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विपक्ष की राजनीति पर श्याम सुंदर शरण का तीखा हमला, कहा- घूमती हुई रील बन गया है विपक्ष

विपक्ष की राजनीति पर श्याम सुंदर शरण का तीखा हमला, कहा- घूमती हुई रील बन गया है विपक्ष

बिहार की राजनीति में इन दिनों बयानों के तीर लगातार चल रहे हैं। इसी कड़ी में हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता श्याम सुंदर शरण ने विपक्ष पर एक तीखा और बेहद आक्रामक राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने मौजूदा समय के विपक्षी दलों की कार्यशैली को आड़े हाथों लेते हुए उन्हें 'मुद्दाविहीन' करार दिया है। शरण के इस बयान के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर से चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।

विशेषज्ञ बनने की चाह में हर मुद्दे से भाग रहा विपक्ष

श्याम सुंदर शरण ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि आज के समय में विपक्ष का हाल कुछ ऐसा हो गया है कि वह हर विषय पर खुद को विशेषज्ञ साबित करने की कोशिश तो करता है, लेकिन विडंबना यह है कि वह किसी एक भी गंभीर मुद्दे पर सप्ताह-दस दिन से ज्यादा टिक नहीं पाता है।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कभी-कभी ये नेता इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष पर वैश्विक मामलों के विशेषज्ञ बन जाते हैं, तो कभी ईरान-अमेरिका के कूटनीतिक रिश्तों पर बड़ी-बड़ी बातें करने लगते हैं। लेकिन जैसे ही उनके दावों और खोखली दलीलों की हकीकत जनता के सामने आती है और उनके झूठ की कलई खुलती है, वे उस मुद्दे को चुपचाप छोड़कर किसी नए और सनसनीखेज विषय की तलाश में निकल पड़ते हैं।

'क्या देश से खत्म हो गई हैं बुनियादी समस्याएं?'

प्रवक्ता ने सवालिया लहजे में कहा कि देश की जनता आज भी महंगाई, रोजगार और बुनियादी जरूरतों से जुड़ी समस्याओं से जूझ रही है, लेकिन विपक्ष के बयानों को देखकर ऐसा लगता है मानो देश में गैस, पेट्रोल और डीजल की सारी समस्याएं रातों-रात छूमंतर हो गई हों।

उन्होंने आर्थिक मुद्दों पर बोलते हुए कहा कि जब कभी जीडीपी के आंकड़ों में सुधार या उछाल आता है, तो अचानक से ये लोग बड़े-बड़े अर्थशास्त्री बनकर ज्ञान बांटने लगते हैं। कभी चीनी के दाम या किसी अन्य कमोडिटी का मुद्दा उछाला जाता है, लेकिन जैसे ही जमीनी तथ्य इनके दावों की पोल खोलते हैं, वे उस पुराने मुद्दे को छोड़कर एक नया शोर खड़ा करने में जुट जाते हैं.

तुष्टिकरण की दुकान बंद, अब नया 'टेंडर'?

श्याम सुंदर शरण ने कड़े शब्दों में आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष की पुरानी तुष्टिकरण की राजनीति की दुकान अब पूरी तरह से बंद हो चुकी है। जनता इन चालों को भली-भांति समझ चुकी है। यही वजह है कि अब इन्हें समाज को बांटने के लिए अगड़ा और पिछड़ा कराने का नया 'टेंडर' मिल गया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे दलों की निष्ठा किसी विचारधारा, जनहित की नीति या किसी स्थायी मुद्दे के साथ नहीं जुड़ी होती। इनका एकमात्र मकसद राजनीतिक अवसरवाद होता है। आज एक नैरेटिव, कल दूसरा और परसों तीसरा मुद्दा—जिधर भी इन्हें राजनीतिक मौका दिखाई देता है, पूरा विपक्ष उधर ही लुढ़क जाता है।

'बिना पेंदी की राजनीति और घूमती हुई रील'

अपने आक्रामक तेवर को जारी रखते हुए हम (सेक्युलर) के प्रवक्ता ने कहा कि सच तो यह है कि आज का विपक्ष किसी भी गंभीर वैचारिक संघर्ष का हिस्सा नहीं रहा, बल्कि यह सोशल मीडिया की 'घूमती हुई रील' बनकर रह गया है। हर कुछ दिनों में नया कंटेंट, नया एंगल और नया शोर—यही इनकी असल राजनीति बची है।

उन्होंने बिना पेंदी के लोटे जैसी राजनीति का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे ही सच सामने आने और झूठ की कलई खुलने का डर सताता है, ये लोग तुरंत वहां से किनारा कर लेते हैं और किसी दूसरी दिशा में नए झूठे वादों के साथ भाग खड़े होते हैं। जनता अब इनकी इन रणनीतियों को बहुत अच्छे से परख चुकी है और आने वाले समय में इसका उचित जवाब भी देगी।

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नसीम अहमद

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नसीम अहमद जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं। उन...

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