छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले से एक बेहद शातिर और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। बलौदा थाना क्षेत्र में ठगों ने एक नया और नायाब तरीका अपनाते हुए बड़ी ठगी को अंजाम दिया। खुद को जानी-मानी टेलीकॉम कंपनी 'जियो' का सुपरवाइजर बताकर दो शातिर युवकों ने न सिर्फ एक ग्रामीण का भरोसा जीता, बल्कि उसके दो ट्रैक्टर और ट्रॉलियों को भी किराए पर हथिया लिया। इसके बाद इन वाहनों को बेहद कम दामों में दूसरे जिले के एक शख्स को बेचकर फरार हो गए। इस सनसनीखेज धोखाधड़ी से पीड़ित को कुल 9 लाख रुपये का तगड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है।
ऐसे रची गई पूरी साजिश
घटना की शुरुआत 24 जुलाई 2026 को हुई थी। जांजगीर-चांपा जिले के खिसोरा गांव के रहने वाले विमलेश कुमार अहिर के घर दो युवक पहुंचे। इन युवकों ने अपना नाम सन्नी लाल पाटले और राहुल कुमार खाण्डे बताया। खुद को बड़ी कंपनी जियो का सुपरवाइजर बताते हुए उन्होंने विमलेश कुमार के सामने एक आकर्षक प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि कंपनी के कुछ कामों के लिए दो ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की सख्त जरूरत है और इसके एवज में प्रत्येक ट्रैक्टर का 30,000 रुपये मासिक किराया दिया जाएगा।
बढ़े हुए किराए और कंपनी के नाम के झांसे में आकर विमलेश कुमार उनकी बातों पर भरोसा कर बैठे। आरोपियों ने भरोसे को पूरी तरह से भुनाते हुए दोनों ट्रैक्टर और ट्रॉलियों को अपने कब्जे में ले लिया और वहां से लेकर चलते बने। पीड़ित को तब तक जरा भी अंदेशा नहीं हुआ कि वह एक सोची-समझी साजिश का शिकार हो रहा है।
किराए पर लेने के बाद कर दिया सौदा
गाड़ियों को अपने कब्जे में लेने के बाद दोनों आरोपियों ने अपनी असली चाल चलनी शुरू की। वे दोनों वाहनों को लेकर सीधे पड़ोसी जिले बिलासपुर पहुंचे। वहां उन्होंने किसी अन्य व्यक्ति को दोनों ट्रैक्टर और ट्रॉलियां मात्र 2 लाख रुपये में बेच डालीं। इतने महंगे और कीमती वाहनों को इतनी कम कीमत पर बेचने से साफ जाहिर होता है कि उनका मकसद शुरू से ही ठगी करना था।
पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इस अवैध बिक्री से जो पैसे मिले थे, उनमें से करीब 50 हजार रुपये आरोपी पहले ही अलग-अलग जगहों पर खर्च कर चुके थे। इस तरह से वाहनों को हड़पकर कुल 9 लाख रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया। जब काफी समय बीतने के बाद भी वाहन वापस नहीं मिले और आरोपियों से संपर्क नहीं हो पाया, तब पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ।
थाने में पहुंचा मामला, पुलिस ने दर्ज किया केस
अपने साथ हुई इस बड़ी धोखाधड़ी के बाद विमलेश कुमार ने तुरंत बलौदा थाना पहुंचकर अपनी शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित के आवेदन को गंभीरता से लेते हुए स्थानीय पुलिस ने फौरन एक्शन लिया। थाना बलौदा में अपराध क्रमांक 407/2026 दर्ज किया गया। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सख्त धाराओं के तहत केस दर्ज किया। आरोपियों पर धारा 318(4) और 3(5) के तहत कानूनी शिकंजा कसा गया।
पुलिस अधिकारियों का सख्त रुख और गुप्त सूचना
घटना की संवेदनशीलता को भांपते हुए जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मामले की मॉनिटरिंग खुद अपने हाथ में ली। पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय के कड़े निर्देश, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. यूलैण्डन यार्क तथा एसडीओपी अकलतरा डॉ. मेखलेन्द्र प्रताप सिंह के मार्गदर्शन में एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया। यह टीम लगातार आरोपियों की टोह लेने में जुटी हुई थी।
इसी बीच, पुलिस तंत्र को मुखबिर से एक सटीक सूचना मिली कि दोनों आरोपी अपने-अपने घरों पर छिपे हुए हैं। सूचना मिलते ही बिना समय गंवाए बलौदा पुलिस की टीमों ने बताए गए ठिकानों पर अचानक घेराबंदी कर दी और दोनों को धर दबोचा।
गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई
पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो दोनों आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने जियो कंपनी का फर्जी सुपरवाइजर बनकर इन वाहनों को किराए पर लिया था और बाद में बिलासपुर में बेच दिया था। पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए 8 सितंबर 2026 को दोनों आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर लिया और न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है:
- सన్నీ लाल पाटले (35 वर्ष), निवासी वार्ड क्रमांक 03, बम्हनीन, थाना अकलतरा।
- राहुल कुमार खाण्डे (24 वर्ष), निवासी वार्ड क्रमांक 05, खम्हरिया।
पुलिस का कहना है कि इस धोखाधड़ी में और कौन-कौन लोग शामिल थे और बिलासपुर में वाहन किसे बेचे गए थे, इस संबंध में गहनता से पूछताछ की जा रही है। मामले में एक अन्य संभावित संलिप्त आरोपी की तलाश अभी भी जारी है, जिसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
सराहनीय पुलिस टीम
इस पूरे ऑपरेशन को सफल बनाने में बलौदा थाना प्रभारी और उनकी टीम की भूमिका बेहद सराहनीय रही। निरीक्षक मनोहर सिन्हा, सहायक उपनिरीक्षक रामदुलार साहू, सहायक उपनिरीक्षक कौशल सिदार, प्रधान आरक्षक गजाधर पाटनवार, महिला प्रधान आरक्षक रामकुमारी मार्को, आरक्षक रज्जू रात्रे, संदीप सोनंत, जयराम बिझवार और संतोष रात्रे ने बेहतरीन टीम वर्क का परिचय देते हुए कम समय में आरोपियों को दबोच लिया।
सुरक्षा के लिहाज से जनता के लिए जरूरी संदेश
इस तरह की घटनाएं समाज के लिए एक बड़ा सबक हैं। आजकल ठग नए-नए हथकंडे अपनाकर भोले-भाले लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। यदि आप भी अपने वाहन किराए पर देते हैं या किसी व्यवसायिक उपयोग के लिए किसी को गाड़ी सौंपते हैं, तो कुछ सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है:
- सामने वाले व्यक्ति की पहचान पत्र (आधार कार्ड, पैन कार्ड) की अच्छी तरह जांच करें।
- कंपनी का नाम लेने पर सीधे उस कंपनी के आधिकारिक कार्यालय या स्थानीय प्रबंधक से पुष्टि जरूर करें।
- वाहन किराए पर देने से पहले एक मजबूत और कानूनी रूप से वैध एग्रीमेंट (Agreement) जरूर तैयार करवाएं।
- GPS ट्रैकर जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करें ताकि आपके वाहन की लाइव लोकेशन आपके पास हमेशा मौजूद रहे।
सतर्कता ही इस तरह के अपराधियों से बचने का सबसे बड़ा हथियार है। जांजगीर-चांपा पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से आम जनता के मन में एक बार फिर कानून के प्रति भरोसा मजबूत हुआ है।