Fixed Seats) में बदला जा सकता है।

क्यों आ रहा है इन सीटों को हटाने का विचार?

किसी भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम में मेंटेनेंस सबसे महत्वपूर्ण पहलू होता है। वंदे भारत की घूमने वाली सीटों के साथ ग्राउंड लेवल पर कई तरह की व्यावहारिक समस्याएं सामने आ रही हैं:

  • तकनीकी खराबी: इन सीटों को घुमाने के लिए नीचे एक विशेष रोटेटिंग मैकेनिज्म (मशीनरी) होती है, जिसमें धूल, गंदगी और भारी इस्तेमाल के कारण अक्सर खराबी आ जाती है।
  • यात्रियों द्वारा दुरुपयोग: कई बार यात्री बिना तकनीकी जानकारी के या जल्दबाजी में सीटों को बलपूर्वक घुमाने की कोशिश करते हैं, जिससे उनके लॉकिंग पिन और गियर टूट जाते हैं।
  • मेंटेनेंस का भारी खर्च: इन सीटों की मरम्मत और स्पेयर पार्ट्स का खर्च सामान्य सीटों की तुलना में काफी ज्यादा है, जिससे रेलवे पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है।
  • सफाई में परेशानी: सीटों के घूमने वाले बेस के नीचे कचरा फंस जाता है, जिसे ट्रेन की कम समय की हॉल्टिंग में साफ करना सफाई कर्मचारियों के लिए बेहद मुश्किल साबित होता है।

यात्रियों की प्रतिक्रिया और सफर का अनुभव

वंदे भारत की पहचान ही उसकी वर्ल्ड-क्लास सुविधाओं से है। ऐसे में यदि एग्जीक्यूटिव क्लास से घूमने वाली सीटें हटाई जाती हैं, तो यह यात्रियों के लिए एक बड़ा झटका होगा। कई नियमित यात्रियों का मानना है कि इन सीटों की वजह से ही वंदे भारत का किराया अन्य एक्सप्रेस ट्रेनों की तुलना में ज्यादा होने के बावजूद लोग इसे चुनते थे।

"हमने हमेशा वंदे भारत में सफर इसलिए पसंद किया क्योंकि इसकी सीटें हवाई जहाज जैसी लग्जरी फीलिंग देती थीं। अगर रेलवे इन्हें फिक्स कर देगा, तो फिर शताब्दी एक्सप्रेस और वंदे भारत में ज्यादा फर्क नहीं रह जाएगा।" - एक नियमित यात्री की प्रतिक्रिया

हालांकि, रेलवे से जुड़े सूत्रों का यह भी कहना है कि अधिकांश यात्री सफर के दौरान अपनी सीटों को घुमाते ही नहीं हैं। ज्यादातर लोग ट्रेन की गति की दिशा में ही बैठकर यात्रा करना पसंद करते हैं। ऐसे में, जिस सुविधा का उपयोग बहुत कम लोग कर रहे हैं, उस पर भारी-भरकम रखरखाव खर्च करना रेलवे के लिए तर्कसंगत नहीं बैठ रहा है।

भारतीय रेलवे का भविष्य का प्लान

भारतीय रेलवे लगातार वंदे भारत के नेटवर्क को पूरे देश में विस्तार दे रहा है। स्लीपर वर्जन से लेकर वंदे मेट्रो और आधुनिक चेयर कार रेक तक, हर मोर्चे पर काम चल रहा है। ऐसे में यात्री सुविधाओं को और अधिक टिकाऊ (Durable) बनाने के लिए रेलवे नए डिजाइन पर काम कर रहा है। हालांकि, अभी तक रेलवे बोर्ड की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक और अंतिम आदेश जारी नहीं किया गया है, लेकिन अनौपचारिक बैठकों में इस पर मंथन तेज हो चुका है।

निष्कर्ष

वंदे भारत ट्रेनें भारत की बदलती रेल तस्वीर का प्रतीक हैं। यदि लग्जरी और घूमने वाली सीटों का विकल्प वाकई में हटाया जाता है, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि रेलवे इसकी भरपाई किस नई और बेहतर सुविधा से करता है। तब तक, यात्रियों के लिए यह जरूरी है कि वे अपनी अगली यात्रा में इन लग्जरी सीटों का आनंद लें और रेलवे के अगले आधिकारिक फैसले का इंतजार करें।

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ममता पाठक

ममता पाठक

Chief Editor

ममता पाठक न्यूज़रूम की संपादकीय दिशा तय करने वाली प्रमुख स्तंभ हैं। अंतरराष्ट्रीय खबरों की गहरी समझ और वर्षों के अनुभव के साथ, वे कंटेंट की गुणवत्त...

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