दिग्गज अभिनेत्री मधुबाला और दिलीप कुमार के रिश्ते को लेकर अभिनेत्री मुमताज के एक हालिया दावे को मधुबाला की बहन मधुर भूषण ने सिरे से खारिज कर दिया है। मधुर ने बताया कि दोनों की कब्रें मुंबई के जुहू मुस्लिम कब्रिस्तान में महज पांच से दस मीटर की दूरी पर स्थित हैं।
भारतीय सिनेमा के इतिहास में दिलीप कुमार और मधुबाला की प्रेम कहानी जितनी चर्चित रही, उतनी ही इसका अंत भी बेहद दुखद रहा। हाल ही में दिग्गज अभिनेत्री मुमताज ने एक साक्षात्कार में दावा किया था कि मधुबाला की हृदय संबंधी बीमारी और उनके संतानहीन होने की बात सामने आने के बाद दिलीप कुमार ने उनसे दूरी बना ली थी। हालांकि, मधुबाला की बहन मधुर भूषण ने इसे पूरी तरह गलत बताया है।
ब्रेकअप और बीमारी से जुड़े खुलासे
पत्रकार विकी लालवानी को दिए गए इंटरव्यू में मधुर भूषण ने स्पष्ट किया कि मधुबाला को दिल की बीमारी उनके अलग होने के काफी समय बाद हुई थी, और इस दौर में दिलीप कुमार का कोई लेना-देना नहीं था। मधुर के अनुसार, मधुबाला को हृदय संबंधी जटिलताएं फिल्म 'चलती का नाम गाड़ी' (1958) के आसपास शुरू हुईं।
दिलीप कुमार ने अपनी आत्मकथा 'द सब्सटेंस एंड द शैडो' में जिक्र किया था कि दोनों के बीच दूरियां तब आनी शुरू हुईं जब मधुबाला के पिता अताउल्लाह खान ने एक फिल्म स्टूडियो शुरू करने का प्रस्ताव रखा, जिसमें दोनों मुख्य कलाकार होते। दिलीप कुमार इस प्रस्ताव से असहज महसूस कर रहे थे। इसके अलावा, फिल्म 'मुगल-ए-आइजम' (1960) की शूटिंग के दौरान दोनों के बीच बातचीत बंद हो चुकी थी।
लंदन में इलाज और किशोर कुमार से विवाह
मधुर ने अपनी बहन की बीमारी की शुरुआत को याद करते हुए बताया कि फिल्म 'बहुत दिन हुए' की शूटिंग के दौरान मधुबाला बेहोश हो गई थीं और उन्होंने खून की उल्टी भी की थी। इसके बाद उन्हें मुंबई के डॉक्टरों से जांच कराई गई, जहां पता चला कि उनके दिल में छेद है। उस समय देश में चिकित्सा तकनीक इतनी उन्नत नहीं थी।
मधुर के मुताबिक, उस वक्त तक मधुबाला और किशोर कुमार के बीच प्रेम संबंध बन चुके थे। बीमारी का पता चलने के बाद किशोर कुमार उन्हें इलाज के लिए लंदन लेकर गए थे, जहां डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया था कि इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है और उनके पास जीने के लिए सीमित समय बचा है। मधुबाला इस बात को मानने को तैयार नहीं थीं, लेकिन बाद में 'मुगल-ए-आइजम' के एक गाने की शूटिंग के दौरान जंजीरों में जकड़े होने की स्थिति में वह फिर बेहोश हो गईं। 36 वर्ष की आयु में 1969 में उनका निधन हो गया।
अंतिम दिनों और दिलीप कुमार से जुड़ी यादें
मधुर भूषण ने किशोर कुमार के रवैए पर भी खुलकर बात की और बताया कि बीमारी के अंतिम दिनों में उन्हें अपेक्षित भावनात्मक सहयोग नहीं मिला। इसके बावजूद मधुर ने दावा किया कि तमाम परिस्थितियों के बाद भी मधुबाला अपने पहले प्यार दिलीप कुमार को कभी नहीं भूल पाई थीं। उन्होंने बताया कि अपनी अंतिम सांसें गिनते वक्त भी उन्होंने दिलीप कुमार (यूसुफ खान) को याद किया था।
वहीं, दिलीप कुमार ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि शादी के कई साल बाद जब सायरा बानो से उनका विवाह हुआ, तो मधुबाला ने एक संदेश भेजकर उन्हें मिलने बुलाया था। जब दिलीप कुमार उनसे मिलने पहुंचे, तो बेहद कमजोर होने के बावजूद मधुबाला ने मुस्कुराते हुए कहा था, 'हमारे शहजादे को उनकी शहजादी मिल गई है, मैं बहुत खुश हूं!'