Breaking
► छत्रपति संभाजीनगर-गोवा विमान सेवा 24 दिन में फिर बंद, इंडिगो के विंटर शेड्यूल में जगह नहीं ► मुर्गे का खून और टूटी चूड़ियां फैलाकर रचा मौत का नाटक, 21 दिन बाद मुंबई में मिली लापता महिला ► चंद्रपुर में किन्नर समुदाय के सशक्तीकरण के लिए विशेष कार्यशाला आयोजित ► यूपी-बिहार विधान परिषद चुनाव: 19 सीटों पर मतगणना जारी, विभिन्न केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा ► बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर मतगणना जारी, सीसीटीवी को लेकर हंगामा ► जेपीएससी मेधा घोटाला: सीआईडी ने 12 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में दाखिल की 97 पन्नों की चार्जशीट ► उत्तराखंड में जल्द बढ़ेगा पर्यावरण मित्रों का मानदेय: सीएम धामी का ऐलान ► रायबरेली: रामलीला मेले में जलपरी शो का बिना टिकट प्रवेश बना खूनी संघर्ष, जमकर चले लात-घूंसे ► मुंबई लोकल ठप: 200 से अधिक ट्रेनें रद्द, भांडुप में युवक की मौत और कांजुरमार्ग में सिग्नल फेल ► लोकायुक्त छापा: वाणिज्यिक कर अधिकारी के पास आय से ढाई गुना अधिक संपत्ति ► छत्रपति संभाजीनगर-गोवा विमान सेवा 24 दिन में फिर बंद, इंडिगो के विंटर शेड्यूल में जगह नहीं ► मुर्गे का खून और टूटी चूड़ियां फैलाकर रचा मौत का नाटक, 21 दिन बाद मुंबई में मिली लापता महिला ► चंद्रपुर में किन्नर समुदाय के सशक्तीकरण के लिए विशेष कार्यशाला आयोजित ► यूपी-बिहार विधान परिषद चुनाव: 19 सीटों पर मतगणना जारी, विभिन्न केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा ► बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर मतगणना जारी, सीसीटीवी को लेकर हंगामा ► जेपीएससी मेधा घोटाला: सीआईडी ने 12 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में दाखिल की 97 पन्नों की चार्जशीट ► उत्तराखंड में जल्द बढ़ेगा पर्यावरण मित्रों का मानदेय: सीएम धामी का ऐलान ► रायबरेली: रामलीला मेले में जलपरी शो का बिना टिकट प्रवेश बना खूनी संघर्ष, जमकर चले लात-घूंसे ► मुंबई लोकल ठप: 200 से अधिक ट्रेनें रद्द, भांडुप में युवक की मौत और कांजुरमार्ग में सिग्नल फेल ► लोकायुक्त छापा: वाणिज्यिक कर अधिकारी के पास आय से ढाई गुना अधिक संपत्ति

भारतीय शेयर बाजार में लगातार छठे दिन गिरावट, सेंसेक्स 396 अंक फिसला

भारतीय शेयर बाजार में लगातार छठे दिन गिरावट, सेंसेक्स 396 अंक फिसला

कमजोर वैश्विक संकेतों और मध्य पूर्व के तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में मंदी का रुख लगातार छठे कारोबारी दिन भी जारी रहा। मंगलवार को हफ्ते के दूसरे कारोबारी सत्र में प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए, जिसमें सेंसेक्स 396 अंक तक लुढ़क गया और निफ्टी में भी 100 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।

मंगलवार को बाजार की शुरुआत ही कमजोर संकेतों के साथ हुई थी। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 122.37 अंक यानी 0.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,484.38 के स्तर पर खुला। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी 44.40 अंक यानी 0.20 प्रतिशत कमजोर होकर 22,708.80 पर खुला। जैसे-जैसे कारोबार आगे बढ़ा, बिकवाली का दबाव बढ़ता गया और सेंसेक्स intraday कारोबार के दौरान 395.99 अंक की भारी गिरावट के साथ 73,210.76 के निचले स्तर तक चला गया। इसी तरह निफ्टी 50 भी फिसलकर 22,653.20 के स्तर पर आ गया। शेयर बाजार में पिछले छह सत्रों से लगातार गिरावट का यह दौर निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

