पूर्वी चंपारण जिले के ढाका प्रखंड अंतर्गत करमवा पंचायत में मनरेगा योजना के तहत चल रहे कार्यों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता और फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। डिजिटल निगरानी ऐप का दुरुपयोग कर धरातल पर बिना एक भी मजदूर के काम किए रोजाना 181 मजदूरों की फर्जी उपस्थिति दर्ज की जा रही थी। सिकरहना अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) द्वारा की गई औचक जांच के बाद इस खेल का पर्दाफाश हुआ, जिसके बाद प्रशासनिक स्तर पर हड़कंप मच गया है। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को हिरासत में लिया है।
एसडीओ की औचक जांच में सामने आया भ्रष्टाचार
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ढाका प्रखंड क्षेत्र में मनरेगा योजनाओं के क्रियान्वयन में बड़े पैमाने पर धांधली और भ्रष्टाचार की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। इन शिकायतों का संज्ञान लेते हुए सिकरहना एसडीओ विजय कुमार ने करमवा पंचायत में चल रहे विकास कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। जांच के दौरान पंचायत भवन परिसर में मिट्टी भराई एवं पेवर ब्लॉक निर्माण तथा बहलोलपुर में नाला और पीसीसी निर्माण कार्य का जायजा लिया गया।
निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक टीम को दोनों ही कार्यस्थलों पर सन्नाटा मिला और मौके पर एक भी मजदूर काम करता हुआ नहीं पाया गया। इसके विपरीत, जब एनएमएमएस क्लोन ऐप की डिजिटल मॉनिटरिंग की जांच की गई, तो वहां बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। जांच रिपोर्ट के अनुसार, पहली योजना में 11 से 18 अक्टूबर तक प्रतिदिन 133 मजदूरों की और दूसरी योजना में 15 से 18 अक्टूबर तक प्रतिदिन 48 मजदूरों की फर्जी उपस्थिति दर्ज की जा रही थी। इस तरह कुल 181 मजदूरों की फर्जी हाजिरी बनाकर सरकारी खजाने से बड़ी राशि के गबन की योजना बनाई गई थी।
तीन लोगों पर प्राथमिकी दर्ज और एक आरोपी हिरासत में
मौके पर मिले साक्ष्यों और गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद एसडीओ के निर्देश पर मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी (पीओ) द्वारा ढाका थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने इस मामले में रूपमाला देवी, पंचायत समिति पति लालबाबू पासवान और मो. रिजवान—कुल तीन नामजद आरोपियों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है। कार्रवाई करते हुए पुलिस ने मुख्य आरोपी पंचायत समिति पति लालबाबू पासवान को उस मोबाइल फोन के साथ हिरासत में ले लिया है जिसका उपयोग फर्जी हाजिरी चढ़ाने के लिए किया जा रहा था। पुलिस फिलहाल हिरासत में लिए गए आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है।
जिला प्रशासन को भेजी गई विस्तृत रिपोर्ट
सिकरहना एसडीओ विजय कुमार ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों को रोजगार उपलब्ध कराने वाली सरकार की इस बेहद महत्वाकांक्षी योजना को कुछ लोगों ने लूट का जरिया बना लिया है। स्थलीय जांच में मजदूरों की अनुपस्थिति और ऐप पर फर्जी प्रविष्टियों के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच रिपोर्ट जिला पदाधिकारी को भेज दी गई है। प्रशासन का कहना है कि इस फर्जीवाड़े में संलिप्त अन्य स्थानीय कर्मियों, तकनीकी सहायकों या अधिकारियों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।