फतेहपुर और बाराबंकी के मोहम्मदपुर खाला क्षेत्र स्थित सर्जनपुर गांव में चौदह वर्षों का लंबा इंतजार आखिरकार समाप्त हो गया है। उच्च न्यायालय के आदेश और प्रशासनिक पहल के बाद मंगलवार को मां की प्रतिमा की विसर्जन शोभायात्रा पारंपरिक मुख्य मार्ग से निकाली गई। इस दौरान सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे।
मोहम्मदपुर खाला थाना क्षेत्र के सर्जनपुर गांव में वर्ष 2012 के दौरान प्रतिमा विसर्जन शोभायात्रा के मुख्य मार्ग से गुजरने को लेकर विवाद की शुरुआत हुई थी। पड़ोसी ग्राम भट्टुवामऊ के निवासियों द्वारा इस रास्ते का विरोध किए जाने के बाद जिला प्रशासन ने वैकल्पिक मार्ग से यात्रा का संचालन शुरू करा दिया था। इसके पश्चात वर्ष 2017 में भी श्रद्धालुओं ने अपने स्तर पर मुख्य मार्ग से प्रतिमा ले जाने का प्रयास किया था, जिसे प्रशासन ने रोक दिया था और उस दौरान गतिरोध भी उत्पन्न हुआ था। तभी से हर वर्ष स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं को विसर्जन के लिए लंबे और संकरे वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करने के लिए विवश होना पड़ता था।
लंबी दूरी और अतिरिक्त जोखिम से मिली राहत
मुख्य मार्ग से गंगापुर घाट की कुल दूरी मात्र 400 मीटर के आसपास है, परंतु विवाद और प्रतिबंध के कारण श्रद्धालुओं को खेतों के बीच से गुजरने वाले संकरे वैकल्पिक रास्ते से लगभग दो किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती थी। संकरा रास्ता होने के कारण मार्ग पर हमेशा दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती थी, जिससे ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में असंतोष था। वे लगातार इस समस्या के स्थायी और न्यायसंगत समाधान की मांग कर रहे थे।
प्रशासनिक प्रयास और कानूनी प्रक्रिया
मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए उपजिलाधिकारी (एसडीएम) कार्तिकेय सिंह ने विभिन्न पक्षों के साथ कई दौर की बैठकें आयोजित कर विवाद के समाधान के लिए प्रयास किए। प्रशासनिक स्तर पर की गई पैरवी और उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में आखिरकार मुख्य मार्ग से शोभायात्रा का मार्ग प्रशस्त हुआ।
भारी सुरक्षा के बीच संपन्न हुआ विसर्जन
मंगलवार को निर्धारित प्रक्रिया के तहत मां की प्रतिमा को रथ पर आसीन कर पारंपरिक वाद्ययंत्रों और गाजे-बाजे के साथ शोभायात्रा रवाना की गई। यह यात्रा भट्टुवामऊ और बेलहरा क्षेत्रों से होते हुए गंगापुर घाट तक पहुंची, जहां विधि-विधान के साथ प्रतिमा का विसर्जन किया गया। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल, पीएसी और अर्धसैनिक बलों के जवानों को संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया था, जिनकी निगरानी में पूरी शोभायात्रा शांतिपूर्ण और सकुशल संपन्न हुई।