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नागांव उपचुनाव से पहले पूर्व DC के BJP में शामिल होने से गरमाई सियासत

नागांव उपचुनाव से पहले पूर्व DC के BJP में शामिल होने से गरमाई सियासत

असम की राजनीति में इस समय भूचाल आया हुआ है। आगामी 6 अक्टूबर 2026 को होने वाले नागांव लोकसभा उपचुनाव से ठीक पहले एक ऐसा सियासी घटनाक्रम सामने आया है, जिसने राज्य के प्रशासनिक गलियारों से लेकर राजनीतिक मंचों तक हलचल तेज कर दी है। नागांव के पूर्व जिला आयुक्त (DC) और पूर्व आईएएस अधिकारी देबाशीष शर्मा ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। उनके इस कदम के बाद से ही चुनावी निष्पक्षता और प्रशासनिक भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मामले को लेकर सीधे तौर पर चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

प्रशासनिक कुर्सी से सियासी मैदान तक का सफर

किसी भी प्रशासनिक अधिकारी का अचानक से नौकरी छोड़कर मुख्यधारा की राजनीति में आना और तुरंत किसी राजनीतिक दल का हिस्सा बन जाना हमेशा से चर्चा का विषय रहा है। देबाशीष शर्मा के मामले में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। नागांव लोकसभा सीट पर होने जा रहा यह उपचुनाव बेहद दिलचस्प मोड़ पर आ गया है। यह सीट कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी, जिन्होंने विधानसभा चुनाव से पहले पाला बदलते हुए बीजेपी का दामन थाम लिया था। बोरदोलोई इस क्षेत्र से दो बार सांसद रह चुके हैं, ऐसे में बीजेपी के लिए इस सीट पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखना नाक का सवाल बन गया है।

पार्टी में देबाशीष शर्मा के प्रवेश का जोरदार स्वागत किया गया है। असम बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने उनका स्वागत करते हुए कहा कि उनके आने से संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूती मिलेगी। पार्टी का मानना है कि शर्मा के पास लंबा प्रशासनिक अनुभव है, जिसका लाभ सामाजिक सेवा और सांस्कृतिक क्षेत्रों में पार्टी के विस्तार के लिए उठाया जा सकता है। हालांकि, पार्टी नेताओं का यह भी कहना है कि शर्मा ने पार्टी में शामिल होते समय किसी भी प्रकार की टिकट की मांग नहीं रखी थी, लेकिन यदि स्थानीय जनता या पार्टी कार्यकर्ता उनके नाम पर मुहर लगाते हैं, तो केंद्रीय और प्रांतीय नेतृत्व इस पर विचार कर सकता है।

कांग्रेस ने उठाए तीखे सवाल और की चुनाव आयोग से शिकायत

देबाशीष शर्मा के बीजेपी में शामिल होने के तुरंत बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस हमलावर मुद्रा में आ गई है। असम कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चुनाव आयोग के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। कांग्रेस का आरोप है कि एक प्रशासनिक पद पर रहते हुए इस तरह के राजनीतिक समीकरण तैयार करना चुनावी निष्पक्षता के सरासर खिलाफ है।

असम कांग्रेस के उपाध्यक्ष आरपी शर्मा ने मीडिया में आई उन रिपोर्ट्स का हवाला दिया जिनमें यह दावा किया जा रहा था कि देबाशीष शर्मा को काफी समय से चुनावी राजनीति में आने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा था। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि जब कोई अधिकारी हाल ही तक जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक पद (DEO) पर तैनात रहा हो और तुरंत बाद सत्ताधारी दल में शामिल हो जाए, तो आम जनता के मन में चुनाव की निष्पक्षता को लेकर संदेह पैदा होना स्वाभाविक है।

वित्तीय अनियमितताओं और फैसलों की समीक्षा की मांग

विवाद केवल राजनीतिक प्रवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान लिए गए फैसलों पर भी सवाल उठ रहे हैं। धुबरी से कांग्रेस सांसद रकीबुल हुसैन ने इस मामले में आक्रामक रुख अपनाते हुए 4 सितंबर को ही चुनाव आयोग को एक विस्तृत पत्र भेजा था। इस पत्र में उन्होंने 26 अगस्त से लेकर 4 सितंबर के बीच दी गई कई शिकायतों का हवाला दिया और शर्मा की प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए।

  • निर्दलीय और निष्पक्ष जांच की मांग: कांग्रेस ने मांग की है कि जब तक इस पूरे मामले की गहन जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक पूर्व डीसी से जुड़े सभी प्रशासनिक फैसलों और निर्देशों की समीक्षा की जानी चाहिए।
  • वित्तीय मामलों पर सवाल: 15वें वित्त आयोग के तहत जारी की गई धनराशि और उसके कथित इस्तेमाल को लेकर भी वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं, जिनकी जांच के साथ एफआईआर दर्ज करने की मांग उठी है।
  • नामांकन पर आपत्ति: विपक्षी दल का यह भी कहना है कि चुनाव आयोग को इस बात की बारीकी से जांच करनी चाहिए कि क्या एक पूर्व आईएएस अधिकारी को इस प्रकार से तुरंत चुनावी मैदान में उतरने की अनुमति दी जानी चाहिए।

आगे की चुनावी चाल और राजनीतिक समीकरण

फिलहाल असम की राजनीति का यह एपिसेंटर नागांव बन चुका है। 6 अक्टूबर को होने वाले मतदान के लिए जहां सभी दल अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं, वहीं इस प्रशासनिक-राजनीतिक विवाद ने चुनाव आयोग की भूमिका को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। जनता की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या चुनाव आयोग कांग्रेस की इन शिकायतों पर कोई सख्त कदम उठाता है या फिर बीजेपी देबाशीष शर्मा को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर चुनावी दंगल को और रोमांचक बनाती है।

तारीखों के लिहाज से देखें तो 6 अक्टूबर को असम के मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, और चुनावी किस्मत का फैसला ईवीएम में बंद हो जाएगा। इसके बाद सभी की निगाहें 9 अक्टूबर पर टिकी होंगी, जिस दिन वोटों की गिनती के साथ यह साफ हो जाएगा कि नागांव की जनता ने इस सियासी और प्रशासनिक उथल-पुथल के बीच किसके सिर पर जीत का ताज पहनाया है।

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अनुराधा दुबे

अनुराधा दुबे

Content Writer (देश खबरें)

अनुराधा दुबे एक समर्पित और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जो भारत से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत खबरों को गहराई से समझकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। उन...

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