व्यापक बाजार में रही राहत, मिडकैप और स्मॉलकैप चमके

प्रमुख सूचकांकों में भले ही कमजोरी देखने को मिली, लेकिन व्यापक बाजार (Broader Market) का रुख इसके विपरीत रहा। निवेशकों ने चुनिंदा मझोले और छोटे शेयरों में लिवाली दिखाई, जिससे मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में हरियाली छाई रही। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1.6 प्रतिशत की मजबूत तेजी दर्ज की गई, जबकि निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स भी 0.54 प्रतिशत चढ़कर बंद हुआ। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस रुख से साफ है कि बिकवाली का असर सभी शेयरों पर एक समान नहीं था, बल्कि बड़े शेयरों (Large Caps) से पैसा निकालकर निवेशकों ने अन्य सेगमेंट में मौके तलाशे।

सेक्टरवार कारोबार: आईटी और ऑयल एंड गैस पर दबाव, पीएसयू बैंकों में खरीदारी

कारोबार के दौरान सेक्टरवार प्रदर्शन मिला-जुला रहा। निफ्टी आईटी इंडेक्स में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई और यह 1 प्रतिशत से अधिक टूट गया। इसके अलावा निफ्टी सीमेंट में 0.98 प्रतिशत और निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स में 0.53 प्रतिशत की सुस्ती रही। इसके उलट, सरकारी बैंकों के शेयरों में निवेशकों ने भरोसा दिखाया। निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स 0.68 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। इसके साथ ही डिफेंसिव माने जाने वाले सेक्टर जैसे निफ्टी फार्मा में 0.44 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर इंडेक्स में 0.39 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।

कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बनी चुनौती

बाजार जानकारों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड का 114 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहना भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार के लिए एक बड़ी चुनौती है। महंगे कच्चे तेल से देश में आयात बिल बढ़ेगा, जिससे महंगाई और कंपनियों की परिचालन लागत पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसके अलावा, अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड का करीब 4.97 प्रतिशत के ऊंचे स्तर पर बने रहना भी विदेशी निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर रहा है, जिससे वे उभरते बाजारों से पूंजी निकाल रहे हैं। हालांकि, कंपनियों के दूसरी तिमाही के बेहतर नतीजों की उम्मीदों और घरेलू संस्थागत निवेशकों के समर्थन से बाजार को कुछ संबल जरूर मिल रहा है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी, घरेलू निवेशकों ने संभाला मोर्चा

संस्थागत निवेशकों के गतिविधियों पर नजर डालें तो विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बाजार में अपनी बिकवाली का सिलसिला जारी रखा है। आंकड़ों के अनुसार, एफआईआई ने पिछले कारोबारी सत्र में कुल 1,462 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने बाजार में लगातार दसवें कारोबारी सत्र में भी खरीदारी का रुख बनाए रखा और 2,609 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। घरेलू निवेशकों के इस निरंतर समर्थन के कारण बाजार को बड़ी गिरावट से कुछ हद तक सुरक्षा मिली है।

निफ्टी के लिए तकनीकी स्तर और आगे की चाल

तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, मौजूदा समय में निफ्टी 50 के लिए 22,630 का स्तर बेहद महत्वपूर्ण है। यदि सूचकांक इस अहम समर्थन स्तर के ऊपर खुद को बनाए रखने में कामयाब रहता है, तो निचले स्तरों से बाजार में मामूली रिकवरी देखने को मिल सकती है। आगे चलकर बाजार में तेजी लौटने पर 23,000 से 23,500 के स्तर को छूने का लक्ष्य रखा जा सकता है। हालांकि, यदि सूचकांक 22,630 के समर्थन को तोड़कर नीचे फिसलता है, तो यह लुढ़ककर 22,250 से 22,000 के दायरे में आ सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 22,800 से 22,900 के दायरे के बीच बाजार में उतार-चढ़ाव (Volatility) काफी बढ़ सकता है।

वैश्विक मोर्चे पर, सोमवार को अमेरिकी शेयर बाजार मजबूती के साथ बंद हुए थे, जहां एसएंडपी 500 में 0.7 प्रतिशत और नैस्डैक में 0.82 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी। हालांकि, एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुझान देखने को मिला। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा मुख्य रूप से मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक हालात, कच्चे तेल के दाम, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी रुख और कंपनियों के तिमाही परिणामों पर निर्भर करेगी। इसके अलावा साप्ताहिक और मासिक डेरिवेटिव अनुबंधों (Derivatives Expiry) की निकटता के कारण भी बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की पूरी संभावना है।

About the Author

काव्या त्रिपाठी

काव्या त्रिपाठी

Senior Editor

काव्या त्रिपाठी बिजनेस और टेक्नोलॉजी की जटिल दुनिया को सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती हैं। वे आर्थिक बदलाव, स्टार्टअप इकोसिस्...

Read More

ज़रूर पढ़ें (You May Also Like)

अगली खबर पढ़ें:

आगे पढ़ें →