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पैट्रिक स्टुअर्ट का 86 वर्ष की आयु में निधन, 'स्टार ट्रेक' और 'एक्स-मेन' के दिग्गज अभिनेता ने दुनिया को कहा अलविदा

पैट्रिक स्टुअर्ट का 86 वर्ष की आयु में निधन, 'स्टार ट्रेक' और 'एक्स-मेन' के दिग्गज अभिनेता ने दुनिया को कहा अलविदा

शेक्सपियरियन अभिनय से 'स्टार ट्रेक' और 'एक्स-मेन' को वैश्विक ऊंचाई देने वाले दिग्गज ब्रिटिश अभिनेता पैट्रिक स्टुअर्ट का बुधवार को लॉस एंजिल्स में निधन हो गया है। वह 86 वर्ष के थे।

उनके प्रवक्ता केली बुश नोवाक के अनुसार, स्टुअर्ट अल्जाइमर रोग और लेवी बॉडी डिमेंशिया से पीड़ित थे और एक संक्षिप्त व कठिन दौर के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके इन स्वास्थ्य विकारों का खुलासा पहले सार्वजनिक तौर पर नहीं किया गया था।

सिनेमा और रंगमंच जगत में शोक की लहर

'एक्स-मेन' फ्रेंचाइजी में पैट्रिक स्टुअर्ट के साथ अक्सर स्क्रीन साझा करने वाले अभिनेता ह्यू जैकमैन ने सोशल मीडिया पर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए लिखा, हमने आज मंच और परदे के दिग्गजों में से एक को खो दिया है। मेरी नजर में वह एक बेहतरीन दोस्त और इंसान थे। मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा। पैट्रिक स्टुअर्ट, मैं आपको अपनी जिंदगी के हर दिन याद रखूंगा।'

रंगमंच से लेकर अंतरिक्ष के सफर तक का सफर

पैट्रिक स्टुअर्ट को दुनिया भर में 'एक्स-मेन' श्रृंखला में प्रोफेसर चार्ल्स जेवियर और 'स्टार ट्रेक: द नेक्स्ट जेनरेशन' फिल्मों में कैप्टन जीन-लुक पिकार्ड के रूप में सबसे अधिक पहचाना जाता है। हालांकि, उन्होंने एक्स-मैंशन या यूएसएस एंटरप्राइज की तुलना में अपने अभिनय जीवन का अधिक समय रंगमंच (स्टेज) पर बिताया था।

क्लॉडियस से लेकर मैकबेथ तक के विभिन्न किरदार निभाने के अलावा, उन्होंने 'ए क्रिसमस कैरॉल' का एकल मंचन भी किया। इसके अलावा उन्होंने वेस्ट एंड और ब्रॉडवे पर हेरोल्ड पिंटर के नाटक 'नो मैन्स लैंड' और सैमुअल बैकेट के 'वेटिंग फॉर गोडोट' में अपने करीबी दोस्त इयान मैककेलन के साथ काम किया था।

मैकबेथ के लिए मिला था टोनी पुरस्कार का नामांकन

जब उन्होंने आखिरकार मैकबेथ की भूमिका निभाई, तो उन्हें अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ समीक्षाएं प्राप्त हुईं। रूपर्ट गोल्ड के निर्देशन में यह नाटक मई 2007 में इंग्लैंड के चिचेस्टर फेस्टिवल थिएटर में शुरू हुआ, जिसके बाद यह लंदन के वेस्ट एंड और ब्रूकलिन एकेडमी ऑफ म्यूजिक से होते हुए 2008 में ब्रॉडवे पहुंचा।

इस शानदार प्रस्तुति के लिए स्टुअर्ट को उनके करियर का एकमात्र टोनी पुरस्कार नामांकन मिला। 'द टाइम्स ऑफ लंदन' ने उनके मैकबेथ को 'कमजोरी, लालच, अहंकार और गंभीर हास्य की एक मनमोहक रचना' बताया था। वहीं, 'द डेली टेलीग्राफ' ने इसे एक 'वास्तव में महान प्रदर्शन' करार दिया था और 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' ने इसे 'देखने योग्य' कहा था।

वर्ष 2008 में एसोसिएटेड प्रेस को दिए एक साक्षात्कार में स्टुअर्ट ने कहा था, मैंने लगभग 50 वर्षों तक इंतजार किया। जब मैं 14 वर्ष का था, तब मैंने इसे याद कर लिया था। मैंने सभी सोलोक्यू (स्वगत भाषण) सिर्फ इसलिए याद कर लिए थे क्योंकि मुझे वे महान लगे थे। और वे मेरे दिमाग में बस गए, इसलिए मुझे नाटक के उन हिस्सों को दोबारा याद नहीं करना पड़ा, जो कि एक वरदान है, क्योंकि अब लाइनें याद रखना इस काम का एकमात्र अभिशाप बन गया है।'

उत्तरी इंग्लैंड के साधारण परिवेश से स्टारशिप कमांडर तक

उत्तरी इंग्लैंड के कामकाजी वर्ग के मिर्फिल्ड, यॉर्कशायर में पले-बढ़े पैट्रिक स्टुअर्ट का शुरुआती जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा था। उनके घर में शौचालय तक की सुविधा नहीं थी। वह मात्र 12 वर्ष की आयु में एक शौकिया नाट्य समूह से जुड़े और किशोरावस्था में ही शौक के तौर पर शेक्सपियर के नाटक याद कर लिया करते थे। इसके बाद उन्होंने ब्रिस्टल ओल्ड विक थिएटर स्कूल की छात्रवृत्ति जीती और एक चरित्र अभिनेता के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। 19 वर्ष की आयु से ही उनके बाल झड़ने लगे थे, क्योंकि उनके परिवार में एलोपेसिया (गंजापन) की समस्या अनुवांशिक थी।

घरेलू हिंसा के खिलाफ बने थे पैट्रोन

उनके पिता ब्रिटिश सेना में पूर्व रेजिमेंटल सार्जेंट मेजर थे, जो अक्सर उनकी माँ पर हिंसा करते थे। स्टुअर्ट ने एक अखबार के लेख और अपने संस्मरण 'मेकिंग इट सो' में जिक्र किया था कि कैसे वह और उनके बड़े भाई ट्रेवर उन रातों से डरते थे जब उनके पिता नशे में धुत होकर घर लौटते थे और उनकी माँ पर हमला करते थे। बाद में यही बेटा घरेलू हिंसा पीड़ितों को आश्रय देने वाली संस्था 'रिफ्यूजी' (Refuge) का संरक्षक बना।

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रोली सिंह

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रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

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