छत्तीसगढ़ की माटी की सोंधी खुशबू और उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत इन दिनों पूरे शबाब पर है। इसी कड़ी में धमतरी शहर ने एक बेहद अनूठे और ऐतिहासिक आयोजन का गवाह बना, जब सड़कों पर पारंपरिक वेशभूषा और लोक धुनों के साथ 'नारबोद रैली' निकाली गई। छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना जिला धमतरी के बैनर तले आयोजित यह अपनी तरह का पहला ऐसा आयोजन था, जिसने शहरवासियों का दिल जीत लिया। दोपहर के वक्त जब पुरानी मंडी सिहावा चौक से इस रैली की शुरुआत हुई, तो पूरा माहौल छत्तीसगढ़ी रंग में रंग गया।
परंपरा और आधुनिकता का संगम: सिहावा चौक से शुरू हुआ कारवां
मंगलवार दोपहर ठीक 12 बजे पुरानी मंडी सिहावा चौक पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। ढोल-नगाड़ों की थाप, पारंपरिक बाजे-गाजे और हाथों में छत्तीसगढ़ के स्वाभिमान का प्रतीक थामे लोग जब आगे बढ़े, तो हर देखने वाले की निगाहें उन पर टिक गईं। यह रैली शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए अपनी मंजिल यानी एकलव्य खेल परिसर स्थित खेल मैदान तक पहुंची। इस दौरान रास्ते भर स्थानीय नागरिकों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर इस सांस्कृतिक महाकुंभ का स्वागत किया।
रैली का सबसे बड़ा आकर्षण लोगों की पारंपरिक वेशभूषा थी। महिलाओं ने जहां पारंपरिक लाभरी और साड़ियों में अपनी संस्कृति को जीवंत किया, वहीं युवाओं और बुजुर्गों ने भी ठेठ छत्तीसगढ़ी लिबास पहनकर अपनी जड़ों से जुड़े होने का संदेश दिया। शहर के मुख्य मार्ग पारंपरिक नारों और लोकगीतों से गूंज उठे, जिससे पूरा धमतरी जिला छत्तीसगढ़मय हो गया।
लोक नृत्यों और झांकियों ने बांधा समां
नारबोद रैली सिर्फ एक जलसा नहीं था, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की लोक कला का एक चलता-फिरता संग्रहालय बन गया था। रैली के दौरान प्रस्तुत किए गए पारंपरिक नृत्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
- गेड़ी नृत्य: बांस की ऊंची गेड़ियों पर संतुलन बनाते कलाकारों ने सबका ध्यान खींचा।
- मांदरी और कर्मा नृत्य: मांदल की थाप पर थिरकते कलाकारों की ऊर्जा देखने लायक थी।
- पंथी और राउत नाचा: अपने अनुशासन और कलात्मक मुद्राओं से इन नृत्यों ने माहौल को पूरी तरह से ऊर्जावान बना दिया।
- सुवा नृत्य और अखाड़ा दल: महिलाओं के सुवा नृत्य और युवाओं के अखाड़े के करतबों ने दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी।
इन लोक कलाओं के अलावा, रैली में शामिल भव्य झांकियां इस आयोजन का मुख्य केंद्र बिंदु रहीं। छत्तीसगढ़ महतारी, हमारे पुरखों, नारबोद और भांचा राम की झांकियों के माध्यम से न सिर्फ इतिहास को ताजा किया गया, बल्कि राज्य की संस्कृति, परंपरा और सामाजिक समरसता का गहरा संदेश भी दिया गया। इन झांकियों ने नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से रूबरू कराने का एक बेहतरीन काम किया।
'जात-पात की करें विदाई, छत्तीसगढ़िया भाई-भाई' का संदेश
रैली के समापन के बाद एकलव्य खेल परिसर में एक विशाल मंचीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यहाँ छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना और विभिन्न संगठनों के प्रमुख वक्ताओं ने समाज को एकजुट करने का कड़ा संदेश दिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अजय यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस नारबोद रैली का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ के स्वाभिमान की भावना को जन-जन के मन में जागृत करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समाज के सभी वर्गों के बीच आपसी प्रेम, सरोकार और भाईचारा ही राज्य की असली ताकत है।
वहीं, जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष निखिलेश देवान ने अपने ओजस्वी भाषण में एक बेहद महत्वपूर्ण नारा दिया— 'जात-पात की करें विदाई, छत्तीसगढ़िया भाई-भाई'। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और पारंपरिक धरोहरों को सहेजने तथा आने वाली पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए इस तरह के आयोजन भविष्य में भी निरंतर जारी रहेंगे।
दिग्गजों की मौजूदगी ने बढ़ाई कार्यक्रम की शोभा
इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने में राज्यभर से पहुंचे विशिष्ट अतिथियों और स्थानीय कार्यकर्ताओं का बड़ा योगदान रहा। मंच संचालन और व्यवस्थाओं को संभालने में जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल, दिनेश वर्मा, संयोजक ललित बघेल, प्रदेश सचिव दिनेश वर्मा, लक्ष्मी नारायण, चंचल महंत, अमित वर्मा, डॉ. प्रेमुराम सिन्हा, चित्रलेखा देवदास, अशोक देवदास, गेंदलाल सिन्हा, सोमेश्वर साहू, यशवंत साहू, सोमन राम, पूनम प्रजापति, चंदा मरकाम, सोमेश्वर सोम और सुशील साहू सहित बड़ी संख्या में मातृशक्ति और युवा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में एक मील का पत्थर
विज्ञानी युग और पश्चिमी संस्कृति के बढ़ते प्रभाव के बीच धमतरी में आयोजित यह नारबोद रैली इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ के लोग अपनी जड़ों से आज भी कितनी मजबूती से जुड़े हुए हैं। इस आयोजन ने न केवल स्थानीय कलाकारों को एक बड़ा मंच दिया, बल्कि समाज में एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक गौरव का एक ऐसा अलख जगाया जो लंबे समय तक याद रखा जाएगा। धमतरी की यह पहली नारबोद रैली आने वाले दिनों में राज्य के अन्य जिलों के लिए भी एक अनूठी मिसाल बन गई है।