आधुनिक कारों में मिलने वाले 5 छिपे हुए और उपयोगी स्मार्ट फीचर्स
आजकल बाजार में आने वाली आधुनिक कारों में टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, पैनोरमिक सनरूफ और रियर व्यू कैमरा जैसे फीचर्स आम हो गए हैं, लेकिन इनके अलावा भी कई ऐसे स्मार्ट फीचर्स दिए जाते हैं जो रोजाना की ड्राइविंग को बेहद आसान और सुरक्षित बना सकते हैं। इनमें से कई फीचर्स ऐसे हैं जो कम रोशनी में रास्ता दिखाने से लेकर खराब मौसम और धुंध जैसी स्थितियों में ड्राइवर की मदद करते हैं। हालांकि, जागरूकता के अभाव में कई वाहन चालक इन तकनीकों का पूरा लाभ नहीं उठा पाते हैं। कार मालिकों के लिए यह जानना जरूरी है कि ये फीचर्स कैसे काम करते हैं और इनका सही इस्तेमाल किस प्रकार किया जा सकता है।
1. फॉलो-मी-होम (Follow-Me-Home) हेडलैंप
रात के समय अक्सर कार को पार्किंग में खड़ा करने के बाद घर के मुख्य दरवाजे तक पहुंचने के लिए मोबाइल की फ्लैशलाइट का सहारा लेना पड़ता है, क्योंकि इंजन बंद करते ही कार की मुख्य लाइटें भी बुझ जाती हैं। इस समस्या से निपटने के लिए आधुनिक गाड़ियों में 'फॉलो-मी-होम' हेडलैंप का विकल्प मिलता है। यह स्मार्ट फीचर इंजन बंद करने और वाहन लॉक करने के बाद भी तय समय तक हेडलाइट को चालू रखता है, जिससे आसपास पर्याप्त रोशनी बनी रहती है। इस सुविधा को सक्रिय करने का तरीका गाड़ी के मॉडल और ब्रांड पर निर्भर करता है। कई गाड़ियों में इंजन बंद करने के बाद डिपर स्विच दबाने से यह एक्टिव होता है, तो कुछ में चाबी के रिमोट या इंफोटेनमेंट सेटिंग से इसे नियंत्रित किया जाता है।
2. रेन-सेंसिंग वाइपर (Rain-Sensing Wipers)
बरसात के मौसम में गाड़ी चलाते समय रुक-रुक कर वाइपर की स्पीड बदलना कई बार ड्राइवर का ध्यान भटका देता है और हादसे का जोखिम बढ़ जाता है। रेन-सेंसिंग वाइपर इस परेशानी को दूर करते हैं। विंडशील्ड पर लगे विशेष सेंसर बारिश की बूंदों की तीव्रता को भांप लेते हैं और उसी के अनुसार वाइपर की गति को स्वतः तेज या धीमा कर देते हैं। इस तकनीक का उपयोग करने के लिए ड्राइवर को वाइपर कंट्रोल लीवर को 'ऑटो' (AUTO) मोड पर सेट करना होता है। सेंसर की यह प्रतिक्रिया बारिश की रफ्तार और वाहन की सिस्टम सेटिंग्स के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
3. ऑटो डिफॉगर (Auto Defogger)
सर्दियों के दिनों में या अत्यधिक नमी वाले मौसम में अक्सर कार के अंदरूनी शीशों पर धुंध जम जाती है, जिससे सामने का रास्ता देखना मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए कई गाड़ियों में ऑटो डिफॉगर की सुविधा दी जाती है। यह सेंसर की मदद से विंडशील्ड पर जमी धुंध या नमी को पहचानता है और शीशे को साफ करने के लिए स्वतः ही हीटिंग सिस्टम या ब्लोअर को सक्रिय कर देता है। वाहन चालकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने वाहन के क्लाइमेट कंट्रोल पैनल या मैनुअल की जांच करके यह सुनिश्चित करें कि उनकी कार में यह फीचर उपलब्ध है या नहीं।
4. ऑटो हेडलैंप (Auto Headlamp)
फॉलो-मी-होम फीचर से अलग, ऑटो हेडलैंप का मुख्य काम बाहर की रोशनी कम होने पर हेडलाइट को अपने आप चालू करना है। जब गाड़ी किसी टनल, अंडरपास या घने अंधेरे रास्ते से गुजरती है, तो ड्राइवर को बार-बार लाइट का स्विच ऑन या ऑफ करने की जरूरत नहीं पड़ती। यह सेंसर आधारित तकनीक बाहरी उजाले के स्तर को मापकर खुद ही हेडलाइट जला देती है। इसका उपयोग करने के लिए लाइट कंट्रोल नॉब को ऑटो मोड पर रखना होता है। हालांकि, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि यह सुविधा सभी वेरिएंट या गाड़ियों में मानक रूप से नहीं आती है।
5. इमरजेंसी हैजार्ड लाइट्स का अपने आप चालू होना
आपातकालीन स्थितियों में सड़क पर पीछे चल रहे वाहनों को सतर्क करना बहुत जरूरी होता है। कुछ आधुनिक कारों में यह सुरक्षा फीचर होता है कि अचानक तेज ब्रेक लगाने, वाहन के अनियंत्रित होने या एयरबैग खुलने जैसी परिस्थितियों में हैजार्ड लाइट्स अपने आप जल उठती हैं। इससे पीछे आ रहे वाहन चालकों को तुरंत चेतावनी मिल जाती है और संभावित टक्कर टल सकती है। इस फीचर की उपलब्धता और कार्यप्रणाली पूरी तरह से कार के स्पेसिफिकेशन और मालिकाना मैनुअल पर निर्भर करती है। वाहन चालकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी नए फीचर का इस्तेमाल करने से पहले अपनी कार के ओनर मैनुअल (Owner's Manual) का अध्ययन अवश्य करें।