शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लाख दावों के बीच जमीनी हकीकत की एक बानगी तब देखने को मिली, जब सुपौल जिले के जिलाधिकारी ने औचक निरीक्षण के दौरान खुद कक्षाओं में जाकर बच्चों की पठन-पाठन क्षमता को परखा। इस दौरान जो तस्वीर सामने आई, उसने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। कक्षा चार के बच्चे जब धाराप्रवाह हिंदी नहीं पढ़ पाए, तो जिलाधिकारी का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने न सिर्फ मौके पर मौजूद शिक्षकों और प्रधानाध्यापक को कड़ी फटकार लगाई, बल्कि भविष्य के लिए सख्त हिदायत भी जारी की है।
अचानक सुबह 11 बजे स्कूलों में पहुंचे डीएम
जिले के प्रशासनिक मुखिया यानी जिलाधिकारी सावन कुमार ने शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का जायजा लेने के वास्ते गुरुवार को पूर्वाहन करीब 11 बजे सरायगढ़-भपटियाही प्रखंड क्षेत्र के कई सरकारी और मॉडल विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बिना किसी पूर्व सूचना के सरस्वती विद्या निकेतन (मॉडल स्कूल), जनता फागू मेहता उच्च माध्यमिक विद्यालय और प्राथमिक विद्यालय बैसा के परिसरों में कदम रखा। डीएम के अचानक इस प्रकार स्कूलों में पहुंच जाने से शिक्षकों और प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया।
निरीक्षण की शुरुआत करते ही जिलाधिकारी ने सबसे पहले स्कूलों की उपस्थिति पंजी (Attendance Register) की बारीकी से जांच की। जांच के दौरान यह पाया गया कि पदस्थापित कुल 12 शिक्षकों में से 10 शिक्षक अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद थे। राहत की बात यह रही कि अनुपस्थित पाए गए दो शिक्षकों में से एक शिक्षिका मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) पर थीं, जबकि दूसरे शिक्षक विभागीय आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे थे।
कक्षाओं के संचालन और आधुनिक लैब की मिली स्थिति संतोषजनक
विद्यालयों के अंदर कक्षाओं के सुचारू संचालन को देखकर जिलाधिकारी ने कुछ हद तक संतोष जताया। उन्होंने शिक्षकों द्वारा तैयार की गई दैनिक पाठ-टिप्पणियों (Lesson Plans) और साप्ताहिक मूल्यांकन उत्तर पुस्तिकाओं का भी गहराई से अवलोकन किया। विद्यार्थियों की अब तक की प्रगति और शिक्षकों की शिक्षण तैयारी से संतुष्ट होकर उन्होंने पीठ थपथपाई और उनका उत्साहवर्धन भी किया।
इसके साथ ही विद्यालयों में स्थापित आईसीटी लैब (ICT Lab), आईएसएम लैब, स्मार्ट क्लास और साफ-सफाई के साथ शौचालयों की व्यवस्था का भी जायजा लिया गया, जो मानकों के अनुरूप संतोषजनक पाई गईं। डिजिटल शिक्षा के इस दौर में इन संसाधनों का उपयोग होता देख प्रशासन ने राहत की सांस ली, लेकिन आगे आने वाले दृश्यों ने सारी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी।
वर्ग कक्ष की कमी पर लिया गया तुरंत बड़ा फैसला
प्राथमिक विद्यालय बैसा और प्राथमिक विद्यालय कबियाही (शिफ्ट) के निरीक्षण के दौरान एक बड़ी व्यावहारिक समस्या सामने आई। यहां वर्ग कक्षों की भारी कमी महसूस की जा रही थी, जिससे बच्चों को बैठने में कठिनाई हो रही थी। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए डीएम सावन कुमार ने तुरंत मौके पर ही एक व्यावहारिक समाधान निकाला।
उन्होंने निर्देश दिया कि इन दोनों विद्यालयों का पठन-पाठन कार्य अब एक साथ संयुक्त रूप से संचालित किया जाए, ताकि बच्चों को बैठने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके और उनकी पढ़ाई में किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न न हो। प्रशासनिक स्तर पर लिया गया यह निर्णय बच्चों की सुविधा के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।
कक्षा चार के बच्चे नहीं पढ़ सके हिंदी, भड़के डीएम
निरीक्षण का सबसे संवेदनशील और चौंकाने वाला पल तब आया जब जिलाधिकारी प्राथमिक विद्यालय बैसा के एक वर्ग कक्ष में पहुंचे। उन्होंने वहां कक्षा चार के बच्चों को अपनी किताबें खोलने और पढ़ने को कहा। लेकिन, जो नजारा सामने आया उसने सबको हैरान कर दिया। कक्षा चार के कई बच्चे अपनी मातृभाषा हिंदी का पाठ तक धाराप्रवाह ढंग से नहीं पढ़ पा रहे थे।
बुनियादी शिक्षा के इस स्तर पर आकर बच्चों की यह लाचारी देखकर डीएम का पारा चढ़ गया। उन्होंने इस गंभीर लापरवाही पर गहरी नाराजगी जाहिर की। संबंधित वर्ग शिक्षक और विद्यालय के प्रधानाध्यापक को मौके पर ही आड़े हाथों लेते हुए कड़ी फटकार लगाई गई। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि बच्चों की पठन-पाठन की बुनियादी नींव मजबूत करना शिक्षकों की प्राथमिक जिम्मेदारी है, जिसमें किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कमजोर बच्चों के लिए विशेष कक्षाओं का सख्त आदेश
मासूम बच्चों की इस शैक्षणिक कमजोरी को दूर करने के लिए जिलाधिकारी ने तत्काल प्रभाव से विशेष कक्षाओं के संचालन का सख्त निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जो बच्चे हिंदी पढ़ने या अन्य बुनियादी विषयों में कमजोर हैं, उनके लिए अतिरिक्त समय निकालकर विशेष कक्षाएं (Remedial Classes) चलाई जाएं। इन बच्चों को विशेष मार्गदर्शन देकर जल्द से जल्द शैक्षणिक रूप से मुख्यधारा में जोड़ा जाए, ताकि वे अपनी कक्षा के स्तर के अनुकूल प्रदर्शन कर सकें।
बीईओ को स्पष्टीकरण और निरंतर मॉनिटरिंग का निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम ने प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने बीईओ को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे इस लापरवाही के लिए संबंधित प्रधानाध्यापक से तुरंत स्पष्टीकरण (Show Cause Notice) मांगें। साथ ही यह हिदायत भी दी गई कि केवल एक दिन की औचक जांच से काम नहीं चलेगा, बल्कि क्षेत्र के सभी विद्यालयों की लगातार और नियमित मॉनिटरिंग की जाए ताकि शिक्षा के स्तर में सुधार लाया जा सके।
इस पूरी औचक निरीक्षण कार्रवाई के दौरान प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) भी प्रमुख रूप से जिलाधिकारी के साथ मौजूद रहे। प्रशासनिक अमले की इस सक्रियता से भले ही शिक्षकों में हड़कंप मचा हो, लेकिन अभिभावकों और शिक्षाविदों का मानना है कि यदि इस तरह की औचक जांच लगातार होती रहे, तो सरकारी स्कूलों की सूरत और सीरत दोनों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।