नवादा जिले के वारिसलीगंज थाने के प्रभारी की मानवीय पहल, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
बिहार के नवादा जिले के वारिसलीगंज थाना क्षेत्र से पुलिस की एक संवेदनशील तस्वीर सामने आई है, जहां थाना प्रभारी पंकज कुमार सैनी की एक पहल चर्चा का विषय बन गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो के अनुसार, थाना प्रभारी ने नो एंट्री जोन में पकड़े गए दो ई-रिक्शा चालकों की मजबूरी को समझते हुए न केवल उन्हें छोड़ा, बल्कि उनकी आर्थिक मदद भी की, ताकि वे अपने परिवार के साथ त्योहार मना सकें।
मरीज की जरूरत और चालकों की मजबूरी
मिली जानकारी के मुताबिक, वारिसलीगंज में यातायात व्यवस्था और नो एंट्री के नियमों का पालन कराने के दौरान पुलिस ने दो ई-रिक्शा चालकों को रोक लिया था। जब पुलिस ने उनसे पूछताछ की, तो चालकों ने अपनी वास्तविक मजबूरी बताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी मरीज से जुड़ी जरूरी आवश्यकता के कारण ही इस समय ई-रिक्शा लेकर निकले थे। चालकों की स्थिति और उनकी परेशानी को सुनने के बाद थाना प्रभारी पंकज कुमार सैनी ने सख्त कार्रवाई करने के बजाय मानवीय दृष्टिकोण अपनाया।
थाना प्रभारी ने दिए 5,500 रुपये
प्राप्त विवरण के अनुसार, स्थिति की गंभीरता और चालकों की आर्थिक तंगी को भांपते हुए थाना प्रभारी ने अपनी ओर से दोनों चालकों को कुल 5,500 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। इसके बाद उन्हें हिदायत देते हुए त्योहार मनाने के लिए सकुशल उनके घर भेज दिया गया। इस पूरी घटना का किसी, द्वारा बनाया गया वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद से आम लोग पुलिसकर्मी की इस दरियादिली की खुलकर प्रशंसा कर रहे हैं।
जिम्मेदार पुलिसिंग और मानवीय संवेदना
इस घटना ने एक बार फिर यह रेखांकित कर दिया है कि कानून और व्यवस्था बनाए रखना पुलिस का प्राथमिक कर्तव्य है, लेकिन इसके साथ ही मानवीय संवेदनाएं और व्यावहारिक समझ भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि नियमों का पालन सख्ती से कराने के साथ-साथ किसी जरूरतमंद की वास्तविक परेशानी को समझना ही सही मायनों में जनहित की पुलिसिंग है। हालांकि, इस वायरल वीडियो और आर्थिक सहायता से जुड़ी घटना की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। रिपोर्टर अमन कुमार के इनपुट के आधार पर तैयार इस खबर में सोशल मीडिया पर सामने आए तथ्यों को प्रमुखता दी गई है।