Breaking
► स्मार्ट सिस्टम भी बेअसर: गरीबों के 7.25 करोड़ के राशन पर सेल्समैनों का डाका ► हिसार में लाइफस्टाइल डे: सही पोषण और फिटनेस पर हुई खास चर्चा ► अखिलेश यादव पर हंसराज विश्वकर्मा का तीखा प्रहार, बोले- रंग बदलने वालों को जनता... ► पौड़ी के पाबौ बाजार पर मंडराया बड़ा खतरा, भूस्खलन ने बढ़ाई प्रशासन की नींद ► बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के करोड़ों रुपए जारी, सुपौल के खाते में आए 28 करोड़ ► वीर कुंवर सिंह यूनिवर्सिटी परिसर में जलजमाव से हाल बेहाल, छात्रों में भारी गुस्सा ► सुपौल में डीएम की औचक छापेमारी: कक्षा 4 के बच्चे नहीं पढ़ पाए हिंदी, स्कूल में मचा हड़कंप ► बिहार बाढ़: स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने वैशाली में किया राहत शिविर का दौरा ► पटना में वाहन चोरों पर पुलिस का बड़ा शिकंजा, 6 बाइक के साथ 2 शातिर गिरफ्तार ► बेगूसराय में अतिक्रमण हटाने गए CO पर जानलेवा हमला, बाल-बाल बचे अधिकारी ► स्मार्ट सिस्टम भी बेअसर: गरीबों के 7.25 करोड़ के राशन पर सेल्समैनों का डाका ► हिसार में लाइफस्टाइल डे: सही पोषण और फिटनेस पर हुई खास चर्चा ► अखिलेश यादव पर हंसराज विश्वकर्मा का तीखा प्रहार, बोले- रंग बदलने वालों को जनता... ► पौड़ी के पाबौ बाजार पर मंडराया बड़ा खतरा, भूस्खलन ने बढ़ाई प्रशासन की नींद ► बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के करोड़ों रुपए जारी, सुपौल के खाते में आए 28 करोड़ ► वीर कुंवर सिंह यूनिवर्सिटी परिसर में जलजमाव से हाल बेहाल, छात्रों में भारी गुस्सा ► सुपौल में डीएम की औचक छापेमारी: कक्षा 4 के बच्चे नहीं पढ़ पाए हिंदी, स्कूल में मचा हड़कंप ► बिहार बाढ़: स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने वैशाली में किया राहत शिविर का दौरा ► पटना में वाहन चोरों पर पुलिस का बड़ा शिकंजा, 6 बाइक के साथ 2 शातिर गिरफ्तार ► बेगूसराय में अतिक्रमण हटाने गए CO पर जानलेवा हमला, बाल-बाल बचे अधिकारी

स्मार्ट सिस्टम भी बेअसर: गरीबों के 7.25 करोड़ के राशन पर सेल्समैनों का डाका

स्मार्ट सिस्टम भी बेअसर: गरीबों के 7.25 करोड़ के राशन पर सेल्समैनों का डाका

तकनीक के इस दौर में जहाँ हर व्यवस्था को पारदर्शी और फूल-प्रूफ बनाने के दावे किए जाते हैं, वहीं मैदानी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। गरीबों के हक का निवाला किस तरह शातिर दिमागों की भेंट चढ़ रहा है, इसका अंदाजा हाल ही में सामने आए एक बड़े आंकड़े से लगाया जा सकता है। सरकार द्वारा राशन चोरी की तमाम संभावनाओं को खत्म करने के लिए हाईटेक 'स्मार्ट पीडीएस सिस्टम' (Smart PDS System) लागू किया गया था, लेकिन यह आधुनिक तकनीक भी राशन माफिया और भ्रष्ट सेल्समैनों के आगे पूरी तरह बेदम साबित हो रही है।

कागज पर स्मार्ट सिस्टम, गोदाम खाली और पीओएस मशीन में खेल

व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए लागू किया गया डिजिटल पीओएस (Point of Sale) सिस्टम अपनी पूरी क्षमता से काम करने के दावे करता है। अंगूठे के निशान और बॉयोमीट्रिक पहचान के जरिए खाद्यान्न वितरण का यह तरीका आम आदमी को आश्वस्त करता था कि अब कोई बिचौलिया या डीलर उनके कोटे में सेंध नहीं लगा पाएगा। हालांकि, जमीनी स्तर पर सिस्टम के रखवाले ही इसके सबसे बड़े सेंधमार निकल पड़े।

आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले छह सालों के लंबे अंतराल में जिले के विभिन्न हिस्सों में कोटेदारों और सेल्समैनों ने मिलकर सवा सात करोड़ रुपए से अधिक के गेहूं और चावल का गबन कर डाला। हैरानी की बात यह है कि कागजों में पीओएस मशीनें पूरी तरह भरी हुई और दुरुस्त दिखाई देती रहीं, जबकि हकीकत में गोदाम अंदर से पूरी तरह खाली हो चुके थे।

छह साल बीतने के बाद भी वसूली सिफर

किसी भी वित्तीय अनियमितता या घोटाले के मामले में सबसे अहम चरण उसकी रिकवरी यानी वसूली माना जाता है। लेकिन इस मामले में प्रशासन की सुस्ती और लचर कार्यप्रणाली ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इतने बड़े पैमाने पर सरकारी संपत्ति और गरीबों के हक की लूट होने के बावजूद, वर्षों बीत जाने के बाद भी इस भारी-भरकम राशि का एक बड़ा हिस्सा वसूल नहीं किया जा सका है।

  • जांच के नाम पर औपचारिकता: गड़बड़ी सामने आने के बाद शुरुआती दौर में नोटिस और जांच का दौर शुरू होता है, जो धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला जाता है।
  • कानूनी पेंच और ढिलाई: आरोपियों पर शिकंजा कसने के लिए जो सख्त कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए थे, वे कागजी खानापूर्ति तक सीमित रह जाते हैं।
  • भयमुक्त माफिया: प्रशासनिक कार्रवाई का खौफ न होने के कारण इस तरह के कारनामों में लिप्त लोगों के हौसले लगातार बुलंद बने हुए हैं।

सिस्टम की खामियों का फायदा उठा रहे हैं शातिर दिमाग

जानकारों का मानना है कि चाहे सिस्टम कितना भी आधुनिक क्यों न बना दिया जाए, जब तक उसे संचालित करने वाले इंसानों की नीयत साफ नहीं होगी और निगरानी तंत्र मजबूत नहीं होगा, तब तक इस तरह के घोटालों पर पूरी तरह रोक लगाना असंभव है। स्मार्ट पीडीएस सिस्टम में ऑनलाइन एंट्री और ऑफलाइन स्टॉक के बीच के अंतर का फायदा उठाकर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। अपात्रों के नाम पर फर्जी पर्चियां काटना और वास्तविक लाभुकों के कोटे को खुले बाजार में बेच देना इन शातिर सेल्समैनों का मुख्य जरिया बन गया है।आम जनता के अधिकारों पर सीधा प्रहार

सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का मुख्य उद्देश्य देश के हर अंतिम व्यक्ति तक दो वक्त की रोटी की गारंटी पहुंचाना है। जब करोड़ों रुपए का राशन इस प्रकार बिचौलियों की भेंट चढ़ जाता है, तो इसका सीधा असर समाज के सबसे कमजोर और गरीब टके पर पड़ता है। जिन्हें सरकार की तरफ से मुफ्त या बेहद कम दरों पर अनाज मिलना चाहिए, वे बाजार से महंगे दामों पर राशन खरीदने को मजबूर हो जाते हैं।

इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर से इस बात को साबित कर दिया है कि केवल तकनीक थोप देने से भ्रष्टाचार खत्म नहीं होता। इसके लिए प्रशासनिक इच्छाशक्ति, नियमित औचक निरीक्षण और दोषियों के खिलाफ बिना किसी देरी के त्वरित व कठोर कार्रवाई की सख्त जरूरत है। जब तक करोड़ों रुपए की इस गबन की गई राशि की पाई-पाई वसूल नहीं की जाती और दोषियों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता, तब तक इस व्यवस्था पर से जनता का संदेह दूर होना मुश्किल है।

About the Author

रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

Writer (स्थानीय खबरें)

रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

Read More

अगली खबर पढ़ें:

आगे पढ़ें →