बिहार के दरभंगा जिले से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां कानून और प्रशासन की धज्जियां उड़ाते हुए एक उग्र भीड़ ने अवैध शराब के खिलाफ छापेमारी करने गई पुलिस टीम पर जानलेवा हमला कर दिया। हालात इतने बेक़ाबू हो गए कि आरोपियों ने पुलिस के वाहन को ट्रैक्टर और जेसीबी से चारों तरफ से घेर लिया और जमकर तोड़फोड़ की। इस बड़ी घटना के बाद पूरे इलाके में पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है और ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए अब तक कुल 10 उपद्रवियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
कमतौल के एसडीपीओ ने दी आधिकारिक जानकारी
इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तार से रोशनी डालते हुए कमतौल के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) सुरेंद्र कुमार सुमन ने मीडिया को आधिकारिक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पुलिस कर्मियों पर हमला करने, उनके सरकारी कार्य में सीधे तौर पर बाधा डालने और पुलिस वाहन को बुरी तरह क्षतिग्रस्त करने के आरोप में कुल 10 लोगों को दबोचा गया है।
एसडीपीओ सुरेंद्र कुमार सुमन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कानून को अपने हाथ में लेने का दुस्साहस करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस बल पर हमला करने वाले अन्य सभी उपद्रवियों की पहचान की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा रही है ताकि जल्द से जल्द उन्हें भी सलाखों के पीछे भेजा जा सके।
देसी शराब बरामदगी के बाद शुरू हुआ था बवाल
मिली जानकारी के मुताबिक, पूरी घटना दरभंगा जिले के रैयाम थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बंसरा ठीकरा टोल की है। स्थानीय पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि इस इलाके में अवैध रूप से देसी शराब का कारोबार चल रहा है। इसी सूचना के आधार पर पुलिस ने एक विशेष छापेमारी दल का गठन किया और तय ठिकाने पर दबिश दी।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में अवैध देसी शराब बरामद की। इस बरामदगी के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके से एक व्यक्ति को अपनी हिरासत में ले लिया। लेकिन मामला तब पूरी तरह बिगड़ गया जब हिरासत में लिए गए उसी शख्स को जबरन छुड़ाने के लिए स्थानीय लोगों की एक आक्रोशित भीड़ सड़क पर उतर आई।
जेसीबी और ट्रैक्टर से घेरा गया पुलिस वाहन
प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, भीड़ का गुस्सा इस कदर सातवें आसमान पर था कि उन्होंने नियमों और खाकी के खौफ को दरकिनार कर दिया। आरोपियों ने ट्रैक्टर और भारी-भरकम जेसीबी मशीनों का इस्तेमाल करके पुलिस के वाहन को चारों तरफ से घेर लिया, ताकि पुलिसकर्मी वहां से निकल न सकें।
इसी बीच, उग्र भीड़ ने पुलिस टीम के साथ हाथापाई, धक्का-मुक्की और मारपीट शुरू कर दी। इस दौरान सरकारी वाहन को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया गया, जिससे पुलिसकर्मियों को भी अपनी जान बचाने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी। कानून के रखवालों पर इस तरह का सीधा हमला इलाके में चर्चा का विषय बन गया है।
फरार और अन्य संलिप्त उपद्रवियों की पहचान जारी
प्रशासन ने इस गंभीर घटना को बेहद सख्ती से लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे बवाल के दौरान मौके पर मौजूद हर एक चेहरे की पहचान की जा रही है। इसके लिए पुलिस विभाग आधुनिक तकनीक और वीडियो फुटेज की मदद ले रहा है।
- जांच के प्रमुख बिंदु:
- घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल वीडियो की जांच।
- जेसीबी और ट्रैक्टर मालिकों की संलिप्तता की गहन पड़ताल।
- मुख्य साजिशकर्ताओं और भीड़ को उकसाने वालों की तलाश।
इन तमाम तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अन्य उपद्रवियों की पहचान की जा रही है और उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस का खुफिया तंत्र भी पूरी तरह सक्रिय हो गया है।
कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों पर पुलिस का कड़ा एक्शन
इस सनसनीखेज घटना के बाद से पूरे इलाके में पुलिस की गश्त और सख्ती काफी बढ़ा दी गई है। जिला प्रशासन ने कड़ा संदेश दिया है कि अवैध शराब के खिलाफ चल रहा यह विशेष अभियान भविष्य में और अधिक आक्रामक तरीके से जारी रहेगा।
बिहार में शराबबंदी कानून लागू होने के बाद से पुलिस लगातार अवैध शराब के धंधेबाजों के खिलाफ अभियान चलाती रही है, लेकिन इस तरह की घटनाएं प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करती हैं। हालांकि, दरभंगा पुलिस के इस त्वरित एक्शन ने यह साफ कर दिया है कि खाकी पर हाथ उठाने वालों को कानून के कटघरे में खड़ा करने में प्रशासन कोई ढिलाई नहीं बरतेगा। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़ी गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है।