प्रशासनिक गलियारों में जब भी कर्तव्यनिष्ठा, कड़े फैसले और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति की बात होती है, तो एक नाम जो सबसे पहले जेहन में आता है, वह है आईएएस तुकाराम मुंढे (Tukaram Mundhe)। अपनी सख्त कार्यशैली और नियमों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के कारण उन्हें देश के सबसे चर्चित और बेबाक अधिकारियों में गिना जाता है। हाल ही में जब उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा में अपने सफर और अपनी सफलता के मूल मंत्र को याद किया, तो उन्होंने एक ऐसा राज खोला जो हर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले युवा के लिए एक बड़ा सबक है।
कठिन पारिवारिक पृष्ठभूमि से निकलकर शिखर तक का सफर
तुकाराम मुंढे के लिए आईएएस बनने का रास्ता फूलों की सेज नहीं था। उनका शुरुआती जीवन महाराष्ट्र के एक साधारण और संघर्षपूर्ण पारिवारिक माहौल में बीता। संसाधनों की भारी कमी के बावजूद उन्होंने कभी अपनी परिस्थितियों को अपनी सफलता के आड़े नहीं आने दिया। दिन-रात की कड़ी मेहनत और अटूट दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा (UPSC) जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षा को सफलतापूर्वक पास किया।
जब उन्होंने यह मुकाम हासिल किया, तो उनके माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू थे। एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले माता-पिता के लिए यह किसी बड़े चमत्कार से कम नहीं था। लेकिन उस सफलता के पल में उनके माता-पिता ने उन्हें जो सीख दी, वह उनके पूरे करियर का मार्गदर्शक बन गई।
माता-पिता की वह खास सलाह, जो बन गई जीवन का सार
एक इंटरव्यू में अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए तुकाराम मुंढे ने साझा किया था कि यूपीएससी क्रैक करने के बाद जब वह अपने घर पहुंचे, तो उनके माता-पिता ने उन्हें बधाई दी, लेकिन साथ ही एक बड़ी जिम्मेदारी का अहसास भी कराया। उनके माता-पिता ने स्पष्ट शब्दों में कहा था— "अब तुम एक बड़े अधिकारी बन गए हो, लेकिन कभी भी अपने पद का घमंड मत करना। तुम्हें जितनी भी ताकत या अधिकार मिले हैं, उसका इस्तेमाल हमेशा समाज के दबे-कुचले और जरूरतमंद लोगों की भलाई के लिए करना। जितना हो सके, लोगों का भला करना।"
यही वह सलाह थी जिसे तुकाराम मुंढे ने अपने जीवन का मूल मंत्र बना लिया। यही कारण है कि उनके पूरे करियर में जनता के हित सर्वोपरि रहे हैं, चाहे इसके लिए उन्हें कितने भी शक्तिशाली और रसूखदार लोगों से क्यों न टकराना पड़ा हो।
मौजूदा प्रशासनिक मोर्चे पर फिर एक्शन में तुकाराम मुंढे
वर्तमान में (वर्ष 2026 में) तुकाराम मुंढे अपनी सख्त और बेबाक कार्यशैली को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हाल ही में खाद्य और औषधि प्रशासन (FDA) आयुक्त का पद संभालने के बाद से ही उन्होंने मिलावटखोरों और नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू कर दी है।
जैसे ही उन्होंने इस विभाग की कमान संभाली, वैसे ही नियमों को ताक पर रखकर काम करने वाले लोगों और माफियाओं में खलबली मच गई। उनकी कार्यशैली साफ संकेत देती है कि वह किसी भी तरह की लापरवाही या जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त करने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं।
क्यों चर्चा में रहती है तुकाराम मुंढे की कार्यशैली?
- जीरो टॉलरेंस नीति: भ्रष्टाचार और नियमों के उल्लंघन के मामलों में कभी भी समझौता न करना।
- जनता के प्रति जवाबदेही: प्रशासनिक तंत्र को आम जनता के लिए सुलभ और पारदर्शी बनाना।
- बिना किसी दबाव के काम: राजनीतिक या अन्य किसी भी प्रकार के दबाव में आए बिना केवल कानून के दायरे में रहकर फैसले लेना।
- त्वरित कार्रवाई: शिकायतों पर तुरंत एक्शन लेना और दोषियों के खिलाफ कड़े कानूनी कदम उठाना।
युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत
आज के दौर में जहां कई युवा केवल ग्लैमर और पावर के लिए सिविल सेवा की तैयारी करते हैं, वहीं तुकाराम मुंढे का जीवन यह सिखाता है कि प्रशासनिक सेवा असल में जनसेवा का माध्यम है। उनके माता-पिता की वह साधारण सी सलाह आज एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुकी है, जहां हर कदम पर न्याय और ईमानदारी को प्राथमिकता दी जाती है।
फूड एंड ड्रग डिपार्टमेंट में उनकी हालिया कार्यवाहियों से यह साफ जाहिर होता है कि जब एक ईमानदार और दृढ़ इच्छाशक्ति वाला अधिकारी सही दिशा में काम करता है, तो पूरा सिस्टम पटरी पर आ जाता है। तुकाराम मुंढे का यह सफर न सिर्फ यूपीएससी aspirants के लिए एक प्रेरणा है, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए एक मिसाल है जो समाज में सकारात्मक बदलाव लाना चाहता है।
