कठुआ जिले में आधार सेवाओं को और अधिक सुचारू और पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। जिला मुख्यालय पर आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान प्रशासन ने साफ कर दिया है कि आधार कार्ड से जुड़ी किसी भी तरह की हीलाहवाली या पेंडेंसी को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे जनता को हो रही परेशानियों को समझें और त्वरित गति से मामलों का निपटारा करें।
अतिरिक्त उपायुक्त महिमा मदान ने संभाली कमान
जिला प्रशासनिक परिसर के कॉन्फ्रेंस हॉल में जिला स्तरीय आधार मॉनिटरिंग कमेटी की एक बेहद अहम बैठक बुलाई गई। इस बैठक की अध्यक्षता अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) महिमा मदान ने की। बैठक का मुख्य एजेंडा जिले भर में चल रहे आधार नामांकन (Aadhaar Enrollment) और डेटा अपडेट सेवाओं की जमीनी हकीकत की समीक्षा करना था। एडीसी ने तमाम संबंधित विभागों के कामकाज का बारीकी से जायजा लिया और आधार सेवाओं में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए मौके पर ही दिशा-निर्देश जारी किए।
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि हर आयु वर्ग के नागरिकों तक आधार सेवाएं सुगमता से पहुंचनी चाहिए। पिछले कुछ समय से आधार जनरेशन और अपडेट मामलों में आ रही पेंडेंसी को लेकर एडीसी ने गहरी नाराजगी जताई और अधिकारियों को चेतावनी दी कि वे लंबित मामलों का अंबार न लगने दें, बल्कि युद्ध स्तर पर उनका निस्तारण करें।
बच्चों के बायोमेट्रिक अपडेट पर सबसे ज्यादा फोकस
एडीसी महिमा मदान ने बैठक के दौरान सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बच्चों के अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (MBU - Mandatory Biometric Update) का उठाया। अक्सर यह देखा गया है कि बच्चे जब एक निश्चित आयु सीमा को पार करते हैं, तो उनके फिंगरप्रिंट और आईआरिस स्कैन अपडेट कराना अनिवार्य होता है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण यह प्रक्रिया अधूरी रह जाती है।
किन बच्चों के लिए है जरूरी?
- 5 वर्ष की आयु पूरी करने वाले बच्चे: इस उम्र में बच्चों का पहला बड़ा बायोमेट्रिक अपडेट होता है।
- 15 वर्ष की आयु पूरी करने वाले किशोर: इस पड़ाव पर किशोरों का दूसरा अनिवार्य अपडेट किया जाता है ताकि उनके वयस्क होने पर डेटा पूरी तरह सटीक रहे।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इन दोनों आयु वर्ग के बच्चों का शत-प्रतिशत बायोमेट्रिक अपडेट हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों की मदद लेने पर भी लंबी चर्चा हुई।
स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में लगेंगे विशेष शिविर
ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों और बच्चों को आधार केंद्रों के चक्कर न काटने पड़ें, इसके लिए प्रशासन ने एक ठोस कार्ययोजना तैयार की है। बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुसार अब जिले के विभिन्न स्कूलों में विशेष आधार शिविर (Aadhaar Camps) आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों के माध्यम से छात्र-छात्राओं को मौके पर ही आधार अपडेट और नए नामांकन की सुविधा मिलेगी।
इसके साथ ही, आंगनबाड़ी केंद्रों पर क्लस्टर लेवल एनरोलमेंट सेंटर (CLEC) ऑपरेटरों की तैनाती को लेकर भी समीक्षा की गई। आंगनबाड़ी स्तर पर इन ऑपरेटरों के सक्रिय होने से ग्रामीण इलाकों के छोटे बच्चों और उनके अभिभावकों को भारी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि उन्हें अब दूरदराज के मुख्य बाजारों में स्थित आधार केंद्रों पर लंबी कतारों में नहीं खड़ा होना पड़ेगा।
जन्म और मृत्यु पंजीकरण के साथ आधार को जोड़ने की पहल
प्रशासन ने सिस्टम को और अधिक एकीकृत (Integrated) बनाने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। जन्म और मृत्यु के समय होने वाले पंजीकरण (Registration) की प्रक्रिया के दौरान ही छूटे हुए मामलों को आधार से जोड़ने के पुख्ता उपाय सुझाए गए हैं। नवजात शिशुओं के जन्म प्रमाण पत्र के साथ ही उनके आधार नामांकन की प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है, ताकि कोई भी नया नागरिक इस महत्वपूर्ण डिजिटल पहचान पत्र से वंचित न रहे।
सभी आधार केंद्रों को नियमित रूप से चालू रखने के सख्त आदेश
शिकायतें मिल रही थीं कि कई क्षेत्रों में आधार केंद्र या तो समय पर नहीं खुलते हैं या फिर तकनीकी खराबी के चलते बंद रहते हैं। एडीसी महिमा मदान ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए सभी आधार केंद्रों को तय समय के अनुसार नियमित रूप से चालू रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी केंद्र पर ऑपरेटर की लापरवाही या अन्य किसी वजह से जनता को परेशानी का सामना करना पड़ा, तो संबंधित एजेंसी और कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
बैठक के अंत में सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों ने प्रशासनिक निर्देशों का पूरी निष्ठा के साथ पालन करने का भरोसा दिलाया। उम्मीद जताई जा रही है कि इन नए दिशा-निर्देशों के जमीन पर उतरने के बाद कठुआ जिले में आधार से जुड़ी समस्याओं का तेजी से समाधान होगा और आम जनता को सहूलियत मिलेगी।