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CEC के खिलाफ हल्ला बोल: आतिशी और संजय सिंह समेत 700 से ज्यादा हिरासत में, जंतर-मंतर पर तनाव

CEC के खिलाफ हल्ला बोल: आतिशी और संजय सिंह समेत 700 से ज्यादा हिरासत में, जंतर-मंतर पर तनाव

दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर सेवानिष्ठ और तीखा उबाल देखने को मिल रहा है। राजधानी के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ चल रहा विरोध प्रदर्शन अचानक से उस समय उग्र हो गया, जब सुरक्षा बलों ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई करते हुए आम आदमी पार्टी (AAP) के दिग्गजों समेत 700 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। इस बड़ी कार्रवाई के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रख दिया गया है।

जंतर-मंतर पर क्यों भड़का आक्रोश?पिछले कुछ दिनों से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और कुछ हालिया फैसलों को लेकर विपक्षी दलों में जबरदस्त असंतोष पनप रहा था। इसी असंतोष ने आज जंतर-मंतर पर एक विशाल प्रदर्शन का रूप ले लिया। सुबह से ही दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों से पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक जंतर-मंतर की तरफ कूच करने लगे थे। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

हालाँकि, प्रदर्शनकारियों का यह जोश उस वक्त पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती बन गया जब भीड़ ने तय सीमाओं को लांघकर आगे बढ़ने की कोशिश की। स्थिति को नियंत्रण से बाहर होते देख दिल्ली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और एहतियातन कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए।

आतिशी और संजय सिंह समेत कई बड़े चेहरे हिरासत में

इस विरोध प्रदर्शन की कमान जिन प्रमुख नेताओं के हाथ में थी, उनमें दिल्ली सरकार और पार्टी के शीर्ष चेहरे शामिल रहे। पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही वरिष्ठ नेता आतिशी और सांसद संजय सिंह को पुलिस ने मौके से ही हिरासत में ले लिया। उनके साथ-साथ पार्टी के कई अन्य विधायक, पार्षद और सैकड़ों कार्यकर्ता भी पुलिस की हिरासत में लिए गए बसों में बैठाए गए।

हिरासत में लिए जाने के दौरान नेताओं और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी नोकझोक भी देखने को मिली। नेताओं का कहना था कि लोकतांत्रिक देश में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक और राजनीतिक दल का मौलिक अधिकार है, लेकिन सरकार और प्रशासन तानाशाही रवैया अपनाते हुए उनकी आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रहे हैं।

पुलिस कमिश्नर ने खुद संभाली कमान

हालात की गंभीरता को भांपते हुए दिल्ली के पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने खुद मोर्चा संभाला। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से जंतर-मंतर और आसपास के संवेदनशील इलाकों का दौरा किया। पुलिस कमिश्नर ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते हुए मैदानी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कानून और व्यवस्था से किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सुरक्षा के मद्देनजर जंतर-मंतर की ओर आने वाले कई प्रमुख मार्गों पर यातायात डायवर्ट कर दिया गया है। इसके अलावा, एहतियात के तौर पर इलाके में इंटरनेट सेवाओं को भी अस्थायी रूप से बाधित या धीमा कर दिया गया है, ताकि सोशल मीडिया के जरिए किसी भी तरह की अफवाहों को फैलने से रोका जा सके।

सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम और ड्रोन से निगरानी

घटनास्थल पर भारी संख्या में रैपिड एक्शन फोर्स (RAF), अर्धसैनिक बलों और दिल्ली पुलिस के जवानों को तैनात किया गया है। पुलिस प्रशासन किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। पूरे इलाके की निगरानी ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी के जरिए की जा रही है ताकि हुड़दंगियों पर पैनी नजर रखी जा सके।

  • भारी पुलिस बल तैनात: जंतर-मंतर और आसपास के तीन किलोमीटर के दायरे में छावनी जैसा माहौल।
  • इंटरनेट पर पाबंदी: अफवाहों को रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर इंटरनेट सेवाओं को नियंत्रित किया गया।
  • याचिका और चेतावनी: पुलिस ने साफ कर दिया है कि बिना अनुमति के इकट्ठा होने वाले या कानून हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू

इस हाई-प्रोफाइल हिरासत के बाद देश की राजधानी की राजनीति गरमा गई है। विपक्षी दलों के अन्य नेताओं ने भी इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करनी शुरू कर दी है। उनका आरोप है कि देश में असहमति की आवाज़ को कुचलने का एक खतरनाक सिलसिला चल रहा है। दूसरी ओर, सत्ता पक्ष का तर्क है कि कानून व्यवस्था को बनाए रखना पुलिस की पहली जिम्मेदारी है और सार्वजनिक संपत्ति या शांति व्यवस्था को खतरे में डालने वालों के खिलाफ नियमसंगत कार्रवाई की ही जानी चाहिए।

आगे क्या हो सकता है?

आगामी दिनों में इस मुद्दे पर राजनीति के और अधिक तल्ख होने के पूरे आसार हैं। एक तरफ जहां हिरासत में लिए गए नेताओं और कार्यकर्ताओं को रिहा कराने के लिए कानूनी और राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है, वहीं प्रशासन भी अपनी चौकसी में कोई ढील देने के मूड में नहीं है। देश की राजधानी में घट रही इन घटनाओं पर राजनीतिक विश्लेषकों की भी गहरी नजर बनी हुई है, क्योंकि आने वाले दिनों में यह विरोध प्रदर्शन एक बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बन सकता है।

फिलहाल, जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और पुलिस लगातार गश्त कर रही है ताकि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रहे।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

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रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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