मथुरा के रिफाइनरी नगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ओर से विजयादशमी उत्सव एवं भव्य पथ संचलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में लगभग 100 स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में अनुशासित कदमताल करते हुए भाग लिया।
भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा में विजयादशमी के पारंपरिक पर्व और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना दिवस के अवसर पर यह आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विजयादशमी के महत्व, संघ की स्थापना के उद्देश्यों तथा समाज में सामाजिक समरसता और राष्ट्रभक्ति के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना रहा। संचलन के दौरान पूरे मार्ग पर उत्साह का माहौल देखने को मिला, जहां स्थानीय नागरिकों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया।
कृष्ण कुंज से डायट मार्ग तक निकला पथ संचलन
कार्यक्रम का शुभारंभ औरंगाबाद स्थित कृष्ण कुंज से किया गया। यहां से स्वयंसेवकों का पथ संचलन शुरू होकर डायट (DIET) मार्ग तक निकाला गया। इस दौरान सभी स्वयंसेवक सफेद कमीज, भूरी पैंट और काली टोपी के निर्धारित पूर्ण गणवेश में नजर आए। हाथों में दंड धारण किए हुए स्वयंसेवकों ने पूरी अनुशासनबद्धता के साथ कदमताल की।
इस पथ संचलन में युवा और तरुण स्वयंसेवकों के साथ-साथ वरिष्ठ स्वयंसेवकों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। संचलन मार्ग पर नागरिकों द्वारा की गई पुष्पवर्षा ने इस आयोजन को और अधिक उत्सवधर्मिता प्रदान की।
बौद्धिक सत्र में विजयादशमी और संघ स्थापना के महत्व पर प्रकाश
पथ संचलन से पहले एक बौद्धिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें विद्या भारती, ब्रज प्रांत के संगठन मंत्री प्रमोद मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने विजयादशमी के धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह पर्व केवल रावण पर भगवान श्रीराम की विजय का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म और आसुरी शक्तियों पर दैवीय शक्तियों की विजय का शाश्वत संदेश देता है।
प्रमोद ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि विजयादशमी का यह दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसी पावन दिवस पर संघ की स्थापना हुई थी। यह अवसर स्वयंसेवकों के लिए अपने संकल्पों को तरोताजा करने तथा राष्ट्र एवं समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्वों को गहराई से समझने का होता है। उन्होंने समाज को संगठित करने, सामाजिक समरसता को सुदृढ़ बनाने और राष्ट्रभक्ति की भावना को व्यापक स्तर पर जागृत करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।
संगठन और समाज की सहभागिता
कार्यक्रम में प्रांत से लेकर नगर स्तर तक के अनेक वरिष्ठ अधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख रूप से कैलाश, डॉ. कमल, राजेश दीक्षित, नागेन्द्र, चंद्रपाल, ब्रज मोहन, ओमवीर, चंद्रभान, विजेंद्र, रमन और धन्नजय सहित तमाम स्थानीय कार्यकर्ता शामिल हुए। इन सभी की उपस्थिति ने आयोजन को संगठनात्मक मजबूती प्रदान की।
कार्यक्रम का समापन 'भारत माता की जय' के गगनभेदी उद्घोष के साथ हुआ। आयोजकों का मानना है कि इस तरह के अनुशासित आयोजन समाज मेंसद्भाव, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की भावना को निरंतर प्रज्ज्वलित रखते हैं।