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वोटर लिस्ट विवाद: राघव चड्ढा बोले- केजरीवाल के सपनों में आता हूं

वोटर लिस्ट विवाद: राघव चड्ढा बोले- केजरीवाल के सपनों में आता हूं

दिल्ली की सियासत में इन दिनों एक नया बवंडर खड़ा हो गया है, जिसके केंद्र में हैं राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा और उनका मतदाता सूची (Voter List) में नाम दर्ज होना। कभी आम आदमी पार्टी (AAP) के रणनीतिकारों में शुमार रहे और अब राजनीतिक समीकरण बदलने के बाद चर्चा में आए चड्ढा के वोटर रजिस्ट्रेशन को लेकर उनकी पुरानी पार्टी ने मोर्चा खोल दिया है। इस पूरे घटनाक्रम ने राजधानी के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर सुगबुगाहट तेज कर दी है कि आखिर एक नाम को लेकर इतना बड़ा सियासी संग्राम क्यों छिड़ गया है?

'AAP के सपनों में आता हूं': राघव चड्ढा का तंज

तमाम सियासी हमलों और आलोचनाओं के बीच राघव चड्ढा ने बेहद आक्रामक रुख अख्तियार किया है। उन्होंने अपनी पुरानी पार्टी पर करारा तंज कसते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वह अब अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के नेताओं के सपनों में आने लगे हैं। चड्ढा के मुताबिक, पार्टी छोड़ने के बाद से ही उन्हें और उनके हर कदम को निशाना बनाया जा रहा है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "विपक्ष या मेरी पुरानी पार्टी को यह समझ लेना चाहिए कि मतदाता सूची कोई किसी राजनीतिक दल का निजी सदस्यता रजिस्टर नहीं है। चुनावी प्रक्रियाएं कानून और नियमों के दायरे में चलती हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि दिन-रात बस यही सोचा जाता है कि मुझ पर और मेरे हर फैसले पर किस तरह से सवाल उठाए जाएं।"

AAP का गंभीर आरोप: 'चोर दरवाजे' से हुई एंट्री?

इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब आम आदमी पार्टी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और राघव चड्ढा के वोटर रजिस्ट्रेशन पर गंभीर सवाल खड़े किए। पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने एक प्रेस कांफ्रेंस में आंकड़े रखते हुए सनसनीखेज आरोप लगाए।

अनुराग ढांडा का दावा है कि गत 31 अगस्त को जारी की गई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के मुताबिक, राजिंदर नगर (AC-39) विधानसभा क्षेत्र के एक विशेष हिस्से में कुल 746 मतदाता दर्ज थे। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि उसके तुरंत बाद राघव चड्ढा का नाम 747वें क्रम पर कैसे और किस विशेष प्रक्रिया के तहत जोड़ दिया गया?

आप नेताओं का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया नियमों के परे जाकर, 'बैकडोर' यानी चोर दरवाजे से की गई है। उनका कहना है कि दिल्ली का चुनाव आयोग इस बात का संतोषजनक जवाब देने में असमर्थ है कि आखिर इस नाम को जोड़ने के लिए किस तय प्रक्रिया का पालन किया गया और इतनी जल्दी यह काम कैसे संभव हुआ।

चुनाव आयोग ने आगे आकर साफ की स्थिति

राजनीतिक दलों के बीच बढ़ते इस घमासान और जनता के बीच भ्रम की स्थिति को देखते हुए दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय को इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा। चुनाव आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए एक विस्तृत बयान जारी किया है, जिसमें पूरी प्रक्रिया पर से पर्दा उठाया गया है।

आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी नागरिक का नाम शामिल करना, किसी नाम को हटाना या उसमें कोई भी संशोधन करना एक बेहद पारदर्शी और कानूनी प्रक्रिया के तहत होता है। यह पूरी प्रक्रिया:

  • लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (Representation of the People Act, 1950)
  • निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 (Registration of Electors Rules, 1960)

के सख्त प्रावधानों के अनुसार ही संचालित की जाती है।

अधिकारियों ने यह भी बताया कि इसके लिए निर्धारित फॉर्म जैसे फॉर्म 6, 7 और 8 का ही उपयोग किया जाता है। संबंधित क्षेत्र के निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) तमाम कानूनी पहलुओं और दस्तावेजों की जांच के बाद ही किसी आवेदन को स्वीकार या अस्वीकार करते हैं। आयोग का साफ कहना है कि किसी भी प्रकार की अनियमितता की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाती है।

राजनीतिक नफे-नुकसान का खेल

विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल एक नाम के जुड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे आने वाले राजनीतिक समीकरण और चुनावी जमीन तलाशने की कवायद जुड़ी हुई है। राजिंदर नगर का यह पूरा घटनाक्रम आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलों के साथ जनता के बीच उतरने की तैयारी कर रहे हैं।

फिलहाल, जहां आम आदमी पार्टी इसे प्रशासनिक मिलीभगत और नियमों की अनदेखी बता रही है, वहीं राघव चड्ढा और चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण ने यह साफ कर दिया है कि पूरी कार्रवाई कानूनी दायरे में ही की गई है। देखना यह होगा कि इस राजनीतिक खींचतान का आगामी दिनों में क्या असर देखने को मिलता है।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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