छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां कानून के रखवालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सीतापुर थाना क्षेत्र में एक ग्राहक सेवा केंद्र (CSC) को चोरों ने महज दो महीनों के भीतर दो बार अपना निशाना बनाया। हैरानी की बात यह है कि चोरों ने न सिर्फ लाखों की नगदी पर हाथ साफ किया, बल्कि पूरी वारदात दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में भी कैद हो गई। इसके बावजूद स्थानीय पुलिस अब तक मुख्य आरोपियों तक नहीं पहुंच पाई है। पीड़ित संचालक ने न्याय की गुहार लगाते हुए सीधे वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) का दरवाजा खटखटाया है।
दो महीने के भीतर दो बार बड़ी वारदात
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सीतापुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम भंवरडांड़ निवासी सत्यनारायण कुशवाहा, जो स्व. गणेश कुशवाहा के पुत्र हैं, अपने गांव में ही भारतीय स्टेट बैंक का ग्राहक सेवा केंद्र संचालित करते हैं। इस केंद्र के जरिए वे स्थानीय ग्रामीणों को बैंकिंग सेवाएं मुहैया कराते हैं। लेकिन पिछले कुछ महीनों से उनकी यह आजीविका अपराधियों के निशाने पर आ गई है।
पीड़ित संचालक सत्यनारायण का कहना है कि सुरक्षा के तमाम इंतजामों के बाद भी उनके केंद्र को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। सबसे पहले जुलाई के महीने में उनकी दुकान पर हमला करने और लूटपाट का प्रयास किया गया था, जिसमें उनकी आंखों में मिर्च पाउडर झोंक दिया गया था। इसके बाद अपराधियों ने सुनियोजित तरीके से दो बड़ी चोरियों को अंजाम दिया।
घटनाक्रम के विवरण के अनुसार:
- 11 जुलाई 2026: अज्ञात चोरों ने ग्राहक सेवा केंद्र के शटर का ताला तोड़कर गल्ले में रखे 4 लाख 32 हजार रुपए नकद पार कर दिए।
- 11 अगस्त 2026: ठीक एक महीने बाद चोरों ने एक बार फिर उसी केंद्र को दोबारा अपना निशाना बनाया। इस बार शटर का ताला तोड़कर 9 हजार रुपए नकद और लगभग 10 हजार रुपए मूल्य का किराना सामान चुरा लिया गया।
इस तरह कुल मिलाकर चोरों ने करीब 4 लाख 51 हजार रुपए से अधिक की संपत्ति पर हाथ साफ कर दिया है। लगातार हो रही इन वारदातों से पीड़ित संचालक मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुका है और उसकी आर्थिक स्थिति भी चरमरा गई है।
सीसीटीवी फुटेज में कैद हुए चेहरे, फिर भी पुलिस खाली हाथ
किसी भी अपराध की जांच में सीसीटीवी फुटेज को सबसे बड़ा सबूत माना जाता है। इस मामले में भी पीड़ित ने पुलिस को पुख्ता डिजिटल सबूत सौंपे हैं। 11 अगस्त की अलसुबह रिकॉर्ड हुए सीसीटीवी फुटेज में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि किस प्रकार तीन अज्ञात युवक अपना चेहरा ढककर दुकान के पास पहुंचते हैं।
फुटेज में यह भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि तीनों ने मिलकर पहले काफी मशक्कत के बाद शटर का ताला तोड़ा। इसके बाद सिर पर केसरिया रंग का गमछा डाले हुए एक युवक शटर के नीचे से रेंगते हुए दुकान के अंदर दाखिल होता है। चोरी की इस पूरी वारदात को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर आसानी से फरार हो जाते हैं। इतने साफ सुबूत और फुटेज हाथ में होने के बावजूद सीतापुर थाने की पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं।
स्थानीय युवक पर जताया जा रहा है गहरा शक
पीड़ित संचालक सत्यनारायण कुशवाहा ने पुलिस को अपनी आशंका से भी अवगत कराया है। उनका सीधा आरोप है कि इस पूरी घटना के पीछे उनके ही गांव का एक युवक और उसके दो अन्य साथी शामिल हैं। पीड़ित ने गांव के ही रहने वाले दीपक कुशवाहा (पिता अनिरुद्ध कुशवाहा) पर शक जताया है।
पीड़ित का दावा है कि संदिग्ध दीपक कुशवाहा दाएं पैर से दिव्यांग है और जब वह चलता है तो उसकी चाल में अंतर साफ झलकता है। यही नहीं, दुकान के सीसीटीवी फुटेज में जो व्यक्ति अंदर घुसते और हरकतें करते हुए दिख रहा है, उसकी शारीरिक बनावट और चाल-ढाल इस संदिग्ध से काफी हद तक मेल खाती है। इसके बावजूद सीतापुर पुलिस इस थ्योरी को खारिज कर रही है और उसका कहना है कि फुटेज में दिखने वाला व्यक्ति वह संदिग्ध नहीं है।
संचालक ने एक और चौंकान वाला दावा किया है कि संदिग्ध दीपक कुशवाहा की पत्नी बार-बार उनके फोन पर कॉल करती है और चोरी के संबंध में अलग-अलग तरह से पूछताछ करती है, जिससे उनका शक और अधिक गहरा गया है.
एसएसपी के पास पहुंचा मामला, कार्रवाई का आश्वासन
स्थानीय थाने की पुलिस की सुस्त और उदासीन कार्यप्रणाली से तंग आकर पीड़ित संचालक ने अब सरगुजा जिले के एसएसपी के समक्ष गुहार लगाई है। उसने एसएसपी को पूरी घटनाक्रम की लिखित शिकायत सौंपी है और मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
पीड़ित का कहना है कि यदि पुलिस ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, तो अपराधियों के हौसले और अधिक बुलंद हो जाएंगे और वे किसी अन्य संस्थान को भी निशाना बना सकते हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने पीड़ित को उचित जांच और जल्द से जल्द आरोपियों को गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया है। अब देखना यह होगा कि इस मामले में पुलिस प्रशासन कब तक आरोपियों को शिकंजे में कस पाता है।