भर्ती प्रक्रिया में देरी के कारण नई पेंशन योजना के दायरे में आए थे शिक्षक, हाईकोर्ट ने दिए विचार के निर्देश
चंडीगढ़ में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के उन शिक्षकों के लिए राहत की उम्मीद जगाई है जो पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ दिए जाने की मांग कर रहे हैं। अदालत ने गुलशन कुमार और अन्य शिक्षकों की ओर से दायर याचिका का निपटारा करते हुए राज्य सरकार और संबंधित सक्षम प्राधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे शिक्षकों के दावों पर छह सप्ताह के भीतर विधिवत विचार करें।
न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़ की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि निर्णय लेने से पहले शिक्षकों को व्यक्तिगत रूप से सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाए। इसके बाद एक तर्कपूर्ण और कारण सहित आदेश पारित किया जाए। यदि याचिकाकर्ता शिक्षक पात्रता की शर्तों पर खरे उतरते हैं, तो उन्हें बिना किसी विलंब के पुरानी पेंशन योजना का लाभ प्रदान किया जाए।
क्या है पूरा मामला और विज्ञापन का विवाद
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, उन्होंने सात जुलाई 2005 को जारी विज्ञापन के तहत विभिन्न शिक्षण पदों के लिए आवेदन किया था। हालांकि, प्रशासनिक कारणों से भर्ती प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी, जिसके चलते 20 जुलाई 2006 को इन पदों के लिए नया विज्ञापन फिर से जारी करना पड़ा। शिक्षकों का तर्क है कि इस नए विज्ञापन में पुराने अभ्यर्थियों की पात्रता पूरी तरह सुरक्षित रखी गई थी। इसके साथ ही शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा और अन्य पात्रता शर्तों के लिए एक जुलाई 2005 की तिथि को कटऑफ डेट के रूप में निर्धारित किया गया था।
भर्ती प्रक्रिया संपन्न होने के बाद जब इन शिक्षकों की नियुक्तियां हुईं, तो उन्हें पुरानी योजना के बजाय नई अंशदायी पेंशन योजना के तहत रख दिया गया। इसके बाद से ही शिक्षक पुरानी पेंशन योजना में शामिल किए जाने की लगातार मांग कर रहे थे।
अधिकारियों के इनकार और अदालती रुख
याचिका में यह भी बताया गया कि राज्य के अधिकारियों ने गत वर्ष 25 सितंबर 2023 और 25 अक्टूबर 2023 को जारी अपने आदेशों के जरिए शिक्षकों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने से स्पष्ट इनकार कर दिया था। अधिकारियों का तर्क था कि सीएंडवी (कला और शिल्प, शारीरिक शिक्षक आदि) और प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (TGT) इस प्रकार की योजना में बदलाव या पुरानी व्यवस्था के तहत आने के पात्र नहीं हैं।
मामલા हाईकोर्ट में पहुंचने पर याचिकाकर्ताओं के वकील ने अपनी मांग को सीमित करते हुए अदालत से अनुरोध किया कि इस याचिका को एक औपचारिक अभ्यावेदन (रिप्रेजेंटेशन) मानकर अधिकारियों को इस पर नियमानुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया जाए।
राज्य सरकार का आश्वासन और आगामी कार्रवाई
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए आश्वासन दिया गया कि वे कानून के दायरे में रहकर पूरे मामले की समीक्षा करेंगे और एक तर्कपूर्ण आदेश जारी करेंगे। अदालत ने मामले के गुण-दोष (मेरिट) पर अपनी ओर से कोई भी टिप्पणी किए बिना सक्षम अधिकारियों को निर्देश दिया कि जैसे ही उन्हें प्रमाणित आदेश की प्रति प्राप्त होती है, वे 'ओम प्रकाश मामले' के पूर्व फैसलों के आलोक में छह सप्ताह के भीतर अपना अंतिम निर्णय लें। साथ ही, शिक्षकों को सुनवाई का मौका देकर फैसले की जानकारी तत्काल उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।