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एचडीएफसी बैंक के नए सीईओ की रेस में कैजाद भरुचा सबसे आगे, बाहरी उम्मीदवार पर भी विचार

एचडीएफसी बैंक के नए सीईओ की रेस में कैजाद भरुचा सबसे आगे, बाहरी उम्मीदवार पर भी विचार

देश के सबसे बड़े प्राइवेट सेक्टर बैंक यानी एचडीएफसी बैंक के अगले मुखिया को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। बैंक के भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर उत्तराधिकार की प्रक्रिया को लेकर चर्चाएं गर्म हैं। वर्तमान मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक शशिधर जगदीशन का कार्यकाल इसी साल अक्टूबर में समाप्त हो रहा है। उनके दूसरे कार्यकाल के पूरा होने के बाद बैंक की कमान किसके हाथ में जाएगी, इसे लेकर वित्तीय गलियारों में अटकलों का दौर शुरू हो चुका है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बैंक के भीतर डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर कैजाद भरुचा इस पद के लिए सबसे मजबूत आंतरिक विकल्पों में गिने जा रहे हैं।

आरबीआई के नियमों के तहत होगी पैनल की प्रक्रिया

भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, किसी भी बैंक को अपने शीर्ष पद यानी सीईओ के लिए नामों का एक पैनल भेजना होता है, जिसमें एक से अधिक विकल्प शामिल होने अनिवार्य हैं। इसी नियम का पालन करते हुए एचडीएफसी बैंक आंतरिक चेहरे के साथ-साथ किसी बाहरी उम्मीदवार की भी तलाश कर रहा है। हालांकि, इस पूरे मामले पर बैंक या कैजाद भरुचा की ओर से कार्यालय समय के बाद आई ईमेल प्रतिक्रियाओं पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं मिल सकी है।

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पिछले कुछ महीनों से बैंक के भीतर नेतृत्व के मोर्चे पर कई तरह की उथल-पुथल देखने को मिली है। बैंक ने हाल ही में आधिकारिक घोषणा करते हुए यह स्पष्ट किया कि अक्टूबर 2020 से बैंक की बागडोर संभाल रहे शशिधर जगदीशन ने खुद को पुनर्नियुक्ति की दौड़ से अलग रखने का फैसला किया है। बैंक अब उनके उत्तराधिकारी की नियुक्ति प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है।

कैजाद भरुचा की मजबूत दावेदारी की वजह

बैंक के भीतर जिन नामों पर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, उनमें कैजाद भरुचा सबसे आगे हैं। भरुचा बैंक के एक बेहद अनुभवी और लंबे समय से जुड़े कार्यकारी हैं, जो वर्तमान में बैंक के खुदरा (रिटेल) और थोक (होलसेल) दोनों कारोबारों की कमान संभाल रहे हैं।

  • लंबा अनुभव: भरुचा बैंक के साथ लंबे अरसे से जुड़े हैं और वित्तीय बाजार की गहरी समझ रखते हैं।
  • आरबीआई के नियम: नियमों के अनुसार, पूर्णकालिक निदेशक के रूप में अधिकतम 15 साल तक का कार्यकाल हो सकता है। भरुचा 2029 तक रिटायर नहीं होने वाले हैं, जिससे वह इस पद की पात्रता की कसौटी पर पूरी तरह खरे उतरते हैं।
  • कारोबार की समझ: बैंक के दो सबसे बड़े वर्टिकल (रिटेल और होलसेल) संभालने के कारण उन्हें बैंक की नब्ज का अच्छी तरह पता है।

नेतृत्व परिवर्तन और हालिया चुनौतियां

पिछले कुछ महीनों में एचडीएफसी बैंक को कुछ आंतरिक और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इसी साल मार्च के महीने में तत्कालीन चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने यह कहते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था कि बैंक की कुछ कार्यप्रणालियां उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुकूल नहीं हैं। हालांकि, बाद में एक बाहरी कानूनी समीक्षा में चक्रवर्ती की ओर से उठाए गए गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों का कोई ठोस आधार नहीं पाया गया था।

इसके अलावा, पिछले महीने बैंक के बोर्ड ने एक अन्य मामले में, जो कि बड़े डिपॉजिट्स की प्राइसिंग से जुड़ा हुआ था, जगदीशन समेत तीन अन्य लोगों पर पेनल्टी भी लगाई थी। इन तमाम घटनाओं का असर बैंक के शेयरों पर भी देखने को मिला है। निवेशकों की चिंताएं तब और बढ़ गईं जब मार्च के बाद से शेयर की चाल में सुस्ती देखी गई।

साल 2023 के बड़े विलय के बाद का परिदृश्य

गौरतलब है कि साल 2023 में तत्कालीन पैरेंट कंपनी एचडीएफसी लिमिटेड का एचडीएफसी बैंक में एक बड़ा विलय हुआ था, जिसकी देखरेख शशिधर जगदीशन ने ही की थी। हालांकि, निवेशकों ने इस मेगा मर्जर के बाद अपेक्षित वित्तीय लाभ और ग्रोथ को लेकर कई बार चिंताएं जाहिर की हैं। यही वजह है कि आने वाले समय में नए सीईओ के सामने निवेशकों का भरोसा दोबारा कायम करना और बैंक की ग्रोथ को एक नई गति देना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

फिलहाल, आरबीआई की अंतिम मुहर किसके नाम पर लगती है और क्या बैंक किसी बाहरी दिग्गज को चुनता है या अपने पुराने वफादार कैजाद भरुचा पर दांव लगाता है, इस पर निवेशकों और बाजार के जानकारों की पैनी नजर बनी हुई है। आगामी हफ्तों में इस उत्तराधिकार की रेस से जुड़ी कई और अहम तस्वीरें साफ होने की उम्मीद है।

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काव्या त्रिपाठी

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Senior Editor

काव्या त्रिपाठी बिजनेस और टेक्नोलॉजी की जटिल दुनिया को सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती हैं। वे आर्थिक बदलाव, स्टार्टअप इकोसिस्...

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