अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के एशिया और प्रशांत विभाग के निदेशक कृष्णा श्रीनिवास ने कहा है कि पिछले साल रुपये के विनिमय दर के वर्गीकरण को 'स्थिर' (stabilised) से बदलकर 'क्रॉल-लाइक' (crawl-like) किए जाने के बाद से इसमें काफी अधिक लचीलापन आया है।
द इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक साक्षात्कार में श्रीनिवास ने कहा कि विनिमय दर को स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ने देना ज्यादा बेहतर है, क्योंकि एशियाई देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा बाजार में अत्यधिक हस्तक्षेप से कोई खास राहत नहीं मिली है। उन्होंने इस बातचीत के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के दौर में रोजगार सृजन, कौशल अंतराल (skills gap), चीन की आर्थिक स्थिति और भारत की राष्ट्रीय लेखा प्रणाली (National Accounts) जैसे अहम मुद्दों पर भी खुलकर चर्चा की।
विनिमय दर और आरबीआई की नीतियां
आईएमएफ और भारत के बीच विनिमय दर नीति को लेकर लंबे समय से चर्चाएं होती रही हैं। इस पर टिप्पणी करते हुए कृष्णा श्रीनिवास ने कहा कि भारत जैसे देश, जो ऊर्जा के बड़े आयातक हैं और बाहरी झटकों के संपर्क में रहते हैं, उनके लिए विनिमय दर को रक्षा की पहली पंक्ति (first line of defence) के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उनका सुझाव था कि विनिमय दर के स्वाभाविक उतार-चढ़ाव को रोकने के बजाय इसे संकेत देने वाले तंत्र के रूप में काम करने देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अत्यधिक और अव्यवस्थित हलचल की स्थिति में ही हस्तक्षेप पर विचार किया जाना चाहिए। वर्तमान स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में मुद्रा असंतुलन (currency mismatches) बहुत बड़े नहीं हैं और बाजार पर्याप्त रूप से गहरा (deep) है। जब उनसे पूछा गया कि क्या मौजूदा स्थिति 'क्रॉल-लाइक' व्यवस्था की परिभाषा पर खरी उतरती है, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय अधिकारियों ने रुपये को आगे बढ़ने की अनुमति दी है और इसमें निश्चित रूप से पहले की तुलना में अधिक लचीलापन आया है। हालांकि, इसका तकनीकी आकलन आईएमएफ की आर्टिकल IV परामर्श टीम द्वारा किया जाएगा।
एआई का प्रभाव और श्रम शक्ति का कौशल विकास
एशियाई क्षेत्र में विनिर्माण-आधारित (manufacturing) निर्यात मॉडल के जरिए नौकरियां पैदा करने की चुनौतियों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया भर में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के भीतर मध्यवर्ती वस्तुओं (intermediate goods) का भारी व्यापार होता है, लेकिन अंतिम उत्पादों के मामले में क्षेत्रीय व्यापार अभी भी मात्र 30 प्रतिशत है, जबकि यूरोपीय संघ और उत्तरी अमेरिका में यह 60 प्रतिशत है। ऐसे में क्षेत्रीय एकीकरण बढ़ाकर विनिर्माण गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सकता है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभाव पर आईएमएफ के शोध का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि चैटजीपीटी (ChatGPT) के लॉन्च के बाद से एआई के प्रति अधिक संवेदनशील क्षेत्रों में श्रम की मांग में लगभग 10 प्रतिशत की कमी आई है और अब यह स्थिर हो गई है। यह नौकरियों के पूरी तरह समाप्त होने के बजाय उनके स्वरूप में बदलाव (reshaping) को दर्शाता है।
श्रीनिवास ने इस बात पर जोर दिया कि केवल अधिक नौकरियां पैदा करना ही काफी नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि युवा भविष्य की जरूरतों के मुताबिक दक्ष हों। भारत के संदर्भ में उन्होंने अनुमान जताया कि वर्ष 2050 तक श्रम बल में शामिल होने वाले लोगों की संख्या 15 करोड़ से 30 करोड़ के बीच हो सकती है। कॉलेज से निकलने वाले युवाओं और बाजार की जरूरतों के बीच कौशल बेमेल (skills mismatch) को दूर करना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।
एशिया की जनसांख्यिकी और चीन की अर्थव्यवस्था
एशियाई देशों की जनसांख्यिकी लाभांश (demographic dividend) पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि एशिया को एक इकाई के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि इसके तीन अलग चरण हैं। नेपाल और फिलीपींस जैसे शुरुआती लाभांश वाले देश हैं जहां श्रम शक्ति युवा और बढ़ रही है; भारत और इंडोनेशिया जैसे बाद के लाभांश वाले देश हैं; तथा चीन और जापान जैसे लाभांश के बाद के चरण वाले देश हैं। यदि श्रम शक्ति का यह अंतर सुगमता से संभल जाए तो यह बड़ा आर्थिक संबल बन सकता है, बशर्ते कौशल का सही मिलान हो।
चीन की अर्थव्यवस्था के बारे में उन्होंने कहा कि चीन लंबे समय से निवेश और निर्यात-प्रेरित विकास पर निर्भर रहा है, जिसे अब घरेलू उपभोग मांग (consumption demand) की ओर संतुलित करने की आवश्यकता है। आईएमएफ के अनुमान के मुताबिक चीन की लंबी अवधि की वृद्धि दर 3.5 प्रतिशत है। यदि चीन उपभोग पर ध्यान केंद्रित करता है, तो उसकी वृद्धि अधिक मजबूत और टिकाऊ होगी, जिसका असर उभरते बाजारों पर भी सकारात्मक रूप से पड़ेगा।
भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आंकड़े
साक्षात्कार के अंत में भारत के राष्ट्रीय लेखा आंकड़ों और जीडीपी संशोधनों पर बात करते हुए श्रीनिवास ने कहा कि हालिया संशोधन मोटे तौर पर उन सिफारिशों को दर्शाते हैं जो आईएमएफ द्वारा समय-समय पर दी गई हैं। हालांकि, इन आंकड़ों को दी जाने वाली ग्रेडिंग पर उन्होंने कहा कि इसका समग्र मूल्यांकन आईएमएफ की आर्टिकल IV टीम ही करेगी।