भ्रष्टाचार के दीमक किस तरह से व्यवस्था को अंदर ही अंदर खोखला कर रहे हैं, इसकी एक बानगी मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में देखने को मिली है। सरकारी महकमों और दफ्तरों में फैले लाल फीताशाही और घूसखोरी के तंत्र पर नकेल कसने के लिए एंटी-करप्शन ब्यूरो यानी लोकायुक्त पुलिस लगातार एक्शन मोड में नजर आ रही है। इसी कड़ी में जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने एक ताजा कार्रवाई करते हुए नरसिंहपुर में सहकारी समिति के ऑडिट के नाम पर अवैध वसूली कर रहे एक शख्स को दबोच लिया है। यह पूरा मामला सहकारिता विभाग से जुड़ा हुआ है, जहां कागजी खानापूर्ति और ऑडिट रिपोर्ट को मैनेज करने के एवज में रिश्वत की मांग की जा रही थी।
क्या है पूरा मामला? समझें शुरुआत से अंत तक की पूरी कहानी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा प्रकरण नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम मेघ से जुड़ा है। यहां के रहने वाले अशोक कुमार पटेल ने जबलपुर लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक अंजुलता पटले के समक्ष एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। आवेदक ने अपनी शिकायत में बताया था कि वह सेवा सहकारी समिति बरहटा से जुड़े मामलों को देखते हैं। समिति के वित्तीय वर्ष 2025-26 के कामकाज का ऑडिट किया जाना था, जिसकी जिम्मेदारी ऑडिट ऑफिसर राजेंद्र सिंह को सौंपी गई थी।
नियमों के तहत होने वाले इस ऑडिट को निष्पक्ष तरीके से पूरा करना ऑडिट ऑफिसर का कर्तव्य था, लेकिन आरोप है कि राजेंद्र सिंह ने इसे अपनी कमाई का जरिया बना लिया। ऑडिट रिपोर्ट में किसी भी प्रकार की आपत्ति या खामी नहीं निकालने के एवज में ऑडिट ऑफिसर द्वारा कथित तौर पर 20,000 रुपये की भारी-भरकम रिश्वत की डिमांड की जा रही थी। पीड़ित आवेदक रिश्वत देने के पक्ष में नहीं था, बल्कि वह इस अवैध मांग के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसना चाहता था।
लोकायुक्त ने ऐसे बिछाया जाल, सत्यापन में खुला भ्रष्टाचार का कच्चा चिट्ठा
आवेदक अशोक कुमार पटेल की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जबलपुर लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक ने तुरंत एक गोपनीय जांच टीम का गठन किया। योजना के मुताबिक, सबसे पहले शिकायत के सत्यापन (Verification) की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। लोकायुक्त के निर्देश पर यह जांचा गया कि क्या वाकई में ऑडिट ऑफिसर द्वारा रिश्वत की मांग की जा रही है या नहीं।
सत्यापन के दौरान दूध का दूध और पानी का पानी हो गया। रिकॉर्डेड बातचीत और सबूतों से यह स्पष्ट हो गया कि आरोपी ऑडिट ऑफिसर राजेंद्र सिंह रिश्वत लेने पर आमादा है। हालांकि, लंबी बातचीत और मोलभाव के बाद 20 हजार रुपये की मांग को घटाकर पहली किस्त के रूप में 8,000 रुपये लेने पर सहमति बनी थी। जब लोकायुक्त की तकनीकी और गोपनीय टीम ने इस बात की सौ फीसदी पुष्टि कर ली, तब एक ठोस ट्रैप प्लान तैयार किया गया।
नरसिंहपुर कार्यालय में लोकायुक्त टीम का छापा, सहआरोपी रंगे हाथों गिरफ्तार
तय रणनीति के तहत, 21 सितंबर 2026 को लोकायुक्त जबलपुर की विशेष टीम ने नरसिंहपुर में धावा बोला। यह कार्रवाई विपणन सहकारी समिति मर्यादित, नरसिंहपुर के मुख्य कार्यालय परिसर में अंजाम दी गई। जैसे ही आरोपी और उसके सिंडिकेट ने रिश्वत के तयशुदा 8,000 रुपये हाथ में लिए, पहले से मुस्तैद लोकायुक्त के जाबांज अधिकारियों ने उन्हें घेर लिया।
कार्रवाई के दौरान मुख्य आरोपी ऑडिट ऑफिसर राजेंद्र सिंह की संलिप्तता और उपस्थिति में, सहआरोपी अमित श्रीवास्तव को 8,000 रुपये नकद रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों धर दबोचा गया। लोकायुक्त की इस अचानक हुई कार्रवाई से कार्यालय में हड़कंप मच गया और अन्य कर्मचारियों में भी खलबली मच गई। टीम ने फौरन रंगे हाथों पकड़ी गई रिश्वत की राशि को अपने कब्जे में लिया और दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी।
भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा संदेश
इस पूरी कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यदि आम नागरिक हिम्मत जुटाकर भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाएं, तो कानून व्यवस्था उनकी ढाल बनकर मजबूती से खड़ी होती है। लोकायुक्त पुलिस इस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं और दस्तावेजों की भी गहनता से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
- मुख्य बिंदु:
- घटनास्थल: विपणन सहकारी समिति मर्यादित कार्यालय, नरसिंहपुर
- शिकायतकर्ता: अशोक कुमार पटेल (ग्राम मेघ, गोटेगांव)
- रिश्वत की राशि: कुल मांग 20,000 रुपये, पहली किस्त के रूप में 8,000 रुपये तय
- गिरफ्तारी: सहआरोपी अमित श्रीवास्तव ऑडिट ऑफिसर राजेंद्र सिंह की उपस्थिति में गिरफ्तार
- जांच एजेंसी: लोकायुक्त पुलिस, जबलपुर इकाई
लोकायुक्त विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर नरमी नहीं बरती जाएगी। जनता से अपील की गई है कि यदि कोई भी सरकारी मुलाजिम या अधिकारी किसी भी काम के एवज में अवैध वसूली या रिश्वत की मांग करता है, तो बिना डरे लोकायुक्त कार्यालय में इसकी शिकायत दर्ज कराएं, ताकि ऐसे भ्रष्ट तत्वों पर समय रहते शिकंजा कसा जा सके।