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बिना ऑक्सीजन एवरेस्ट पर 10 बार चढ़ने वाले आंग रीता शेरपा की कहानी

बिना ऑक्सीजन एवरेस्ट पर 10 बार चढ़ने वाले आंग रीता शेरपा की कहानी

पर्वतारोहण की दुनिया में कुछ नाम ऐसे अमर हो जाते हैं, जिन्हें समय की धूल भी धुंधला नहीं सकती। इतिहास के पन्नों में 21 सितंबर का दिन एक ऐसे ही अद्भुत और अजेय पर्वतारोह की याद दिलाता है, जिन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को अपनी अदम्य इच्छाशक्ति और फेफड़ों के दम पर बिना ऑक्सीजन के बार-बार फतह किया। हम बात कर रहे हैं 'स्नो लेपर्ड' के नाम से मशहूर आंग रीता शेरपा की।

पर्वतारोहण का वह महानायक जिसने दुनिया को चौंका दिया था

जब भी माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई का जिक्र होता है, तो भारी-भरकम ऑक्सीजन सिलेंडर्स, विशेष गियर्स और अत्याधुनिक उपकरणों की बात सबसे पहले आती है। समुद्र तल से लगभग 8,848 मीटर की ऊंचाई पर हवा में ऑक्सीजन की मात्रा इतनी कम हो जाती है कि आम इंसान का वहां एक कदम रखना भी मौत को दावत देने जैसा होता है। ऐसे में बिना सप्लीमेंट्री ऑक्सीजन के एक बार भी एवरेस्ट चढ़ना किसी चमत्कार से कम नहीं है। लेकिन आंग रीता शेरपा ने इस 'असंभव' को एक बार नहीं, बल्कि पूरे 10 बार सच साबित करके दिखाया।

उनकी शारीरिक क्षमता और मानसिक दृढ़ता ने मेडिकल विज्ञान और पर्वतारोहण के जानकारों को भी हैरान कर दिया था। यही वजह थी कि उन्हें 'स्नो लेपर्ड' (बर्फीला तेंदुआ) की उपाधि दी गई, क्योंकि जिस सहजता और फुर्ती से वे बर्फीली चट्टानों और दुर्गम रास्तों पर चलते थे, वह किसी जंगली तेंदुए से कम नहीं थी।

शुरुआती जीवन और पहाड़ों से गहरा नाता

आंग रीता का जन्म नेपाल के सोलुखुम्बु जिले में एक साधारण शेरपा परिवार में हुआ था। हिमालय की गोद में पलने-बढ़ने के कारण ऊंचाई और ठंड उनके जीवन का हिस्सा बन चुकी थी। कम उम्र में ही उन्होंने पर्वतारोहियों के सामान ढोने का काम शुरू कर दिया था। धीरे-धीरे उन्होंने पर्वतारोहण की बारीकियों को समझा और अपनी प्राकृतिक क्षमताओं के दम पर एक बेहतरीन गाइड और पर्वतारोहण के रूप में खुद को स्थापित किया।

उनके भीतर पहाड़ों को लेकर एक अलग ही आदर और समझ थी। वे अक्सर कहा करते थे कि पहाड़ किसी को दुश्मन नहीं मानते, बल्कि इंसान की जरा सी लापरवाही उसे भारी पड़ जाती है। हिमालय के मौसम और उसके मिजाज को वे जितनी अच्छी तरह समझते थे, शायद ही कोई दूसरा समझता हो।

बिना ऑक्सीजन चढ़ाई का ऐतिहासिक रिकॉर्ड

आंग रीता शेरपा ने अपने करियर में कुल 10 बार माउंट एवरेस्ट के शिखर पर कदम रखे और सबसे बड़ी बात यह थी कि उन्होंने इनमें से एक भी बार कृत्रिम ऑक्सीजन (Supplementary Oxygen) का इस्तेमाल नहीं किया। यह अपने आप में एक विश्व रिकॉर्ड है, जो आज भी कायम है। 1980 के दशक से लेकर 1990 के दशक के बीच उन्होंने जो उपलब्धियां हासिल कीं, उन्होंने नेपाल और पूरी दुनिया के पर्वतारोहण इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया।

उनके जीवन से जुड़े कुछ प्रमुख बिंदु:

  • पहला सफल प्रयास: आंग रीता ने साल 1983 में पहली बार बिना ऑक्सीजन के एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की थी।
  • अद्वितीय रिकॉर्ड: उन्होंने अपने जीवन में कुल 10 बार एवरेस्ट की चोटी को छुआ, और हर बार बिना ऑक्सीजन के यह कारनामा किया।
  • शीतकालीन चढ़ाई: उन्होंने दिसंबर 1987 में बिना ऑक्सीजन के एवरेस्ट पर चढ़ाई की, जो कड़ाके की ठंड और बर्फीले तूफानों के बीच एक अभूतपूर्व साहसिक कार्य था।

विज्ञान और शरीर की सीमाओं से परे

चिकित्सक और वैज्ञानिक हमेशा इस बात पर हैरान रहते थे कि कोई इंसान अत्यधिक ऊंचाई (Death Zone) पर बिना ऑक्सीजन के कैसे जीवित रह सकता है और भारी वजन के साथ चढ़ाई कर सकता है। आंग रीता का शरीर और उनका फेफड़ा पहाड़ी ढलानों की आबोहवा के अनुकूल ढल चुका था। उनकी आनुवंशिक बनावट और मजबूत दिल ने उन्हें वह क्षमता दी जो दुनिया के चुनिंदा लोगों के पास ही होती है।

लेकिन यह केवल शारीरिक क्षमता की बात नहीं थी। इसके पीछे उनका गजब का मानसिक संतुलन और सकारात्मक दृष्टिकोण था। कितनी भी खतरनाक स्थिति क्यों न आ जाए, आंग रीता कभी अपना आपा नहीं खोते थे।

आज भी युवा पर्वतारोहियों के लिए हैं प्रेरणा

भले ही आंग रीता शेरपा आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी वीरता और सादगी के किस्से आज भी हिमालय की वादियों में गूंजते हैं। वह सिर्फ एक पर्वतारोही नहीं थे, बल्कि साहस, सहनशीलता और समर्पण की एक ऐसी मिसाल थे जो आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।

जब भी कोई पर्वतारोही एवरेस्ट के बेस कैंप से ऊपर की ओर देखता है, तो उसे आंग रीता शेरपा की वह अजेय आत्मा जरूर याद आती है जिसने बिना किसी आधुनिक तामझाम के केवल अपने हौसले के दम पर आसमान को छू लिया था। इतिहास के पन्नों में उनका नाम हमेशा के लिए अमर हो चुका है।

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नसीम अहमद

नसीम अहमद

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नसीम अहमद जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं। उन...

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