उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में प्रकृति का कहर लगातार जारी है। ताजा मामला पौड़ी गढ़वाल जिले से सामने आया है, जहां पाबौ बाजार पर एक बड़ा और गंभीर संकट मंडरा रहा है। बाजार क्षेत्र में लगातार हो रहे भूस्खलन (Landslide) ने यहां के दुकानदारों और भवन स्वामियों की नींद उड़ा दी है। बरसात के मौसम में पहाड़ी का दरकना और लगातार नीचे आ रहा मलबा किसी बड़े हादसे का संकेत दे रहा है। स्थिति की नजाकत को भांपते हुए अब शासन-प्रशासन हरकत में आ गया है और कई विभागों की एक संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया है।
पहाड़ी से गिरते पत्थरों ने बढ़ाई दहशत
पाबौ बाजार के स्थानीय लोगों और दुकानदारों का कहना है कि बारिश के दिनों में स्थिति बद से बदतर हो जाती है। पहाड़ी का ऊपरी हिस्सा लगातार कमजोर हो रहा है, जिसके चलते भारी-भरकम पत्थर और मलबा सीधे दुकानों और मकानों की छतों और दीवारों पर आ गिर रहा है। इस निरंतर हो रहे भूस्खलन के कारण कई इमारतों की नींव तक हिल चुकी है। स्थानीय निवासियों का साफ कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यहां कभी भी कोई बड़ा जानमाल का नुकसान हो सकता है.
इस गंभीर खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों को मैदान में उतारा है। भूगर्भीय विभाग, जिला प्रशासन, राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) और लोक निर्माण विभाग (PWD) की एक उच्चस्तरीय संयुक्त टीम ने गुरुवार को प्रभावित क्षेत्र का पाक्षिक दौरा किया और जमीनी हकीकत को परखा।
संयुक्त टीम ने किया चप्पे-चप्पे का मुआयना
मौके पर पहुंची संयुक्त टीम ने पाबौ बाजार की उस पहाड़ी का बारीकी से निरीक्षण किया जहां से भूस्खलन की शुरुआत हो रही है। टीम ने उन दुकानों और मकानों का भी मुआयना किया जो इस आपदा की चपेट में आ चुके हैं और जिन्हें सबसे ज्यादा खतरा है। सड़क मार्ग से लेकर पहाड़ी के ढलान तक हर एक हिस्से की तकनीकी बारीकियों को अधिकारियों ने नोट किया।
इस निरीक्षण अभियान में शासन और प्रशासन के कई दिग्गज अधिकारी और स्थानीय प्रतिनिधि शामिल रहे। लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) पाबौ के अधिशासी अभियंता शिवम मित्तल, सहायक अभियंता अनिल कुमार, भूगर्भीय अधिकारी नीरजा मिश्रा और नायब तहसीलदार संजय सिंह नेगी ने पूरी स्थिति का जायजा लिया। इनके साथ कानूनगो प्रताप सिंह, अंकित तोमर, संतोष बिष्ट, जिला पंचायत सदस्य कर्मवीर भंडारी, व्यापारी मनोज रावत, प्रवीण कोठियाल, नित्यानंद कोठियाल और एसएन जन कल्याण सामाजिक समिति के सचिव संजय नौटियाल सहित कई स्थानीय गणमान्य लोग मौजूद रहे।
अस्थायी नहीं, स्थायी समाधान चाहती है जनता
प्रभावित क्षेत्र के एक प्रमुख दुकान और भूमि स्वामी नित्यानंद कोठियाल ने प्रशासन के सामने दो टूक बात रखी है। उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि इस संकट से निपटने के लिए केवल लीपापोती या अस्थायी व्यवस्थाएं करने से काम नहीं चलेगा।
"प्रशासन को केवल खानापूर्ति करने से बचना होगा। पहाड़ी के खिसकने की रफ्तार को रोकने के लिए यहां मजबूत सुरक्षा दीवार (Retaining Wall) और अन्य वैज्ञानिक एवं स्थायी उपाय तत्काल प्रभाव से लागू किए जाने चाहिए, अन्यथा आने वाले दिनों में स्थिति संभालना नामुमकिन हो जाएगा।"
व्यापारी संघ और स्थानीय नागरिकों का भी यही सुर है। उनका कहना है कि हर साल बरसात के समय उन्हें डर के साए में दिन गुजारने पड़ते हैं। व्यापारिक गतिविधियां तो प्रभावित हो ही रही हैं, साथ ही लोगों की जान पर भी हर वक्त तलवार लटकी रहती है।
आगे की क्या है प्रशासनिक योजना?
संयुक्त टीम के अधिकारियों ने मौके पर मौजूद जनता को आश्वस्त किया है कि उनकी चिंताओं को पूरी गंभीरता से लिया जा रहा है। भूगर्भीय विशेषज्ञों द्वारा जुटाई गई रिपोर्ट के आधार पर जल्द ही एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसमें पहाड़ी के ट्रीटमेंट से लेकर सुरक्षा दीवारों के निर्माण तक के प्रस्ताव शामिल होंगे।
मुख्य बिंदु जो राहत दिला सकते हैं:
- वैज्ञानिक सर्वे: भूगर्भीय विशेषज्ञों द्वारा पहाड़ी की मिट्टी और चट्टानों की मजबूती की जांच।
- सुरक्षा दीवार का निर्माण: मलबे को सीधे बाजार में आने से रोकने के लिए मजबूत क्रेट वायर और आरसीसी दीवारों की स्थापना।
- ड्रेनेज सिस्टम में सुधार: पानी के सीपेज को रोकने के लिए उचित जल निकासी व्यवस्था।
- तत्काल राहत कार्य: अत्यधिक संवेदनशील जोन से मलबे को हटाना।
फिलहाल, पाबौ बाजार की इस आपदा पर हर किसी की निगाहें जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि इस बार केवल कागजी कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि जमीन पर ठोस काम दिखाई देगा ताकि उनका आशियाना और कारोबार सुरक्षित रह सके।