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भारत सरकार का बड़ा कदम, घरेलू स्तर पर बनेंगे 120 औद्योगिक उत्पाद

भारत सरकार का बड़ा कदम, घरेलू स्तर पर बनेंगे 120 औद्योगिक उत्पाद

विदेशी सप्लायर्स और आयात पर निर्भरता घटाने के लिए केंद्र सरकार ने एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत लगभग 120 ऐसे उत्पादों की पहचान की गई है जिनका घरेलू उत्पादन देश के भीतर ही बढ़ाया जाएगा।

नई दिल्ली के व्यावसायिक हलकों से मिली जानकारी के अनुसार, उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) इस पूरी कवायद को जमीनी स्तर पर आगे बढ़ा रहा है। चुने गए उत्पादों में विभिन्न प्रकार के औद्योगिक सामान, भारी मशीनरी और जरूरी कच्चे माल शामिल हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य देश की सप्लाई चेन को मजबूत करना और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आ रही बाधाओं के बीच घरेलू उद्योगों को आत्मनिर्भर बनाना है।

टनल बोरिंग मशीनों के उत्पादन पर जोर

इस योजना के तहत सबसे महत्वपूर्ण ध्यान टनल बोरिंग मशीनों का घरेलू उत्पादन शुरू करने पर है। चीन की ओर से इन मशीनों की सप्लाई पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद यह कदम सामरिक और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिहाज से बेहद अहम हो गया है। देश में बुनियादी ढांचे के विकास कार्यों में किसी तरह की रुकावट न आए, इसके लिए इन मशीनों को देश में ही तैयार करने की क्षमता जुटाई जा रही है।

घरेलू कंपनियों को मिलेंगी तीन बड़ी राहतें

सरकार केवल उत्पादों की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय कंपनियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले टिके रहने के लिए तीन प्रमुख उपायों पर विचार कर रही है:

  • शुरुआती सुरक्षा: कुछ चुने हुए उत्पादों को विदेशी सप्लायर्स, विशेषकर चीन से आने वाले सस्ते सामान की प्रतिस्पर्धा से अस्थायी सुरक्षा दी जा सकती है। इससे भारतीय कंपनियों को अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने और वैकल्पिक सप्लायर्स तैयार करने का पर्याप्त समय मिलेगा।
  • उत्पादन लागत में वित्तीय सहायता: जिन उत्पादों को भारत में विनिर्माण करना महंगा पड़ता है, उनके लिए पूंजीगत प्रोत्साहन या चरणबद्ध वित्तीय मदद दी जाएगी। कुछ मामलों में यह सहायता कंपनियों के कारोबार के पैमाने से भी जोड़ी जाएगी।
  • R&D में सहयोग: जिन उत्पादों को भारत में बनाने के लिए उन्नत तकनीक अभी उपलब्ध नहीं है, वहां सरकार रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) के लिए विशेष सहायता उपलब्ध कराने पर विचार कर रही है।

चीन पर निर्भरता घटाने की रणनीति

वैश्विक तनाव, पश्चिम एशिया संकट और कोविड-19 महामारी के दौरान सप्लाई चेन में आई रुकावटों ने आयात पर अत्यधिक निर्भरता के जोखिमों को उजागर किया था। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 15 वर्षों में भारत के औद्योगिक सामान के आयात में चीन की हिस्सेदारी 21 प्रतिशत से बढ़कर 30 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वर्तमान में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियां, सोलर मॉड्यूल, दवाओं के लिए एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स (API) और स्पेशियलिटी केमिकल्स जैसे क्षेत्रों में चीन की बड़ी भूमिका है। इन 120 उत्पादों के घरेलू स्तर पर तैयार होने से इस निर्भरता में कमी आने की उम्मीद है।

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काव्या त्रिपाठी

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Senior Editor

काव्या त्रिपाठी बिजनेस और टेक्नोलॉजी की जटिल दुनिया को सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती हैं। वे आर्थिक बदलाव, स्टार्टअप इकोसिस्...

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