अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया के हालात का सीधा असर अब भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ना शुरू हो चुका है। देश की प्रमुख निजी ईंधन खुदरा विक्रेता कंपनी नायरा एनर्जी (Nayara Energy) ने शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 से अपने पेट्रोल और डीजल के दामों में बड़ा इजाफा कर दिया है। इस अचानक हुई बढ़ोतरी के बाद वाहन चालकों के लिए ईंधन का खर्च काफी बढ़ गया है।
नायरा एनर्जी ने कितने बढ़ाए दाम?
कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, पेट्रोल के दाम में सीधे तौर पर 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल के दाम में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। देश भर में 7,100 से अधिक पेट्रोल पंपों का संचालन करने वाली इस निजी कंपनी ने वैश्विक ऊर्जा कीमतों (Global Crude Oil Prices) में आई तेज उछाल और सप्लाई चेन पर लगातार बन रहे दबाव का हवाला देते हुए यह कदम उठाया है। नई दरें शनिवार सुबह से ही कंपनी के सभी आउटलेट्स पर लागू हो चुकी हैं।
इससे पहले इसी साल मार्च के महीने में भी ईरान और मिडिल ईस्ट में उपजे तनाव के दौरान नायरा एनर्जी ने कीमतों में बढ़ोतरी की थी। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिति सामान्य होने के बाद जुलाई के महीने में उन बढ़ी हुई कीमतों को वापस ले लिया गया था, लेकिन एक बार फिर वैश्विक मोर्चे पर सुलगती आग ने भारतीय ईंधन बाजार को प्रभावित कर दिया है।
क्या सरकारी तेल कंपनियों के पंपों पर भी महंगे हुए दाम?
यह सवाल इस समय हर वाहन चालक के मन में है। राहत की बात यह है कि यह ताजा मूल्य वृद्धि फिलहाल केवल नायरा एनर्जी के पेट्रोल पंपों पर ही लागू हुई है। देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियों (IOCL, BPCL, और HPCL) के पंपों पर फिलहाल पुरानी दरें ही बनी हुई हैं। हालांकि, जानकारों का मानना है कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का यह सिलसिला थमता नहीं है, तो आने वाले दिनों में पूरा ईंधन बाजार इसकी चपेट में आ सकता है।
डीजल की बिक्री सीमित करने पर सरकार की कड़ी नजर
पिछले कुछ दिनों से देश के विभिन्न हिस्सों से ऐसी खबरें सामने आ रही थीं कि जियो-बीपी (Jio-bp) और नायरा एनर्जी जैसे निजी खुदरा विक्रेता अपने कुछ चुनिंदा पंपों पर प्रति ग्राहक डीजल की दैनिक बिक्री पर 50 से 200 लीटर तक की सीमा (रारिशनिंग या कैपिंग) लगा रहे हैं। इस मामले ने तूल पकड़ा तो सरकार ने इस पर बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है।
पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए दो टूक कहा है कि देश में डीजल की बिक्री को सीमित करने की अनुमति किसी भी कंपनी को नहीं दी जा सकती। सरकार इस तरह की किसी भी प्रकार की पाबंदी या कोटा प्रणाली को कतई स्वीकार नहीं करेगी।
क्यों पैदा हुई यह अजीब स्थिति?
विश्लेषकों का मानना है कि बाजार में इस तरह की पाबंदियों और भारी मांग-आपूर्ति असंतुलन के पीछे एक बड़ा कारण थोक (Bulk) और खुदरा (Retail) डीजल की कीमतों के बीच का भारी अंतर है। वर्तमान स्थिति यह है कि डीजल की थोक और खुदरा कीमतों में लगभग 50 रुपये प्रति लीटर का बड़ा अंतर देखा जा रहा है।
इस भारी-भरकम अंतर के चलते देश की बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियां, टेलीकॉम कंपनियां, होटल और अस्पताल थोक में महंगा ईंधन खरीदने के बजाय आम पेट्रोल पंपों का रुख कर रहे हैं। वे पेट्रोल पंपों से 400 से 600 लीटर तक सस्ता डीजल खरीद रहे हैं, जिससे सामान्य खुदरा आउटलेट्स के सीमित स्टॉक पर अचानक भारी दबाव आ गया है और ईंधन प्रबंधन को लेकर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
आम जनता के लिए क्या है सलाह?
यदि आप रोजाना आवागमन के लिए नायरा एनर्जी या जियो-बीपी के पेट्रोल पंपों का इस्तेमाल करते हैं, तो अपनी गाड़ी में फ्यूल डलवाने से पहले अपने यात्रा के बजट को थोड़ा री-चेक जरूर कर लें। हालांकि सरकारी पंपों पर राहत बरकरार है, लेकिन वैश्विक उथल-पुथल जिस प्रकार से बढ़ रही है, उसे देखते हुए ईंधन बाजार पर लगातार नजर बनाए रखना बेहद जरूरी हो गया है।